सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

[ s /01 ] धर्म ; असीम आनंद का आदिश्रोत है परमात्मा

code - 01

web - gsirg.com


धर्म ; असीम आनंद का आदिश्रोत है परमात्मा


इस संसार में सुख की अभिलाषा किसे नहीं होती है | अर्थात यहां पर जन्म लेने वाले प्रत्येक प्राणी को ही सुख की अभिलाषा होती है | क्या मनुष्य क्या पशु-पक्षी और क्या मूक जानवर सभी को यह चाहत किसी न किसी रूप मे अवश्य बनी ही रहती है | पक्षियों द्वारा कलरव करना , इधर उधर फुदकना , पेड़ों की डालियों पर बैठकर इतराना , चहचहाना और दाने चुगना आदि क्रियाएं करना , यह सभी कुछ और नहीं , बल्कि सुखचैन पाने की ही क्रिया कवायद है | इसी तरह पशुओं का मस्ती में आकर इधर - उधर दौड़ लगाना , कुलांचे भरना और तेज चाल से चलना सभी कुछ सुख पाने के लिए ही किया जाता है |

मानव की सुख की खोज

जब इस संसार का प्रत्येक प्राणी सुख पाने का प्रयास करता है , तो मानव ही पीछे क्यों रहे , वह भी अपने सुख की प्राप्ति के लिए तरह तरह के प्रयास करता है | क्योंकि मानव खुद को संसार के सभी जीवो मे अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बुद्धिमान तथा जगतनियंता परमपिता परमेश्वर का प्रतिनिधि समझता है | यही कारण है कि वह समझता है कि , सुख पर उसका शाश्वत अधिकार तथा उसे पाने का प्रबल पुरुषार्थ भी है | अतः सुख की प्राप्ति के लिए वह जीवन में धन , ऐश्वर्य तथा विविध प्रकार के उपयोगी पदार्थोँ का अर्जन तथा उपार्जन करता रहता है | क्योंकि ऐसा करना वह भौतिक जीवन व भौतिक सुख की प्राप्ति के लिए तो आवश्यक समझता है , और आवश्यक है भी | पर क्या उसके इन प्रयासों से उसे वास्तविक सुख की प्राप्ति हो पाती है , शायद नहीं | वास्तव में भोग पदार्थों से प्राप्त भौतिक सुखों की सीमा , भौतिक शरीर तथा भौतिक जीवन के आस-पास ही समाप्त हो जाती है | इसका सीधा परिणाम यह होता है कि , भौतिक सुखों को प्राप्त कर लेने के बाद भी , वह व्यक्ति अतृप्त , अशांत और उदिग्न ही बना रहता है | अंत में वह जीवन भर भौतिक सुख-साधनों , विभिन्न प्रकार के भोगों के पीछे भागते-भागते रहने के बाद , भी उस मानव के हाथ कुछ नहीं लगता है | उसका सारा जीवन इसी सुख की मृग मरीचिका के पीछे दौड़ते दौड़ते समाप्त हो जाता है | इस प्रकार से उसका अनमोल और बहुमूल्य जीवन यूं ही बीत कर , शून्य हो जाता है |

मानव जीवन की अपूरणीय क्षति

अवास्तविक सुखों की प्राप्ति मे मानव का संपूर्ण जीवन शून्य हो जाना उसकी सबसे बड़ी क्षति है | क्या मानव जीवन को इससे भी बड़ी कोई अन्य क्षति हो सकती है | शायद नहीं , हरगिज़ नहीं | अतः उसे अब यह जान लेना चाहिए और मान लेना चाहिए कि अब तक उसने जो गंवा दिया है | उसको भूलकर वह वास्तविक सुखों की प्राप्ति के लिए अब देर न करे | क्योंकि विविध भोग पदार्थों से प्राप्त सुख शाश्वत नहीं है , बल्कि नश्वर है | संसार के अवास्तविक सुख , इंद्रियजन्य तथा क्षणिक हैं | इनकी प्राप्ति कर लेने अथवा भोग लेने के बावजूद भी , अंत तक हमारी इच्छाएं अतृप्त ही रहती हैं , क्योंकि उनको पाने की इच्छा हमारे मन में सदैव बनी रहती है | जिस प्रकार अग्नि में कुछ भी डाल देने से अग्नि बुझती नही बल्कि और तेजी से प्रज्वलित हो जाती है | ठीक इसी प्रकार प्रत्येक मानव के मन मे सुखो दर सुखों की प्राप्ति के उपरांत भी , इनके पाने की लालसा बढ़ती ही रहती है | मानव मन की यह अभिलाषा रूपी अग्नि कभी भी कदापि बुझती या समाप्त नहीं होती है | अंत में यह भी कहा जा सकता है , कि भोग पदार्थों तथा भौतिक सुख साधनों से सुख पाने की अंतहीन लालसा से ठोस रूप में कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है |

जीवन व्यर्थ ना जाने दे

इस संसार के सभी मानवों को अपने से बड़े बड़ों की जीवनी पर एक निगाह अवश्य डालनी चाहिए | ऐसा करने से आपको बहुत से ऐसे लोग मिल जाएंगे , जिन्होंने अपनी सारी उम्र बचपन से लेकर बुढ़ापे तक , भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए गुजारा होगा | धन वैभव और विभिन्न प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति मे उन्होंने अपना पूरा जीवन समाप्त किया होगा | परंतु वृद्धावस्था या उम्र के अंतिम पड़ाव पर उन्हें यह कहते हुए पाया होगा कि , उनका तो सारा जीवन ही व्यर्थ गया | संपूर्ण जीवन बीत जाने के बाद भी , उन्हें कुछ प्राप्त नहीं हुआ | यानी नतीजा शून्य हीं रहा | ऐसे लोगों ने अपने जीवन में भौतिक सुख-साधनों को पा लेने के बाद भी अपने जीवन को अधूरा , अपूर्ण और एकांगी ही पाया होगा | दूसरों के संपूर्ण जीवन को देखकर , प्रत्येक मानव को इस पर विचार करना चाहिए | \\\\

🔺आनंद प्राप्ति का सच्चा मार्ग

उपरोक्त सभी सुखों का विवेचन करने के उपरांत , मानव को एक सच्चे गुरु की खोज करनी चाहिए , जो उसे सुख प्राप्ति का सच्चा मार्ग दिखा सके | सच्चा गुरु ही आपका सही मार्गदर्शन कर सकता है | जिससे आपका जीवन सच्चे सुखों से ओतप्रोत हो सकता है | एक सच्चा गुरु ही बता सकता है कि , जीवन में शाश्वत सुख व आनंद की प्राप्ति का सही मार्ग सद्गुरुओं , संतो और शास्त्रों से ही मिल सकता है | सच्चा मार्ग बताते हुए वह आप को यह भी जानकारी प्राप्त करा देगा कि , वास्तव में इंद्रियजन्य सुख, भौतिक साधनों, भोग- पदार्थों से पाया गया सुख, सच्चा सुख है ही नही , बल्कि यह सुख तो केवल सुख की मृग मरीचिका मात्र है | सच्चे सुखों को पाने की लालसा में इस संसार के बहुत से लोगों ने अपने अनमोल जीवन नष्ट कर दिए है | उनके अनेकों प्रयासों से भी उन्हें सच्चा सुख प्राप्त नही हुआ है | सच्चे सुख की प्राप्ति के लिए मानव को संतो सद्गुरुओं ऋषियों तथा मुनियों का सानिध्य प्राप्त करके ही पाया जा सकता है |

आत्मा ईश्वर का प्रकाश रूप है

निस्संदेह , ईश्वर ने सृष्टि की रचना की है | इस रचना की सुंदरता के लिए उसने पेड़ , पौधे , वनस्पतियां , सागर , पहाड़ , नदियां , सूर्य और चंद्रमा आदि का निर्माण किया है | प्रत्येक जीवआत्मा में उसी का सनातन अंश विद्यमान है | इस देह के भीतर स्थित यह आत्मा , अविनाशी और नित्य है | हमारी आत्मा भी ईश्वर का ही प्रकाश प्राप्त कर उससे जुड़ने की कोशिश करे | यह जड़ नहीं , बल्कि चेतन है | इसतरह से यह सिद्ध होता है कि सुख व आनंद की प्राप्ति भोग पदार्थों से न होकर , आनंद की आदि अनादि अनंत स्रोत ईश्वर से जुड़कर ही हो सकती है | जब हम अपनी अंतस मे जन्म-जन्मांतरों से सुप्त , आत्मा को योगाग्नि व ब्रम्हाग्नि से तथा बारंबार के अभ्यास से जागृत कर नही लेते हैं तबतक हमें सच्चा सुख प्राप्त नहीं हो सकता है | यदि हमने आत्मा को जागृत कर लिया फिर तो विराट ब्रह्म से प्रदीप्त उस अग्नि के आलोक से जीवन प्रदीप्त हो उठेगा | और तब ही मानव को अपने जीवन में सच्चे सुख की अनुभूति हो सकेगी |


इति श्री

web - gsirg.com

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

इलाज ; एसिड अटैक [1/15 ] D

web - gsirg.com इलाज ; एसिड अटैक के क्या कारण आजकल अखबारों में तेजाब से हमले की खबरें पढ़ने को मिल ही जाती हैं। तेजाब से हमला करने वाले व्यक्ति प्रायः मानसिक बीमार या किसी हीनभावना से ग्रस्त होते हैं। ऐसे लोग अपनी हीनभावना को छिपाने तथा उसे बल प्रदान करने के लिए अपने सामने वाले दुश्मन व्यक्ति पर तेजाब से हमला कर देते हैं। कभी-कभी इसका कारण दुश्मनी भी होता है , इसके अलावा कभी-कभी लोग अपनी आत्मरक्षा के लिए भी एसिड अटैक का अवलंबन कर लेते हैं। कारण कुछ भी हो किंतु इसमें पीड़ित को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है। ऐसे हमलों का होना या ऐसी घटनाएं होना हर देश में आम बात हो गई है। इस्लामी देशों में लड़कियों को उनकी किसी त्रुटि के कारण तो ऐसी धमकियां खुलेआम देखने को मिल जाती हैं। \\ शरीर का बचाव \\ यदि के शरीर किसी पर तेजाब से हमला होता है , उस समय शरीर के जिस भाग पर तेजाब पड़ता है , वहां पर एक विशेष प्रकार की जलन होने लगती है | इस हमले में शरीर का प्रभावित भाग बेडौल , खुरदरा और भयानक हो सकता है | इस हमले से पीड़ित व्यक्ति शरीर की त...

इलाज ; कुष्ठ रोग जानकारी और बचाव

web - gsirg.com इलाज ; कुष्ठ रोग जानकारी और बचाव यह एक घृणित रोग है | इस रोग में आदमी के शरीर के अंगों का गलना शुरू हो जाता है | इस रोग से प्रभावित अंगों से दुर्गंधयुक्त मवाद निकलने लगती है , धीरे-धीरे रोगी के यह अंग गल गल कर बहने लगते हैं | रोग की चरमावस्था पर धीरे-धीरे के अंग शरीर से गायब या समाप्त हो जाते हैं | जिसके कारण कोई अन्य व्यक्ति उसके पास उठता बैठता या खाता पीता नहीं है | इसके अलावा वह रोगी से किसी प्रकार का संबंध भी नहीं रखना चाहता है | दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो लोग ऐसे रोगी को घृणा की दृष्टि से देखते हैं | इस रोग का रोगी स्वयं भी अपने आप से घृणा करने लगता है , कभी-कभी तो रोगी रोग से परेशान होकर आत्महत्या करने का विचार भी करने लगता है | कुष्ठ हर चूर्ण बनाना कुष्ट के रोगी को चाहिए कि वह अपने रोग से निजात पाने के लिए यह चूर्ण बना ले | इसके लिए रोगी को बकायन नामक वृक्ष के बीज इकट्ठा करना होता है | इन बीजों की मात्रा जब 2 किलो ग्राम के लगभग हो जाए , तब इनकी साफ-सफाई कर ले , ताकि उन पर लगी धूल मिट्टी आदि निकल जाए | अब इन बीजों की आधी मात्रा यानी 1 किल...

काम शक्ति से भरपूर बनाने वाली औषधि | Kamshakti se bharpoor bananewali aoshdhi

                                  web - helpsir.blogspot.com काम शक्ति से भरपूर बनाने वाली औषधि यह तो सभी जानते हैं कि जीवन का आखिरी चरण अर्थात होना एक शारीरिक है | शरीर के बुड्ढे हो जाने पर व्यक्ति की सभी इंद्रियां और अंग प्रत्यंग कमजोर हो जाते हैं | प्रत्येक व्यक्ति को अपने पूरे जीवन का एक लंबा अनुभव होता है | बुढ़ापे मे आदमी का शरीर अवश्य कमजोर हो जाता है , परन्तु उसका मन कभी कमजोर नहीं हो पाता है | क्योंकि व्यक्ति के मन की कोई उम् सीमा नहीं होती है | इसलिए मन सदैव ही युवा बना रहता है | दूसरे शब्दों में इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि मन पर काल का प्रभाव कभी नहीं पड़ता है | Mircle Drug मन की अनंत इच्छाएं Young medicine प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अनेकों इच्छाएं करता रहता है , तथा उनकी पूर्ति के लिए आजीवन उसमें संलग्न भी रहता है | पर उसकी यह इच्छाएं केवल और केवल उसकी मृत्यु के बाद ही उसका पीछा छोड़ती है | ऐसी ही अनेकों इच्छाओं में कामेच्छा भी शामिल है | हर व्यक्ति अपने ज...