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About Me

My Name is Subhash Chandra Verma (Subhash Sir) , I Live in Sehgon (w) Raebareli ,UP  I am a Preacher/Teacher
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पुराने बीजो का संरक्षण

नये खाद्यान्न बीजों या शंकर बीजों के आगमन के साथ खाद्यान्नों का उत्पादन अवश्य बढ़ा है।जिसके लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक अवश्य ही बधाई के हकदार हैं।आज हम सवा अरब से अधिक लोगों को भरपेट भोजन देनें के अलावा निर्यात भी कर रहे हैं।जिस कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्राप्त हो रहा है।लेकिन भारतीय किसानों द्वारा अन्धाधुंध यूरिया और अन्य उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग के कारण कुछ देशों का बासमती चावल के आर्डर वापस लेना पड़ा है।जिसके कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।जो अवश्य ही चिन्ता का विषय है।कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मृदा जांच द्वारा किसानों को प्रशिक्षित कर आवश्यक रसायनों के प्रयोगों के लिए किसानों को प्रशिक्षित किए जानें की आवश्यकता है।     हमारे पुराने जमाने के किसानों द्वारा पुराने बीजों एवं गोबर की खाद तथा खली से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में जो गजब का स्वाद एवं सुगंध मिलती थी वह अब नये बीजों एवं उर्वरकों एवं कीटनाशकों से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में नहीं पाई जाती है।वह स्वाद,सोंधापन, सुगंध अब धीरे-धीरे गायब होती …

खर्चीली शादियाँ , एक से बढ़कर एक

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।इस समय सहालग जोरों पर है।लोग सज-धज कर हालते-कांपते बाराती बनकर अपने-अपनों की बारात आते-जाते देखे जा सकते हैं।औरतों,लड़कियों को फैशन के दौर में ज्यादा ठिठुरते देखा जा सकता है।खर्चीली शादियों का दौर थमता नहीं दिख रहा है।एक से बढ़कर एक खर्चीली शादियाँ देखी जा सकती हैं।मंहगाई के युग में सबसे ज्यादा परेशानी गरीब वर्ग को होती है।बड़े लोगों की देखा-देखी गरीब वर्ग भी अपनी लाडली की बिदाई में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता ।कर्ज लेकर,खुद को मिटाकर बड़े लोगों की तरह हर इन्तजाम करता है।और सारे अरमान पूरे करता है।इस तरह दहेज दानव की गिरफ्त में आ जाता है।फिर शुरू होता है कभी न खत्भ होने वाला मांगों का सिलसिला।जब तक गरीब आदमी का वश चलता है मांग पूरी करता रहता है।अक्षम,असहाय होनें पर उसकी लाडली को मृत्यु वरण करना ही पड़ता है।चाहे जहर देकर या फांसी लगाकर चाहे जलाकर।फिर डी.पी.एक्ट और अदालतों का चक्कर।एक दिन ऐसा भी आता है जब कुछ रूपये ले-दे कर लाडली की लाश का सौदा तय हो जाता है।और लक्ष्मी देवी की चमक तले सब कुछ दफध हो जाता है।सात खून माफ हो जाते हैं और सुलहनामा लगा दिया जाता है।औ…

कलंकित दोस्ती

gsirg.com आदरणीय सम्पादक जी                                सादर प्रणाम
अपने भारत देश में दोस्ती के सिर कटा देने वाले दोस्तों की मिशालें भरी पड़ी हैं।शोले फिल्म की जय-बीरू की जोड़ी ऐसी दोस्ती की मिशाल पेश की गई है।आल्हा खण्ड में लाखन कुँवर कनौजी राय और ऊदल की दोस्ती का प्रमाण प्रमुखता से लिखा गया है।लाखन और ऊदल नें गंगा में दोस्ती निभाने की शपथ ली थी और निभाई भी।कर्ण और दुर्योधन की दोस्ती कलयुग में कृष्ण और अर्जुन की दोस्ती त्रेता युग में राम और सुग्रीव की मित्रता सतयुग में अग्नि देव और इन्द्र देव की मित्रता के प्रमाण मिलते हैं।मित्रता खून के रिश्ते से बड़ी होती है क्योंकि यह दिल के रिश्ते से जुड़ी होती है।
आजकल मित्रता के पैमाने और मापदण्ड ही बदल गए हैं।अब लोग मित्रता लालच और स्वार्थ के कारण करते हैं।अब "यार ने ही लूट लिया घर यार का।"की तर्ज पर दोस्ती करते हैं।दोस्त की पत्नी पर ही बुरी नजर रखते हैं।दोस्ती में कत्ल के समाचार कामुक दोस्ती कलंकित दोस्ती बन कर रह जाती है।ऐसी गलत दोस्ती की घटनाएं ही कत्ल अथवा जरायम की दुनिया की जन्मदात्री होती है।अब आजकल की दोस्ती की दास्तानें समाचार…