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सजा

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सजा

एक प्रतीकात्मक क्षेपक जो आपकी सोंच बदल देगा

⧭किसी स्थान पर एक बहुत ही प्रसिद्ध महात्मा रहा करते थे |उनकी ख्याति उस क्षेत्र के आसपास फैली हुई थी |ज्ञानी , धार्मिक और विद्वान होने के कारण , उस क्षेत्र के कई जिज्ञासु पुरुष , उनके शिष्य बन गए | उनके शिष्यों में एक शिष्य ने , अपने गुरु के आशीर्वाद से , जब सभी प्रकार की शिक्षाएं प्राप्त कर ली , तो गुरु की आज्ञा प्राप्त कर , वह जन कल्याण के लिए बाहर भ्रमण की सोचने लगे | गुरुजी ने उनके मन में छिपी परोपकार की भावना को जानकर , उन्हें अपने आश्रम से सहर्ष , आशीर्वाद देते हुए खुशी खुशी अन्यत्र भ्रमण करने की इजाजत दे दी | गुरु की आज्ञा पाकर महात्मा जी देशाटन को निकल पड़े | एक जगह पर मनोरम स्थान देखकर , उन्होंने एक कुटिया बना ली | महात्मा जी ज्ञानी पुरुष तो थे ही इसलिए उनकी भी प्रशंसा चारों को फैल गई |


⧭महात्मा जी की कुटिया के पास के एक गांव में एक वृद्ध महिला रहती थी | एक समय उसका बेटा बहुत बीमार पड़ गया | उस बुढ़िया ने अपने बेटे की हर संभव चिकित्सा की , परंतु उसे कोई लाभ नहीं मिला | तब गांव वालों ने उस महिला को सलाह दी , कि पास के गाँव की कुटिया में रहने वाले महात्मा जी बहुत ही पहुंचे हुए महान पुरुष है | अगर वह उनके पास जाए तो हो सकता है कि , उसके बच्चे की जान बच जाए |


⧭बेचारी बेबस और लाचार महिला महात्मा जी के पास जाकर , अपने बेटे के कल्याण के लिए उनसे कामना करने लगी | महिला के बार बार विनती करने पर , महात्मा जी को दया आ गई | उन्होंने अपना अधोवस्त्र ढीला किया और वहां से एक '' बाल '' उखाड़ कर उस महिला को देते हुए कहा , कि इसका ताबीज बनाकर , वह बच्चे के गले में बांध दें तो , बच्चा ठीक हो जाएगा | साथ ही महिला को शपथ भी दिलवा दी कि , वह यह बात किसी से न बताएं | महात्मा जी ने उस महिला से यह भी कहा , कि जब भी किसी को कोई रोग हो जाए तो वह भी इस ताबीज़ के बांधने से ठीक हो जाएगा , परन्तु वह यह बात किसी और को नही बतायेग़ी |


⧭महिला खुशी-खुशी उस '' बाल'' को महात्मा जी का प्रसाद मानकर , घर ले आई | अब महिला ने उस '' बाल '' को ताबीज में डालकर बच्चे को बांध दिया | असाध्य बीमारी से पीड़ित उस महिला का बच्चा ,एक ही दिन में ठीक हो गया |


⧭उस महिला के बच्चे के असाध्य रोग को चमत्कारिक ढंग से ठीक हो जाने पर , गांव के लोगों ने उस महिला से बच्चे के ठीक होने का उपाय जानने का प्रयास करने लगे | काफी समय तक महिला ने किसी को कुछ नहीं बताया | परंतु लोगों के बार-बार प्रार्थना और याचना करने पर उसे दया आ गई , और उसने गांव वालों को सारा भेद बता दिया | अब तो गांव के लोगों मे यह बात जंगल की आग की तरह फैल गई | धीरे-धीरे गांव के कुछ लोगों ने आपस मे सलाहकार महात्मा जी के अधोवस्त्र के नीचे का '' चमत्कारिक बाल'' पाने की तरकीबें सोचने लगे |


⧭दूसरे दिन गांव के कई लोग महात्माजी की कुटिया पर पहुंचे , और उनसे नीचे का '' बाल'' पाने की प्रार्थना करने लगे | महात्मा जी के नानुकर करने पर कुछ लोगों ने महात्मा जी को पकड़ लिया , और उनके एक-एक कर सभी '' बाल '' उखाड़ ले गए | उन बालों को उन्होंने गांव वालों को भी बांट दिया , ताकि यदि किसी पर कोई परेशानी आए तो , वह उसे दूर कर सके | अब तो महात्मा जी बहुत परेशान हो गए तथा अपना सिर पीटने लगे , लेकिन उनकी परेशानियों का अंत यहीं पर नहीं हुआ |


⧭बाबा के बाल उखाड़ने की बात , जब दूसरे गांव के लोगों को पता चली , तब एक दिन वह लोग भी अपने साथ नाई को लेकर महात्माजी की कुटिया में गए , और बाबा के शरीर के '' सारे बाल '' नाई से बनवा कर अपने पास ले गए | उन्होंने सोचा कि अगर महात्मा जी के अन्दरूनी एक बाल में इतनी अद्भुत और चमत्कारिक शक्ति है तो , शरीर के कई बार मिलकर उतनी शक्ति जरूर प्राप्त कर लेंगे | अब महात्मा जी के सारे शरीर का मुंडन हो चुका था | महात्माजी बहुत परेशान हो गए , और उसी रात अपनी कुटिया छोड़कर , अपने गुरु जी के पास पहुंच गए |

⧭अपने एक शिष्य की यह दशा देखकर गुरु जी को बहुत ही दुख हुआ | महात्मा जी ने गुरु जी से कहा कि , गुरु जी मै तो आसपास के गांव के सभी लोगों का कल्याण कर रहा था | फिर मेरी यह दुर्दशा क्यों हो गई ? आप तो ज्ञानी हैं , आप मुझे इसका कारण बताएं |

⧭ इस पर गुरूजी ने महात्मा जी को बताया कि हे ! मेरे प्रिय शिष्य , यह संसार ऐसा ही है , यहां पर यदि आप किसी का भला करना चाहेंगे , और करेंगे भी | तब भी यह संसार इतना एहसानफरामोश , इतना स्वार्थी है कि , वक्त आने पर वह आपके अहसानों को भूलकर , अपने छोटे से लाभ के लिए, आपका अहित करने से नहीं चूकेगा |

⧭इस सबके बावजूद कुछ इसमें गलती तुम्हारी भी है | तुम्हें चाहिए था कि किसी का हित शरीर के किसी अंशदान के बजाय ,किसी अन्य प्रकार जैसे थोड़ी सी भस्म , या मिट्टी अथवा कुछ और देकर भी कर सकते थे | इस शरीर के अंशदान की भी एक सीमा है | इसके बाद क्या बचता है , अर्थात कुछ भी नहीं | इसलिए तुम्हें अपनी गलती या फिर अपनी भूल की सजा मिली है |

⧭अच्छा तो यही है कि अब तुम अपना पिछला सब कुछ भूल कर , पुनः अपने परोपकार कर्म मे लिप्त हो जाओ | ईश्वर तुम्हारा कल्याण करेगा |

⧭आपकी समझ मे कुछ आया ? अगर नही समझ आया तो , नासमझ न बनें , कुछ समझने की कोशिश कीजिये , कुछ तो ग्रहण कीजिये |

धन्यवाद

इति श्री


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