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Showing posts from January, 2019

E V M पर महाभारत

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।कांग्रेस पार्टी के कर्ता-धर्ता E.v.m. पर कोहराम मचाए हुए हैं।भारत की बदनामी करवाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी है।इंंग्लैण्ड में श्री कपिल सिब्बल जी की मौजूदगी महज इत्तेफाक नहीं है।बल्कि यह सब नाटक कांग्रेस पार्टी की सोंची समझी चाल है।सैयद शुजा नें जो दावा किया था किE.v.m. निर्माण में वह शामिल था,और 2014 के लोकसभा चुनावों मेंE.v.m. हैक की गई थी।राष्ट्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा जी नें F.i.r. दर्ज करवाने के आदेश जारी कर दिए हैं।कांग्रेस पार्टी ने भी श्री कपिल सिब्बल जी की उपस्थिति से भी पल्ला झाड़कर उनका निजी मामला बता दिया है।कांग्रेस का दुश्मन देशों चीन,पाकिस्तान से लोकसभा चुनावों में मोदीजी को हराने  के लिए मदद मांगना अनुचित है।जब तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी तो कांग्रेस ने E.v.m. राग नहीं अलापा।"मिठुआ-मिठुआ गप्प।कड़ुआ-कड़ुआ थू।"वाली कहावत चरितार्थ कर रही है।भारत महान की बदनामी करवाना कहीं से भी उचित नहीं है।कांग्रेस की आदत सत्ताधारी दल की रही है।उनसे स्वस्थ और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका नहीं निभ रही है।2014  के आम लोकसभा …

खर्चीली शादियाँ , एक से बढ़कर एक

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।इस समय सहालग जोरों पर है।लोग सज-धज कर हालते-कांपते बाराती बनकर अपने-अपनों की बारात आते-जाते देखे जा सकते हैं।औरतों,लड़कियों को फैशन के दौर में ज्यादा ठिठुरते देखा जा सकता है।खर्चीली शादियों का दौर थमता नहीं दिख रहा है।एक से बढ़कर एक खर्चीली शादियाँ देखी जा सकती हैं।मंहगाई के युग में सबसे ज्यादा परेशानी गरीब वर्ग को होती है।बड़े लोगों की देखा-देखी गरीब वर्ग भी अपनी लाडली की बिदाई में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता ।कर्ज लेकर,खुद को मिटाकर बड़े लोगों की तरह हर इन्तजाम करता है।और सारे अरमान पूरे करता है।इस तरह दहेज दानव की गिरफ्त में आ जाता है।फिर शुरू होता है कभी न खत्भ होने वाला मांगों का सिलसिला।जब तक गरीब आदमी का वश चलता है मांग पूरी करता रहता है।अक्षम,असहाय होनें पर उसकी लाडली को मृत्यु वरण करना ही पड़ता है।चाहे जहर देकर या फांसी लगाकर चाहे जलाकर।फिर डी.पी.एक्ट और अदालतों का चक्कर।एक दिन ऐसा भी आता है जब कुछ रूपये ले-दे कर लाडली की लाश का सौदा तय हो जाता है।और लक्ष्मी देवी की चमक तले सब कुछ दफध हो जाता है।सात खून माफ हो जाते हैं और सुलहनामा लगा दिया जाता है।औ…

खर्चीली शादियाँ , एक से बढ़कर एक

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।इस समय सहालग जोरों पर है।लोग सज-धज कर हालते-कांपते बाराती बनकर अपने-अपनों की बारात आते-जाते देखे जा सकते हैं।औरतों,लड़कियों को फैशन के दौर में ज्यादा ठिठुरते देखा जा सकता है।खर्चीली शादियों का दौर थमता नहीं दिख रहा है।एक से बढ़कर एक खर्चीली शादियाँ देखी जा सकती हैं।मंहगाई के युग में सबसे ज्यादा परेशानी गरीब वर्ग को होती है।बड़े लोगों की देखा-देखी गरीब वर्ग भी अपनी लाडली की बिदाई में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता ।कर्ज लेकर,खुद को मिटाकर बड़े लोगों की तरह हर इन्तजाम करता है।और सारे अरमान पूरे करता है।इस तरह दहेज दानव की गिरफ्त में आ जाता है।फिर शुरू होता है कभी न खत्भ होने वाला मांगों का सिलसिला।जब तक गरीब आदमी का वश चलता है मांग पूरी करता रहता है।अक्षम,असहाय होनें पर उसकी लाडली को मृत्यु वरण करना ही पड़ता है।चाहे जहर देकर या फांसी लगाकर चाहे जलाकर।फिर डी.पी.एक्ट और अदालतों का चक्कर।एक दिन ऐसा भी आता है जब कुछ रूपये ले-दे कर लाडली की लाश का सौदा तय हो जाता है।और लक्ष्मी देवी की चमक तले सब कुछ दफध हो जाता है।सात खून माफ हो जाते हैं और सुलहनामा लगा दिया जाता है।औ…

गरीबी हटाओ बनाम गरीब हटाओ

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।आजादी के बाद से अब तक जितनी भी चुनी हुई सरकारें बनी हैं।सब सरकारों ने किसान हित का ही बजट पेश करती चली आ रहीं हैं।लेकिन आज तक किसानों का हित कभी नहीं हुआ है।सभी सरकारों ने एक सुर से गरीबी हटाने की बातें करती रही हैं।गरीबी नहीं हटी हाँ गरीब जरूर हट गए हैं।गरीबी गरीब को खाकर गरीबी का पोषण करती है।गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों की संख्या में इजाफा ही होता रहा है।छटनी करते समय सिस्टम का दोष सामने आ जाता है।अपात्र पात्रों की संख्या ही बढ़ जाती है।वास्तविक गरीब को कभी भी योजनाओं का सही लाभ नहीं मिला है।यहीं कारण है कि गरीब लोगों की संख्या वहीं रहती है।और बल्कि इजाफा ही हो जाता है।श्रीमती इंदिरा गांधी जी के जमाने से गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम चल रहा है।लेकिन गरीबी है कि हटने का नाम ही नहीं ले रही है।सरकारें हट जाती हैं लेकिन गरीबी नहीं हटती है।गरीबों और किसानों का कल्याण कोई भी सरकार करना ही नहीं चाहती है।केवल गरीबों और किसानों के हित की बात ही सभी सरकारों ने किया है।गरीबों और किसानों के हित के लिए कोई संजीदा प्रयास नहीं किए गए।किसानों और गरीबों की…

गरीबी हटाओ बनाम गरीबी हटाओ

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।आजादी के बाद से अब तक जितनी भी चुनी हुई सरकारें बनी हैं।सब सरकारों ने किसान हित का ही बजट पेश करती चली आ रहीं हैं।लेकिन आज तक किसानों का हित कभी नहीं हुआ है।सभी सरकारों ने एक सुर से गरीबी हटाने की बातें करती रही हैं।गरीबी नहीं हटी हाँ गरीब जरूर हट गए हैं।गरीबी गरीब को खाकर गरीबी का पोषण करती है।गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों की संख्या में इजाफा ही होता रहा है।छटनी करते समय सिस्टम का दोष सामने आ जाता है।अपात्र पात्रों की संख्या ही बढ़ जाती है।वास्तविक गरीब को कभी भी योजनाओं का सही लाभ नहीं मिला है।यहीं कारण है कि गरीब लोगों की संख्या वहीं रहती है।और बल्कि इजाफा ही हो जाता है।श्रीमती इंदिरा गांधी जी के जमाने से गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम चल रहा है।लेकिन गरीबी है कि हटने का नाम ही नहीं ले रही है।सरकारें हट जाती हैं लेकिन गरीबी नहीं हटती है।गरीबों और किसानों का कल्याण कोई भी सरकार करना ही नहीं चाहती है।केवल गरीबों और किसानों के हित की बात ही सभी सरकारों ने किया है।गरीबों और किसानों के हित के लिए कोई संजीदा प्रयास नहीं किए गए।किसानों और गरीबों की…

नारद का महल मोह

gsirg.com नारद का महल मोह
      मित्रोंआज हम तुम्हे भारतीय धर्म ग्रन्थों से सम्बन्धित एक दिलचस्प कहानी बताने जा रहे हैं, हमे आशा ही नही पूर्ण विश्वास है कि यह कहानी आपका पूरा मनोरंजन करेगी।       एक बार देवर्षि नारद को तीनो लोकों का भ्रमण करते हुए मन मे ख्याल आया कि मै तो सभी देवी देवताओं के पास भ्रमण करके पहुँचता ही रहता हूँ। सभी के पास सभी सुख सुविधाओं से युक्त ऊँचे ऊँचे विशालकाय महल हैं। उनके मन में यह भी आया कि भगवान् श्रीकृष्ण के पास भी तो बहुत महल आदि हैं ही,यदि वे एक- आध हमको भी दे दें तो हम भी यहीं आराम से टिक जायें, नहीं तो इधर-उधर घूमते रहना पड़ता है। भगवान् के द्वारिका में बहुत महल थे।
      यही विचार करते करते नारदजी पहुँच गये द्वारिकापुरी और भगवान् से कहा," भगवन् ! आपके पास तो बहुत से महल हैं, एक हमको भी दो तो हम भी आराम से यहीं रहें। आपके यहाँ साथ रहने के अलावा यहीं खाने- पीने का भी इंतजाम अच्छा ही है ,सो मेरा शेष जीवन भी आराम से कट जायेगा। "
      भगवान् सोंच मे पड़ गये कि यह मेरा परमभक्त है, विरक्त संन्यासी है। अगर मैंने इसे महल दे दिया और  अगर कहीं यह राजसी ठाठ…

नवयुवको मे बढता नशे का दौर

gsirg.com नवयुवको मे बढता नशे का दौर आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। नवयुवकों में नशे की लत बढ़ती ही जा रही है।नवयुवतियां भी नवयुवकों के साथ कदमताल मिला रही हैं।वाइन,रम,विह्सकी और गाँजा की चिलम की लत विशेष रूप से बढ़ी है।शादी-पार्टी में डांस करने वाले 90% लड़के अंग्रेजी शराब के नशे में होते हैं।और खूब धमाल मचाते हैं।बाइक पर बैठकर गुटखे को दाँत से कुतर कर बड़ी शान से फंकी मारकर बाइक को हवाई जहाज बनाना इनकी आदत में शुमार है।लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों से आगे रहती हैं।फिर यह क्षेत्र अछूता कैसे रह जाता।इस क्षेत्र में भी लड़कियां लड़कों से पीछे कहाँ हैं? शराब पीने का केवल बहाना होना चाहिए।खुशी है तो भी सेलीब्रेट करने के लिए अंग्रेजी शराब की पार्टी होना जरूरी है।गम हो तो गम कम करने के लिए शराब की पार्टी होना जरूरी है।खुशी के मौके पर ज्यादा प्याले छलकते हैं।बिना शराब के कैसी खुशी ? नये लड़के और लड़कियों में नशे की लत बढ़ती ही जा रही है।सिगरेट के धुएं के लच्छे उड़ाना इनकी शान में शामिल है।हर फिक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया।गुटखा,सिगरेट, वाइन,रम,विह्सकी के पैग पर पैग गटकना हर वर्ग की पार्टी में फैशन बनता…

सिमटते जंगल , हिंसक होते जीव जन्तु

helpsir,blogspot,in
सिमटते जंगल , हिंसक होते जीव जन्तु 
आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। भारत देश की राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता का मानक,मानक स्तर  से मारक स्तर तक जा पहुंची है।लोग बढ़ रहे हैं,पेड़ घट रहे हैं।कल कारखाने बढ़ रहे हैं।पेट्रोल/ डीजल चालित वाहन बढ़ रहे हैं।प्रदूषण स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।लोग बीमार पड़ रहे हैं।भारत में भगवान ने खूब प्राकृतिक सम्पदा दी है।कोई कंजूसी भगवान नें प्राकृतिक सम्पदा देने में नहीं की है।दोनो हाथों से लुटाया है।वन सम्पदा का ह्रास कुछ तेजी से हुआ है विगत दो दशकों में।वन सम्पदा खोने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।असंतुलित बारिश, बेमौसम बरसात, का असर कृषि पर पड़ता है।70% कृषक अन्नदाता मुश्किल में पड़ जाता है।वन सम्पदा का दोहन घटा कर सरकारी भूमि पर वृक्षारोपण का अभियान चलाना होगा।वरना वह दिन दूर नहीं जब बच्चों के लिए शुद्ध वायु के लिए आक्सीजन सिलिण्डर भी खरीदना पड़ेगा।वन क्षेत्र सिमटता जा रहा है।वन्यजीवों को रहने के लिए हमने छोड़ा ही क्या है?जंगल कट रहे हैं।वाहनों का शोर ध्वनि प्रदूषण बढ़ा रहा है साथ में वायु प्रदूषण भी।ऐसे वातावरण में वन्यजीवों का रहना म…

सिमटते जंगल, हिंसक होते जीव - जन्तु

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सिमटते जंगल , हिंसक होते जीव जन्तु  आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। भारत देश की राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता का मानक,मानक स्तर  से मारक स्तर तक जा पहुंची है।लोग बढ़ रहे हैं,पेड़ घट रहे हैं।कल कारखाने बढ़ रहे हैं।पेट्रोल/ डीजल चालित वाहन बढ़ रहे हैं।प्रदूषण स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।लोग बीमार पड़ रहे हैं।भारत में भगवान ने खूब प्राकृतिक सम्पदा दी है।कोई कंजूसी भगवान नें प्राकृतिक सम्पदा देने में नहीं की है।दोनो हाथों से लुटाया है।वन सम्पदा का ह्रास कुछ तेजी से हुआ है विगत दो दशकों में।वन सम्पदा खोने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।असंतुलित बारिश, बेमौसम बरसात, का असर कृषि पर पड़ता है।70% कृषक अन्नदाता मुश्किल में पड़ जाता है।वन सम्पदा का दोहन घटा कर सरकारी भूमि पर वृक्षारोपण का अभियान चलाना होगा।वरना वह दिन दूर नहीं जब बच्चों के लिए शुद्ध वायु के लिए आक्सीजन सिलिण्डर भी खरीदना पड़ेगा।वन क्षेत्र सिमटता जा रहा है।वन्यजीवों को रहने के लिए हमने छोड़ा ही क्या है?जंगल कट रहे हैं।वाहनों का शोर ध्वनि प्रदूषण बढ़ा रहा है साथ में वायु प्रदूषण भी।ऐसे वातावरण में वन्यजीवों का रहना म…

मौसम और आधुनिकता पर भारी कुम्भ में आस्था की दो डुबकी

gsirg.com मौसम और आधुनिकता पर भारी कुम्भ में आस्था की दो डुबकी  आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।            हमारे भारत देश धर्म प्रधान देश रहा है।हमारे आदर्श,हमारी सभ्यता, हमारी नैतिकता विश्व के मानचित्र में सबसे अलग पहचान रही है।सैकड़ों सालों तक मुगलों ने हमारी संस्कृति, धर्म,आस्था पर चोट दर चोट दी पर कामयाब नहीं हुए।हमारी श्रद्धा, भक्ति, आस्था की जड़ें इतनी गहरी हैं कि मिटाना तो दूर डिगाना भी आसान नहीं है।हिन्दुस्तान हिन्दू बाहुल्य देश है।इसके बाद तीन शतक वर्ष तक लगभग अंग्रेजों ने भी जड़ें हिलाने की कोशिश की परन्तु धर्म परायण मंगल पाण्डे ने सशत्र क्रांति की शुरुआत कर पहले सेनानी होने का गौरव हासिल किया था।अंंग्रेजों ने भी अनेको प्रलोभन, दण्ड, नारकीय यातनाएं देकर लोगों को धर्म से डिगाने के प्रयत्न किए पर असफल रहे।          मौसम और आधुनिकता पर श्रद्धा और आस्था की डुबकी भारी है।मकर सक्रांति पर अकेले संगम तट पर लगभग सवा दो करोड़ लोगों ने स्नान, दान किया।कल पौष पूर्णिमा की पावन डुबकी के रूप में दूसरा पवित्र गंगास्नान,संगम स्नान, कल्पवास की शुरुआत भी कल से होगी जो एक महीने चलेगी।कल्पवासी एक महीने त…

" स्टैच्यू आफ यूनिटी " दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
कभी दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति अमेरिका के "स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी"को दर्जा प्राप्त था।अब दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति गुजरात, भारत के नाम दर्ज हो गई है।इसका नाम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी"दिया गया है।इसकी ऊंचाई182 मीटर है।इसके लिए नरेन्द्र मोदी सरकार अवश्य ही बधाई की पात्र है।जिसने भारत के नाम एक विश्व कीर्तिमान दर्ज कराया है।
समाचार पत्रों में इसके प्रचार-प्रसार के लिए 2.6 करोड़ खर्च होने का समाचार छपा था जिसे एक आर.टी.आई ऐक्टिविस्ट के जबाब में सम्बन्धित मंत्रालय ने उत्तर में बताया था।सरकार की यह फिजूलखर्ची नहीं तो क्या है?मूर्ति के आसपास मलिन और गरीब होने का समाचार भी मुद्रित था।यदि यहीं रकम उन गरीब बस्ती का कायाकल्प किया जा सकता था।इससे सरकार की कीर्ति और बढ़ती।देशवासियों के खून-पसीने से कमाई रकम जो टैक्सों के रूप में सरकारी खजाने में जमा की जाती है।यदि इसी रकम से उन आसपास के गरीब लोगों की रोटी का प्रबंध, उनके बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करके उनकी गरीबी दूर की जा सकती थी।जिससे उस रकम के उपार्जन करने वालों को तथा मोदी …

कृषक और कृषि यंत्र

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
भारत में 70% लोगों का मुख्य पेशा कृषि है।70% लोग अन्नदाता और किसान भगवान हैं।सवा अरब जनसंख्या का पेट यहीं 70% अन्नदाता भरते हैं।इसके अतिरिक्त विदेशों में अन्न निर्यात के द्वारा दुनिया के अन्य लोगों का भी पेट भरने का काम यहीं 70% किसान भगवान ही करते हैं।
किसानों का परम्परागत कृषि यंत्र देशी हल ,मिट्टी पलट हल अब केवल म्यूजियम में रखने वाले ही हैं।अब किसी किसान के पास बैल ही नहीं हैं तो हल का क्या काम?अब लगभग सभी किसानों की किसानी ट्रैक्टर पर आधारित है।जुताई से लेकर कटाई, मड़ाई तक सारा कार्य ट्रैक्टर आधारित ही है।कभी बैलगाड़ियों से बारात और मेला लोग आते जाते थे।अब यह सवारी गाड़ी केवल कृषि विज्ञान की किताबों तक ही सीमित होकर रह गई है।अब कोई किसान बनना ही नहीं चाहता।कभी यह कहावत मशहूर थी---"उत्तम खेती मध्यम बान।निकृष्ट चाकरी भीख निदान।।"अब चाकरी अर्थात सरकारी नौकरी प्रथम पसंद बनी हुई है।बैलगाड़ी, देशी हल,मिट्टी पलट हल केवल कृषि विज्ञान की किताबों तक ही सीमित होकर रह गए हैं।कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र भी किसानी से मुँह मोड़ चुके हैं।कोई किसानी क…

दिव्य कुम्भ 2019

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
दिव्य कुम्भ,भव्य कुम्भ, शस्य कुम्भ 2019 का शुभारम्भ 14 जनवरी 2019 से प्रयागराज में हो गया है।कुम्भ का शाब्दिक अर्थ घड़ा होता है। इस बार के कुम्भ में लगभग 15 करोड़ लोगों के प्रयागराज आने की उम्मीद है।ऐसा भव्य और दिव्य कुम्भ में एक साथ इतने लोगों का संगम विश्व के किसी खित्ते में नहीं होता है।यहां लोग आस्था और श्रद्धा की डुबकी लगाने संगम तट प्रयागराज में आते हैं।मुख्यमंत्री उ०प्र० सरकार श्री आदित्यनाथ योगी नें कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी है।18 थानों का अस्थायी निर्माण किया गया है।जिसमेँ महिला और पुरुष थानों की अलग-अलग व्यवस्था है।फायर स्टेशन की भी व्यवस्था की गई है।मेला क्षेत्र में साफ-सफाई की भी खासे इन्तजाम किये गए हैं।1 लाख 22 हजार सुलभ शौचालय का निर्माण किया गया है। खोया-पाया की भी विशाल एल.ई.डी.स्क्रीन की भी व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था ध्यान में रखते हुए 100 बेड का हास्पिटल भी मेला क्षेत्र में कार्य रत है।इसके अलावा भी अन्य अस्पताल भी सेवारत हैं।इसके लिए यू.पी.सरकार पूरी तरह कृत संकल्प है। प्रवासी भारतीयों के लिए टेण्ट सिटी की भव्य व…

आन्दोलनों के दौरान हिंसा और राष्ट्रीय सम्पति की क्षति

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।यदि भारत में आन्दोलनों का जनक श्री मोहनदास करमचंद गांधी को कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।आपनें नमक,सत्याग्रह, अंग्रेजों भारत छोड़ों आदि सफलतापूर्वक आन्दोलनों को छेंड़ा।और प्रसिद्धि पाई।प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन नें कहा था।"कोई हांड़-मांस का पुतला धरती पर चलता-फिरता भी था"।वह अवश्य ही गांधी था।इसमें कोई आश्चर्य नहीं।गांधी में अभूतपूर्व नेतृत्व क्षमता थी।इसके अलावा सुंदरलाल बहुगुणा का चिपको आंदोलन, विनोबा भावे का भूदान आन्दोलन भी भारत के आन्दोलनों में प्रमुख थे।तब के समय में आन्दोलन अहिंसात्मक और बिना राष्ट्रीय/राजकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले ही हुआ करते थे।कालांतर में आजादी के बाद आन्दोलनों की राह हिंसात्मक और राष्ट्रीय/राजकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाए बिना कोई आन्दोलन होता ही नहीं है।आन्दोलनों की दशा और दिशा बदल सी गई है।सरकारी सम्पत्ति को कोई अपनी सम्पत्ति समझता ही नहीं है।शत्रु सम्पत्ति की तरह लोगों/आन्दोलनकारियों का व्यवहार होता है।इस तरह के आन्दोलनों को आन्दोलन कहा ही नहीं जा सकता है।गांधीजी नें जो आन्दोलनों की राह भारत ही नहीं डर…

ड़ाक्टर और मरीज

दोस्तों मै आपको एक दिलचस्प  कहानी सुनाता हूँ।
     एक व्यक्ति को अपने दिल के इलाज के लिए नोएडा के एक फाइवस्टार हॉस्पिटल में जाना पड़ा। अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने पेशेंट को तुरंत बायपास सर्जरी करवाने की सलाह दी ।
      पेशेंट बहुत नर्वस और परेशान हो गया, किंतु वह तुरंत ही सर्जरी की तैयारी में लग गया ।परन्तु...    ऐसे मुश्किल हालात मे भी उसने अपना धैर्य नही खोया, उसने थोडा संयम रखकर सैकेंड ओपीनियन लेना ज्यादा ठीक समझा ।     उसने ऑपरेशन के पहले वाले सारे टेस्ट करवाने के बाद डाक्टरों से आपरेशन मे होने वाले खर्च के बारे मे पूँछा तो डॉक्टरों की टीम ने बजट बताया....18 लाख।
इतनी बड़ी धनराशि, पेशेंट और उसके परिवार वालों को बहुत ही ज्यादा लगी।
लेकिन....
"जान है तो जहान है"....
यह सोचकर वह फॉर्म भरने लगा...
      फार्म भरते भरते एक जगह व्यवसाय का कॉलम आया।मरीज पहले से ही परेशान था,उपर से खर्चे और
आपरेशन की टेंशन थी ।इसी उधेड़बुन में न जाने क्या सोचते सोचते या पता नहीं किस जल्दबाजी में उसने उस काॅलम के आगे "C.B.I." लिख गया।फिर तो जैसे एक चमत्कार हो गया।
         अचानक हॉस्पिट…