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Bizarre words of spoiled leadership \ बिगड़ैल नेताओँ के बेतुके बोल

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आदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम
         भारतीय राजनीति में बेतुके बोल वाले नेताओं की अच्छी खासी फौज है।यथा---कांग्रेस--दिग्विजय सिंह, शशि थरूर, भाजपा--गिरिराज सिंह, साध्वी ऋतंभरा, साध्वी उमा भारती, आदित्यनाथ योगी सपा--आजम खां बसपा --सुप्रीमो मायावती।
        इन सभी राजनेताओं में आजम खां और शशि थरूर जी और योगी आदित्यनाथ आदि अक्सर बेतुके बोलों के लिए प्रसिद्ध हैं।आजम खां ने भारत माता को ही डायन कह डाला था।अगर इन्हें राष्ट्र द्रोही कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।सिने तारिका जयाप्रदा के खिलाफ अशोभनीय, अमर्यादित टिप्पणी करके महिला शक्ति को अपमानित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है।
शशि थरूर जी नें भी भारत और भारतीयता पर करारे प्रहार किए हैं।भारतीय रेल को कैटिल दर्जा तक कह डाला है।सुनन्दा पुष्कर से शादी रचाने से लेकर हत्या तक परोक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से साजिश में शामिल रहे हैं।लेकिन इन भाग्य विधाता राजनेताओं के कानून और संविधान सब बौने होकर रह जाते हैं।
      ऐसी स्थिति मे केवल सुप्रीम कोर्ट ही कुछ एक्शन लेकर इन्हें कानून के कटघरे में खड़ा …
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सुप्रीमकोर्ट का दखल

आदरणीय सम्पादक जी
                          सादर प्रणाम         भारत निर्वाचन आयोग के आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा नें यदि समय रहते बड़बोले नेताओं पर अंकुश लगाया होता तो सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना पड़ता।सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद भारत निर्वाचन आयोग के आयुक्त ने आदित्यनाथ योगी,आजमखाँ दोनों एक राशि वाले नामों वाले नेताओं पर 72 घंटे तथा मायावती, मेनका गांधी एक राशि वाली महिला नेत्रियों पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया है।
        चुनावों के समय सबसे पावरफुल संस्था भारत निर्वाचन आयोग अपने अधिकारों का निर्वहन किया होता तो सुप्रीम कोर्ट का अपना दखल नहीं देना पड़ता।श्री टी.एन.शेषन ने अपने अधिकारों का जमकर प्रयोग किया था।तबसे ही लोगों ने भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारों और शक्ति को जाना और पहचाना है।
       भारत के सबसे बड़े राजनीतिक घराने,और राष्ट्रीय नेताओं के खिलाफ ऐक्शन लेने का साहस ही कहाँ था? हनुमानजी की तरह "का चुप साधि रहे बलवाना।"जब शक्ति की याद दिलाई जाती है।तभी शक्ति का भान,गुमान होता है।
       इसी तरह जब सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग को उनकी असीमित शक्ति की याद दिलाई तो भ…

घटता श्रृम,बढ़ते रोग

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम         आराम और विलासिता रोगों के भण्डार का निमंत्रण है।जैसे-जैसे हम आराम और विलासिता की ओर बढ़ते जा रहे हैं विभिन्न प्रकार के रोगों के भण्डार की ओर भी बढ़ते जा रहे हैं।कभी हमारे यहाँ मशीनरी और कल कारखानों का अभाव था तो हम शारीरिक श्रम से रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुओं को प्राप्त करते थे तो हम निरोगी और शतायु हुआ करते थे।अब हम आरामदायक और विलासिता की वस्तुओं को प्राप्त करते जा रहे हैं।और हमारी औसत आयु घटती ही जा रही है।और हम रोगों की ओर भी अग्रसर होते जा रहे हैं।कभी हम मूसलों द्वारा कूटे चावल और घर की चकिया से पीसे आटें को खाते थे।और पैदल यात्रा किया करते थे तो हम ताकतवर और निरोगी तथा शतायु हुआ करते थे।चकिया पीसने वाली गर्भवती महिलाओं को घर पर ही दाइयों द्वारा प्रसव करवा लिया जाता था।आज हमारे पास शारीरिक श्रम का सर्वथा अभाव सा है।हमारी प्रसूताओं को डाक्टरों द्वारा कम्पलीट बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है।बिना आपरेशन के प्रसव नहीं होता है।और पुरुषों/महिलाओं में शुगर,ब्लडप्रेशर बढ़ता ही जा रहा है।
      आज …

महापर्व..... लोकतंत्र

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आदरणीय सम्पादक जी
                        सादर प्रणाम

        पाँच साल बाद आने वाला महापर्व लोकतंत्र आ चुका है।इस महायज्ञ रूपी महापर्व में प्रथम आहुति प्रथम चरण के मतदान 11 अप्रैल को पड़़ चुकी है।मतदान मध्यम से भारी हुआ है।यू.पी.में मतदान प्रतिशत 63 रहा है।सबसे कम मतदान प्रतिशत 57 बिहार का रहा है।7 चरणों में होने वाले मतदान का पहला चरण बिना हिन्सा के समाप्त हो चुका है।त्रिपुरा आदि में 81% तक मतदान हुआ है।जो स्वस्थ लोकतंत्र का परिचायक है।        सरकार और निजी संगठनों के भारी प्रयास स्वरूप मतदाता अवश्य जागरूक हुआ है।बढ़ा मतदान प्रतिशत इस बात का सबूत रहा है।अनपढ़ और गरीब वर्ग इस यज्ञ रूपी महापर्व में आहुति डालने में सदैव आगे रहा है।पढ़ा लिखा शिक्षित वर्ग मतदान करने में सदैव से ही उदासीन रहा है।जागरूक केवल जागे हुए इसी वर्ग को करना है।अपना स्वार्थ और निजी कार्य छोड़कर इस महापर्व के लिए समय निकाल कर मतदेय स्थल तक अवश्य पहुंच कर मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेकर नये भारत का निर्माण में सक्रिय योगदान अवश्य करें।         किसी भी प्रकार के प्रलोभन और मुफ्त प्राप्त होने वाले नशे ज…

विभिन्न स्तरों पर शिक्षा का अनवरत गिरता स्तर

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम         कभी इसी प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में पढ़कर आई.ए.एस.,पी.सी.एस.आदि उच्च पदों पर चयनित होते थे।इन्हीं स्कूलों में पढ़कर सी.एम.,पी.एम. तक पदों की शोभा बढ़ा चुके हैं।परन्तु खेद का विषय है कि सरकार और शिक्षासुधार के विद्वानों की कतिपय गलत नीतियों, और दूषित मानसिकता के कारण आज गलत सरकारी नीतियों तथा सरकारी उपेक्षा के कारण ही प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा का स्तर लगातार गिरता ही जा रहा है।       सरकार ने अनेकों प्रलोभनों को देने के बाद भी स्तर सुधरता नजर नहीं आ रहा है।निःशुल्क शिक्षा, फ्री ड्रेस, कापी किताब मिड डे मील वजीफा आदि देने के बावजूद भी शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार नहीं हो रहा है।पढना सभी लोग प्राइवेट स्कूलों में ही चाहते हैं।लेकिन पढ़ाना सरकारी स्कूलों में ही चाहते हैं।      अब सरकारी स्कूलों में बिल्डिंग और संसाधनों को ही देखा जा सकता है।तब सीमित संसाधनों और पेड़ों के नीचे बैठकर भी अच्छी पढ़ाई होती थी।अब अध्यापक पढ़ाना ही चाहते न ही छात्र पढ़ना चाहते हैं।केवल वेतन अच्छा …

प्रबन्धतन्त्र द्वारा अपने पाल्यों को टापर बनाने का कुत्सित प्रयास

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम

         बिहार के टापर घोटाला और व्यापम् घोटाले की आँच ठंडी भी नहीं हुई थी।कि इस बीमारी के वायरस यू.पी.के रायबरेली जिले तक आ पहुंचे हैं।बुराई स्वयमेव बड़ी तेजी से  फैलतीहै।जबकि अच्छाई को प्रचारित, प्रसारित करना पड़ता है।
       यू.पी.के रायबरेली जिले के प्रबंध तंत्र के एक विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य द्वारा अपने लड़के/लड़कियों को टापर बनाने का एक मामला प्रकाश में आया है।
      डी.आई.ओ.एस.द्वारा जांच के आदेश दे दिए गए हैं।जो भी हो लेकिन यह परंपरा गलत है।इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाय कम है।इससे असली प्रतिभाएं कुण्ठित होती हैं।उनका मनोबल गिरता है।और वह अवसाद का शिकार होते हैं।
        सच तो यह है कि प्रतिभाओं को पुष्पित,पल्लवित होनें का अवसर मिलना चाहिए।और वह इनाम,इकराम के हकदार होते हैं।लड़का चाहे पी.एम.,सी.एम.किसी का भी हो।अगर उसमें प्रतिभा का अभाव है तो उसे टापर बनाने का मिथ्या प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।प्रतिभा ईश्वर प्रदत्त होती है।
        प्रतिभा हनन का कोई भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।प्रतिभा तरा…

I.P.L.Ka Tadka Aur Chunavi Jhtka | आई०पी०यल०का तड़का और चुनावी झटका

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I.P.L.Ka Tadka Aur Chunavi Jhtka | आई०पी०यल०का तड़का और चुनावी झटका आदरणीय सम्पादक जी

                                 सादर प्रणाम          इन दिनों आई.पी.एल.का बुखार सारे देश में सिर चढ़कर बोल रहा है।ऊपर से लोकसभा चुनाव 2019 भी सारे देश को गरमा रहा है।क्रिकेट खेल को बढ़ावा देने के लिए आई.पी.एल.बहुत सुंदर मंच है।शाम को चार घंटे का स्वस्थ मनोरंजन मिलता है।         वे दिन और थे जब सारी दुनिया हमें गरीब देश मानती थी।आज सारी दुनिया के क्रिकेटर बिकने के लिए भारत आते हैं।जिसे गरीब समझा जाता था आज वहीं देश एक अच्छा खरीददार बनकर उभरा है।

         एक पाकिस्तान को छोंड़कर सारी दुनिया के क्रिकेटरों का आई.पी.एल.खेलने का सपना होता हैं।आई.पी.एल.क्रिकेट की दुनिया का सशक्त हस्ताक्षर है।बी.सी.सी.आई.दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है।इसकी चमक सारी दुनिया देख रही है।खिलाड़ी जलवा बिखेर रहे हैं।        भारत में लोकसभा चुनाव 2019 दस्तक दे चुके हैं।सारे नेताओं का बुखार 105 डिग्री से ज्यादा पहुंच चुका है।मतदाता चुप्पी साधे हुए है।नेता टोह ले रहे हैं।अपनी किस्मत अजमाने के लिए जुगत लगा रहे है…