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डाक्टरों का रोग अनुसंधान और रोग निदान

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आदरणीय सम्पादक जी                          सादर प्रणाम       राजा महाराजाओं के जमाने में हर राज़ परिवार के इलाज के लिए राज वैद्यों की नियुक्ति होती थी।यह राज वैद्य राज्य के सबसे योग्य वैद्य हूआ करते थे। रामायण काल में सुषेण वैद्य लंका के राजा रावण के राज वैद्य थे। लेकिन अपने वैद्य धर्म के साथ न्याय करते हुए रावण के दुश्मन श्री राम के अनुज लक्ष्मण जी के इलाज के इलाज के लिए संजीवनी बूटी का अनुसंधान के साथ प्राप्ति स्थान का पता भी बताया था।और सूर्योदय के पूर्व ही बूटी लाने का आदेश दिया था।           धन्य थे वे वैद्य ।जो दुश्मन के इलाज में भी कोताही नहीं बरतते थे।राम चरित मानस में बाबा तुलसीदास जी ने उल्लेख किया है---"सचिव,वैद्य,गुरु तीनि जो प्रिय बोलैं भय इस। राज्य,धर्म,तनु तीनि का होय बेगिहिंवु नाश।।"कहते हैं किसी वैद्य जी को पर्दे की बात कहकर केवल रोगी को बांधकर केवल रस्सी दिखाई गई और वैद्यराज नें रस्सी देखकर ही बता दिया कि इसे भूसे की आवश्यकता है।क्योंकि वह रस्सी किसी भैंस के गले में बंधी हुई थी।ऐसा था हमारे पुराने जमाने के वैद्यों का ज्ञान।
         पुराने ज…
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कीमती सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे

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आदरणीय सम्पादक जी                             सादर प्रणाम         सरकार के पास सरकारी भूमि के रूप में अकूत संपत्ति है। सरकार की उदासीनता के चलते सेटिंग, गेटिंग के द्वारा भू-माफियाओं द्वारा कीमती सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे जमा लिए जितने हैं।          लेखपाल और ग्राम प्रधान के 115(C) का मुकदमा दर्ज करने का अधिकार है परन्तु भू-माफियाओं का पक्ष प्रबल होता है। जिसके कारण लेखपाल और ग्राम प्रधान दोनों दुश्मनी मोल लेने से डरते हैं। एकमात्र इसी कारण से भू-माफियाओं की पौ बारह है।            सरकार यदि दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाएं तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि भूमाफियाओं को पस्त करके अधिक राजस्व की वृद्धि की जा सकती है।अथवा 24 घंटे शुद्ध 100%आक्सीजन देने वाले तथा औषधीय गुणों से भरपूर  पीपल,बरगद तथा 75%आक्सीजन देने वाले नीम के वृक्षों का वृक्षारोपण करके बीमार धरती माता तथा पर्यावरण की दशा,दिसा ठीक की जा सकती है।          उ0प्र0के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री आदित्य नाथ "योगी "पीठाधीश्वर गोरक्षपीठ ने पदभार ग्रहण करते ही सरकारी भूमि चरागाह खाली कराने का आदेश जारी किया था तो लोगों खासकर…

यू० पी० सरकार द्वारा रिकॉर्ड वृक्षारोपण कार्यक्रम

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आदरणीय सम्पादक जी                               सादर प्रणाम        पर्यावरण से छेड़छाड़ मानव को भारी पड़ रही है।हम लगातार प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते चले आ रहे हैं।हमको भगवान ने दिल खोलकर वन सम्पदा दी थी।प्रकृति ने अपना खजाना दोनों हाथों से लुटाया था।हम नादानी और लालच वश वन सम्पदा नष्ट करते रहे।नौबत इस बात की आ गई कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की आब-ओ-हवा मार्क क्षमता तक जहरीली हो गई है। हमारे क ई शहरों में सांस लेने की समस्या पैदा हो चुकी है।          यू.पी.सरकार ने नदियों तथा सड़कों के किनारे औषधीय पौधों की अनेकों प्रजातियों के दस-दस पौधों को रिकॉर्ड स्तर पर लगाने का स्वागत योग्य निर्णय लिया है। जिसके लिए यू.पी.सरकार की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।सवाल केवल पौधों को लगाने का नहीं बल्कि उन लगाए पौधों को पानी तथा रख-रखाव के द्वारा पालन-पोषण करने का है।           यदि यह योजना धरातल पर ठोस रूप से उतरती है तो निश्चित ही यह प्रर्यावरण संरक्षण की दिशा में बहुत उपयोगी कदम होगा। औषधीय पौधों से राजकोष और पर्यावरण दोनों में सुधार होगा।जनता की रुचि आयुर्वेद और योग में लगातार…

विश्व योग विवश 2020

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आदरणीय सम्पादक जी                               सादर प्रणामभारत में अति प्राचीन काल से ही अखाड़ा,मल्लशाला,दण्ड-बैठक, व्यायाम,कसरत आदि का प्रचलन रहा है।यदि हम भारत को योग,जप,तप, अध्यात्म, ज्ञान-ध्यान का केन्द्र कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। हमारे ज्ञानी,ध्यानी,मनीषी पूर्वजों ने शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए उचित खान-पान, आहार-विहार व्यायाम के बहुत सारे नियम-उपनियम बताए हैं।जिन पर चलकर हम निश्चित ही शतायु हो सकते हैं।                  रामराज्य के समय में कवि तुलसीदास जी ने राम चरित मानस में कहा है--"अल्प मृत्यु नहिं कवनिहुं पीड़ा"। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रयास स्वरूप 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है। हमारे ज्ञान-ध्यान योग को विश्व लेबल पर एक नई पहचान मिली है।जिसका श्रेय निश्चित ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को ही जाता है।         21जून 2020 में छठा विश्व योग दिवस मनाया जाएगा। संयोगवश इसी दिन सूर्य ग्रहण,तथा फादर डे भी इसी दिन पड़ रहा है।
          अतः इस बार योग दिवस का आयोजन कुछ विशेष हो जाएगा। कोरोनावायरस के कारण …

मेष बदलकर कालाबाजारी रोकना

आदरणीय सम्पादक जी                                  सादर प्रणाम          पुराने जमाने में राजा-महाराजा अपने गुप्तचरों को भेष बदलकर राज्य के सुख-दुख के समाचार प्राप्त कर समस्याओं के निवारण का कार्य किया करते थे।राजा विक्रमादित्य जी महराज तो स्वयं ही भेष बदलकर राज्य में घूमा करते थे।और प्रजा के दुखों को दूर किया करते थे। उनके राज्य में इसी कारण कदाचार, अनाचार,व्यभिचार का कोई स्थान नहीं था।            लोगों में भय व्याप्त था। महाराज ने जाने किस भेष में प्रकट हों जाय।कोरोना वायरस के कारण लाकडाऊन में कालाबाजारी को रोकने के लिए बनारस के डी.एम.और एस.पी.नें भेष बदलकर कालाबाजारी को पकड़ा और दण्डित किया।          यह एक बहुत ही सराहनीय कदम कहा जा सकता है।इसके इन डी.एम.साहब तथा एस.पी.साहब की जितनी  भी प्रशंसा की जाय कम है।डी.एम.साहब एस.पी.साहब बनारस अवश्य ही साधुवाद के पात्र हैं। 
          यदि इसी तरह सभी जिलों के डीएम और एसपी तथा अन्य आला अधिकारी भेष बदलकर इसी तरह कालाबाजारी तथा अन्य कदाचार रोकने की कोशिश करें तो शायद कालाबाजारियों में भय व्याप्त हो जाय।सुशासन कायम किया जा सकता है।जनता ऐसे अधिकारियो…

लाकडाउन ही कोरोना प्रसार को रोकने का सशक्त माध्यम

आदरणीय सम्पादक जी                                सादर प्रणाम          कोरोना इस समय विश्व व्यापी महामारी बनकर विश्व पटल पर छा गई है।सारी दुनिया के शेयर मार्केट धड़ाम हो गये हैं।पूरी दुनिया की 1/6आबादी घरों में कैद है। चीन से उद्गमित यह कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।           भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की पूरी दुनिया में भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। मोदीजी ने शुरू में ही जनता कर्फ्यू तथा लाकडाऊन का निर्णय लेकर सामुदायिक कोरोना प्रसार को रोकने में अवश्य ही सफलता प्राप्त की है।           राष्ट्र के सम्बोधन तथा मन की बात के माध्यम से भारत की जनता को कोरोना वायरस के भयानक महामारी को जनता को समझाने में कामयाब साबित हुए हैं। भारत जैसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले देश में लाशों के ढ़ेर लग जाना अवस्यम्भावी था। लेकिन मोदी जी की दूरदर्शिता और कठोर निर्णय के कारण ही भारत में कोरोना अपने पैर पसारने में अधिक सफल नहीं हो सका है।           जनता से बार-बार मोदी जी की अपील सार्थक साबित हुई है। कुछ लोग अवश्य लाकडाऊन की चेन तोड़ देते हैं।जो चिंता का सबब है।जनता से निवेद…

कोढ़ में खाज

आदरणीय सम्पादक जी                                 सादर प्रणाम         भारत एक विशाल देश है।इसकी कुल आबादी लगभग एक अरब तीस करोड़ के आस-पास है। भारतीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अद्भुत और बहुत ही मजबूत है। वर्तमान समय में कोरोना वायरस के संक्रमण विश्व के लगभग 188 देश सामना कर रहे हैं।            हमारे भारत देश में भी इस वायरस नें हमला कर रखा है। अन्य देशों के मुकाबले भारत में जनसंख्या घनत्व अधिक है।हम विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश के रूप में स्थापित हैं।           इस वायरस का प्रकोप अपेक्षाकृत धीमा ही कहा जा सकता है।इसका सारा श्रेय हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी तथा स्वास्थ्य मंत्री श्री हर्षवर्धन जी तथा स्वास्थ्य मंत्रालय को जाता है। हमारी सरकार ने पहली मीटिंग 8 जनवरी को ही कर ली थी।और जनता कर्फ्यू तथा लाकडाऊन का निर्णय बहुत पहले कर लिया था। जिसके कारण कोरोना वायरस का प्रकोप अवश्य ही धीमा है। आजतक लगभग 2300 के आसपास ही संक्रमित मरीजों की संख्या है।कुल मौतें 56 के ही आसपास हैं। जबकि पूरे विश्व में संक्रमित मरीजों की संख्या लगभग 10 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसके लिए भ…