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Showing posts from November, 2018

सारी दुनिया मे प्रतिबन्व , भारत मे अनुबन्ध

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।सारी दुनिया के मालवाहक और जंगी बेंड़ों को तोड़ने,रासायनिक कचरे के निपटान के लिए सबसे मुफीद जगह भारत के तट ही पाये जाते हैं।पूरी दुनिया के खतरनाक रसायन से लैस कचरों के निपटान के लिए भारत से बेहतर कम खर्चीली प्रणाली शायद ही विश्व में इससे सस्ती जगह कहीं हो ही नहीं सकती।इसके अलावा पूरी दुनिया में प्रतिबंधित निमोस्यूलाइड दवा तथा विक्स एक्शन 500 जो केवल बिक्री हेतु भारतीय बाजारों में आसानी से पूरी पैठ बनाने में सफल है गई है।यहां इसकी बिक्री का लाइसेंस जारी कर दिया है।इससे भी खतरनाक मेलामाइन रसायन जो टाइल्स और फर्श मेटेरियल बनाने में काम आती है।इस खतरनाक रसायन को भारत में हार्लिक्स, कम्पलान और दूध में न्यून मात्रा में मिलाने का लाइसेंस भी जारी करवाने में सफल हो चुकी है।जबकि चीन में दूध स्कैंडल में यह खतरनाक रसायन प्रतिबंधित हो चुका है।बच्चों के दूध में मिलानें के कारण ही यह खतरनाक रसायन बच्चों के लिए जहर परोसा जा रहा है।जिससे आने वाली गरीब पीढ़ी इस खतरनाक रसायन से प्रभावित हो रही है।पूरी दुनिया में लाइफबाय साबुन को केवल कुत्तों को नहलाने में प्रयोग किया जाता है।क…

रामलला तिरपालों मे

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।दुनिया के सबसे बड़े जज राजा "श्री राम चन्द्र"जी महाराज दशरथ नन्दन, अयोध्या नरेश"रघुराई"आजकल अखबारों की सुर्खियां बनें हुए हैं।जब-जब लोकसभा चुनाव अथवा यू.पी.के विधानसभा चुनाव नजदीक आने होते हैं तो रामलला के चर्चे अचानक तेज हो जाया करते हैं।सभी पार्टियों के नेताओं को रामलला की याद सताने लगती है।नेताओं को रामलला अचानक याद आने लगते हैं।दुनिया की सबसे बड़ी अदालत के जज श्री राम जी आज भारत के सर्वोच्च न्यायालय के जेरे समात हैं।जो आजकल इनके केस की सुनवाई कर रहे हैं उनको भी मरणोपरांत श्री राम की अदालत में ही अपने केस की सुनवाई हेतु जाना ही है।वहां जज भी श्री राम ही हैं वकील भी श्री राम ही हैं और वहां कोई भी अपील नहीं होती है।हिन्दुस्तान में हिन्दू बहुसंख्यक होते हुए इनके आराध्य देव श्री राम को ही अदालत की सुनवाई हेतु प्रस्तुत होना पड़ा है।---"राम झरोखे बैठि कै सबका मुजरा लेंय।जिसकी जैसी चाकरी उसको उतना देंय।।"राजा श्री राम चन्द्र जी महराज"को अपनी राज्य अयोध्या में ही पिछले 25-26 सालों से तिरपालों में रहने को विवश होना पड़ रहा है।यह …

जनसंख्या विस्फोट

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।जब देश आजाद हुआ तो भारत वर्ष की जनसंख्या लगभग 38 करोड़ थी। आज पाकिस्तान और बंग्लादेश को छोंड़कर अकेले भारत की आबादी लगभग 1 करोड़ 30 लाख के साथ विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है।लोगों के अंधाधुंध परिवार बढ़ाने के कारण जनसंख्या घनत्व लगातार बढ़ता ही जा रहा है।जमीन लगातार कृषि योग्य भूमि का रकबा घटता - सिमटता ही जा रहा है।शहरों में जनसंख्या घनत्व तेजी से बढ़ता जा रहा है। हम दो हमारे दो का असर एक खास वर्ग पर तो पड़ता अवश्य दिखाई पड़ रहा है।लोग तेजी से परिवार नियोजन योजना पर अमल करते भी दिख रहे हैं।परन्तु दूसरे धड़े में हम पाँच और हमारे पच्चीस का फार्मूला ही काम करता दिखाई दे रहा है।इसी खास धड़े की जनसंख्या दर में तेजी से विस्फोटक स्थिति दर्ज हो रही है।धार्मिक कारण का ही हवाला देकर तेजी से जनसंख्या वृद्धि का कारक बना हुआ है।पाकिस्तान में हिन्दू आबादी आजादी के समय लगभग 22% थी जो वर्तमान में लगभग 2% ही बची है।वहीं भारत में मुस्लिम आबादी लगभग 3 गुना तक बढ़ी है।यह धड़ा देश हित में कम सोंचता है।इसमें धार्मिक कट्टरता कूट-कूट कर भरी होती है।जनसंख्या की स्थिति यदि इसी तरह बढ़ती रह…

[14 ] उपासना

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[14 ] उपासना

हमारी यह पृथ्वी , जिस पर हम निवास करते हैं , आज से लगभग अरबो वर्ष पूर्व निर्मित हुई थी | इस काल को हम '' अनादिकाल ' कह सकते हैं | इसके बाद ही '' आदिकाल '' का नंबर आता है | हमारे देश के लोगों का प्राचीन धर्म '' वैदिक धर्म '' रहा है | आदि काल से लेकर अब तक इस वैदिक धर्म मे अनेकों विद्वान , ऋषि मुनि और मनीषी हुए हैं , जिन्होंने संसार का कल्याण करते हुए , अपना सारा जीवन व्यतीत किया है , परंतु उनका अपना जीवन कैसा रहा है , यह जानने के लिए हमें काफी पीछे समय का अवलोकन करना होगा | वैदिक ऋषि परोपकारी कार्यों मे लिप्त होने से पूर्व , अपने जीवन का परिष्कार करते थे | इसके लिए वह अनेकों प्रकार के धार्मिक कार्यों का अनुष्ठान किया करते थे | इन धार्मिक कार्यों और अनुष्ठानों को संपन्न करके वह लोग जब संपूर्णता को प्राप्त कर लेते थे | जीवन की संपूर्णता प्राप्त करने के लिए वह जीवन में अनेकों प्रकार के कार्य किया करते थे | इन धार्मिक कार्यों में , ' उपासना क्या है ' प्रत्येक साधक व्यक्ति को , यह जानना अति आवश्यक है |

उ…

नारी शिक्षा पर बल

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।आज की नारी सभी क्षेत्रों में पुरुषों से आगे निकलने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है।आज नारी पुरुषों से कन्धा से कन्धा मिलाकर कदमताल कर रही है।नारी हवाई जहाज, लड़ाकू विमानों, रेलगाड़ी, मिलिट्री फोर्स आदि मैदानों में सफलतापूर्वक हर सर्विस कर रही है।पुरुषों से किसी भी मामले में पीछे नहीं है।आजादी की लड़ाई में भी नारी शक्ति नें अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।रानी लक्ष्मीबाई, दुर्गा भाभीजी, झलकारी बाई, रानी दुर्गा वती आदि रूपों में अपनी नारी शक्ति का लोहा मनवाया है।अगर यह कहा जाय कि पुरुषों से आगे थी तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।डाक्टर, इन्जीनियर, सिविल सर्विसेज में भी अपनी नारी शक्ति की अमिट छाप छोड़ रही है।अब वह घूंघट, परदे से बाहर निकल कर सफलता के झंडे गाड़ रही है।"नारी निन्दा ना करो,नारी नर की खान।नारी से सुत होत हैं,ध्रुव, प्रहलाद समान।"अब भी सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी नारी शक्ति का एक बड़ा हिस्सा प्राथमिक शिक्षा से भी वंचित है।सरकार के"बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ"योजना लागू होनें के बावजूद नारी शक्ति को शिक्षा अथवा उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।प…

प्रतिक्रिया

दि०20-11-2018 के सम्मानित दैनिक जागरण लखनऊ के सम्पादकीय पृष्ठ पर श्री भूपेन्द्र यादव जी का "राजग के मुकाबले हांफता महागठबंधन"शीर्षक पढ़ा।यादव जी के विचारों से मैं पूर्णतया सहमत हूँ।इसमें कोई दो राय नहीं है।भाजपा निरंतर योजना बद्ध तरीके से जनाधार बढ़ाने में लगी रही आज वह मजबूत स्थिति में है।जबकि महागठबंधन में असमंजस की स्थिति में है।उनका साझा नेता भी अभी तक तय नहीं है।कि किसके नेतृत्व में  लोकसभा चुनाव 2019 लड़ा जायेगा।लेकिन भाजपा अति आत्म मुग्धता से बचना होगा।बहुत संभल कर बयानबाजी करनी होगी।जनता के पास विकल्प का अभाव है।कोई अन्य क्षेत्रीय दल सरकार बनाने के जादुई आंकड़े के आस-पास भी नहीं फटक रहा है।यहीं कारण है कि भाजपा पहली पसंद बनी हुई है।राष्ट्र वादी सोंच ,विदेशों में भारत की बढ़ती ताकत और सबसे बड़ा जनता का विश्वास ही भाजपा को अन्य पार्टियों से अलग पहचान दिलाने में सफल हुई है।प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

आजादी की अमर नेत्री नीरा नागिन ....विनोद पटेल

आजादी की इस अमर नेत्री को अंग्रेजी शासक ने इतनी यातनाएं दी गईं कि जानकारी होने पर आपका कलेजा मुँह को आजायेगा और नेहरू ही नही नेहरु परिवार कहता है कि चरखा से आजादी मिली?
         नीरा आर्य की कहानी। जेल में जब मेरे स्तन काटे गए ! स्वाधीनता संग्राम की मार्मिक गाथा। एक बार अवश्य पढ़े, नीरा आर्य (१९०२ - १९९८) की संघर्ष पूर्ण जीवनी ।
        नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में भारतीय  सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था | नीरा के मन मे देश की आजादी के प्रति उत्कट भावना थी । नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए इन्होंने अंग्रेजी सेना में तैनात अपने ही अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी |      नीरा ने अपनी एक आत्मकथा भी लिखी है | इस आत्म कथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है -👇🏼      5 मार्च 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी सेठ छज्जूमल के घर जन्मी नीरा आर्य आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सक्रिय सिपाही थीं, जिन पर अंग्रेजी सरकार ने , इनपर भी गुप्तचर होने का झूठा आरोप लगाया था।       बीरबाला नीरा ​को "…

रक्त पिआसु और भृष्टाचारी

GSirg.com रक्त पिआसु और भृष्टाचारी आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। पुराने जमाने में हमारी ईमानदारी, सत्यता,सदाचार के चर्चे देश,विदेशों में हुआ करते थे।लोगों में ईमानदारी, सत्यता गुरुकुलों, आश्रमों में कूट-कूट कर भरे जाते थे।चीनी यात्रियों ह्वेनसांग, फाह्यान नें अपनी-अपनी पुस्तकों में उल्लेख किया है कि यदि आपकी कोई वस्तु खो जाती थी तो वर्षों बाद भी उसी जगह पड़ी मिलती थी।कोई उस वस्तु को उठाया नहीं करता था।ईमानदारी के ऐसे उदाहरण मिला करते थे।यहां लालच,बेईमानी के लिए कोई स्थान नहीं था।सदाचार और धार्मिक शिक्षा,शास्त्रों, शस्त्रों की शिक्षा गुरुकुलों, आश्रमों में ऋषियों, मुनियों, विद्वानों द्वारा कूट-2कर भरी जाती थी।गरीब-अमीर की शिक्षा में कोई भेदभाव नहीं था।गुरू संदीपनि मुनि के आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण और गरीब सुदामा के एक साथ शिक्षा ग्रहण करने का बहुत ही सुंदर उदाहरण मिलता है।द्रुपद नरेश और गुरू द्रोणाचार्य की शिक्षा भी एकसाथ और एक ही आश्रम में होने का उदाहरण मिलता है।हमारे सदाचार और ईमानदारी की कसमें खाई जाती थी। जब से भृष्टाचार रूपी राक्षस का जन्म हुआ तबसे हम धीरे-धीरे अनैतिक होते चले ग…

कुण्ठित प्रतिभा / प्रतिभा पलायन

भारत भूमि हमेशा से ही प्रतिभा सम्पन्न  लोगों की भूमि रही है।यहां प्रतिभाएं गली,कूचों,मुहल्लों में थोक के भाव भरी पड़ी हैं।जरूरत उन्हें तराश कर कोहिनूर हीरा बनाने की है।यह जरूरी नहीं है कि केवल शहरों में ही प्रतिभा सम्पन्न बच्चे मिलेंगे।गांव देहातों में भी शहरों की भांति विलक्षण प्रतिभा धनी बच्चे पाए जाते हैं।जरूरत एक पारखी नजर की है जो प्रतिभा ढ़ूंढ़ सके।   हमारे देश में जब से भृष्टाचार नें जन्म लिया है , तब से प्रतिभाएं कुण्ठित ज्यादा हो रही हैं।लगभग हर बार प्रतियोगी परीक्षाओं के समय पर्चा आउट होना एक आम बात होती जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सादी कापी जमा करना भी एक ट्रेण्ड बनता जा रहा है।सादी कापी वह अभ्यर्थी ही  जमा करता है जिसकी सेटिंग- गेटिंग पहले से ही हो जाती है। ऐसे प्रकरणों में 5-6 लाख रुपयों में में पहले से ही सौदा पक्का हो जाया करता है। सौदे के आधे पैसे एडवांस जमा हो जाया करते हैं, बाकी पोस्टिंग लेटर मिलनें के बाद। जहां ऐसी सेटिंग-गेटिंग पहले ही हो जाती हो वहां प्रतिभा आखिर क्या मायने रखती है।रिजल्ट घोषित होनें पर हम पाते हैं उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में रिश्वत देनें वाले ह…

[ M १४ ] हृदय रोग और पागलपन : कारण और उपचार [ भाग दो ]

web - gsirg.com [ M ]हृदय रोग और पागलपन : कारण और उपचार [ भाग दो  ]
इलाज का तीसरा चरण
पीपल के पेड़ से तो आप परिचित ही होंगे , क्योंकि यह पेंड़ लगभग हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जाता है | इस पेड़ के पर्याप्त मात्रा में पत्ते लाकर , शाम को पानी में भिगो दें | सुबह होने पर '' भपके '' के जरिए इन पत्तों का अर्कनिकाल लीजिए | इस अर्कको सुरक्षित बोतलों में भरकर रख लीजिए | इसकी भी लगभग 50 ग्राम मात्रा नाश्ते के 1 घंटे बाद सेवन किया करें इस औषधि सेवन के 50 मिनट पश्चात तक कुछ न खाएं | यहअर्क दिन मेंतीन बार लिया करें | अर्क सेवन के 50 मिनट पहले तथा एक घंटा बाद कुछ भी न खाएंऔर न ही पिए |
सावधानी
रोगीको चाहिए कि वह अपने पास एलोपैथिक औषधि '' सोर्बिट्रेट 5 mg '' कि गोलियाँअपने पास अवश्य रखें | कभी-कभी ऐसा होता है कि चिकित्सीय परीक्षण में भी रोग की सही तीव्रता का पता नहीं लग पाता है | इसलिए हो सकता कि आपको अचानक हृदय रोग की पीड़ा होने लगे | ऐसे मे यह गोलियां आपके उपचार मे काम आएंगी | ह्रदय रोग का आभास होने पर इसकी एक गोली जीभ के नीचे रख लेने से , हृदय रोग की पीड़ा से आप का बचाव…