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एन्टी रोमियो स्कवायड की अपर्याप्तता

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम
          सरकार ने छात्राओं की सुरक्षा हेतु आपरेशन मंजनू,आपरेशन शोहदा,एन्टी रोमियो स्क्वायड आदि का गठन किया।अनेकों बार कैंसर बनती इस समस्या का समूल नष्ट करने का प्रयास किया।परन्तु रोग बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की।एन्टी रोमियो स्क्वायड की अपर्याप्तता के कारण शहरों/कस्बों में तो तैनाती हो जाती है लेकिन गाँव, देहात के इण्टर कालेजों/डिग्री कालेजों में शोहदों के आचरण से छात्राओं को स्कूल/कोचिंग आने-जाने में शोहदों के कारण मानसिक उत्पीड़न और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।महिलाओं/छात्राओं का बाहर निकलना दूभर है।
         महिला उत्पीड़न/शारीरिक एव मानसिक शोषण की घटनाएं बढ़ी हैं।बलात्कार और हत्या की घटनाओं में बाढ़ सी आ गई है।घर से बाहर आने-जाने वाली महिलाओं को हर समय इज्ज़त अस्मत खोने का भय लगा रहता है।घर के बाहर महिलाएं सुरक्षित और महफूज नहीं है।
        इसका एक बड़ा कारण संयुक्त परिवारों का टूटना और एकल परिवारों की बढ़ोत्तरी है।तथा टी.वी.रेडियो और सोशल मीडिया द्वारा पोर्न परोसना भी है।भारत की संस्कृति और मर्यादा का लगा…
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सौभाग्य या दुर्भाग्य

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम          सरकार का लक्ष्य है कि सौभाग्य योजना के अन्तर्गत हर घर में बिजली पहुंचाने का पुनीत और पावन योजना है।सौर ऊर्जा और बिजली के द्वारा वातावरण के अनुकूल ऊर्जा पहुंचाने और उत्पादन का लक्ष्य है।
        लेकिन सरकार नें मध्यांचल विद्युत वितरण खण्ड को निजी हाथों में दे दिए जाने के कारण बिजली बिल में कम-ज्यादा करवाने में खेल बड़े पैमाने पर जारी है।लोग अपनी धन शक्ति के बल पर बिल कम करवा रहे हैं।यहीं कारण है कि गरीब और रसूख की कमीं वालों का कनेक्शन विच्छेदन का अभियान सा चल रहा है।          सौभाग्य योजना में यदि सौ घरों का कनेक्शन जुड़ता है तो दो सौ घरों के कनेक्शन काटे जा रहे हैं।जिनके कनेक्शन कट रहे हैं।उनके बिलों में भारी अनियमितता है।बिजली कर्मचारियों की उदासीनता और खाऊ,कमाऊ नीति के चलते सरकार की मंशा पर पानी फेरा जा रहा है।सरकार खासकर मोदीजी और योगीजी की लोकप्रियता पर भी बट्टा लग रहा है।        गरीब जनता जिनका बिल हजार, डेढ़ हजार है उनके कनेक्शन कट रहे हैं।कैपिटलिस्ट और माननीयों,नेताओं, अभिनेताओं के बिल करोड़ों…

पुलिस चालान मे मस्त, जनता पस्त

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आदरणीय सम्पादक जी
                                  सादर प्रणाम           सरकार ने 1 सितम्बर 2019 से नया मोटर व्हीकल ऐक्ट लेकर आई।यातायात व्यवस्था के सुधार और एक्सीडेंट कम करने के लिए यह कानून लेकर आई।सरकार की मंशा अवश्य ही स्वागत योग्य कदम है।जुर्माना बढ़ाकर लग रहा है कि सरकार केवल जुर्माना से ही खजाना भरने की फिराक में है।
        इससे भी पुलिस ने अधिक कमाई का जरिया निकाल लिया है।गली,मुहल्ला में भी चालान का खेल चला रखा है।आटोमोबाइल और मोटर बाइक उद्योग पहले से ही घाटे में चल रहा था।अब कोढ़ में भी खाज पैदा हो गया है।गरीबों में भी 10-12 हजार लगाकर सेकंड हैंड मोटर साईकिल खरीद का चलन सा चल पड़ा है।
          विड़म्बना यह है कि अब हर कोई तो बाइक से ही चलना चाहता है।गरीब जनता ने कर्ज पानी लेकर किसी तरह 10-15 हजार की सेकेंड हैंड बाइक लेकर गाड़ी से चलने का शौक पूरा कर लेता था।लेकिन अब 30,000 हजार का चालान उसकी सामर्थ्य से बाहर है।         पुलिस चालान में मस्त है।जनता पस्त है।आम जन मानस में धीरे-धीरे आक्रोश के अंकुर प्रस्फुटित हो रहे हैं।सरकार यातायात नियमों में सुधार के साथ-सा…

सफल मिशन चन्द्रयान-2 की बधाई

helpsir.blogspot.inआदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम          रूस,अमेरिका, चीन के बाद भारत नें सफल मिशन चन्द्रयान-2भेजकर विश्व में चौथा देश होने का गौरव प्राप्त किया है।चन्द्रयान-2सबसे सस्ता और सबसे गुणवत्तापूर्ण मिशन भेजकर एक अलग उपलब्धि हासिल की है।इसके लिए अंतरिक्ष इन्जीनियरों तथा वैज्ञानिकों को बहुत-बहुत बधाई।
          भारत सरकार भी बधाई की पात्र है।भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक श्री विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम नाम रखकर सही अर्थों में विक्रम साराभाई जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है।
           विक्रम साराभाई जी का चन्द्र मिशन सच साबित करने की दिशा में इसरो ने एक मील का पत्थर रख दिया है।          हमारे वैज्ञानिक, इन्जीनियर और भारत सरकार ने स्वदेशी तकनीक और कम लागत में चन्द्रयान-2 भेजकर यह साबित कर दिया है कि हम किसी से कम नहीं हैं।सबसे आगे होंगे हिन्दुस्तानी की दिशा में एक सबसे बड़ा मील का पत्थर लगा दिया है।
एक बार पुनः वैज्ञानिकों और इन्जीनियरों और भारत सरकार को बधाइयां और शुभकामनाएं।प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

पाकिस्तान द्वारा युद्ध उन्माद फैलाना

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आदरणीय सम्पादक जी
                           सादर प्रणाम          पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे पर अनर्गल प्रलाप जारी है।हर तरफ से मुँह की खाने के बाद भी पाकिस्तान द्वारा युद्ध उन्माद फैलाने का सिलसिला जारी है।पाकिस्तान के वर्तमान रेलमंत्री श्री राशिद अहमद द्वारा एक तुगलकी फरमान जारी करके अक्टूबर-नवम्बर में युद्ध की घोषणा की गई है।
         "घर में नहीं है खाने को अम्मी चली भुनाने को"इस कहावत को चरितार्थ कर रही है।ज्ञातव्य हो कि यह वहीं मंत्री हैं जिनको भारत विरोधी बयानों के लिए इंग्लैंड में भारतवंशियों द्वारा जूतों से पिटाई की गई थी।शायद राशिद अहमद जूतों से पिटाई भूल गए हैं।इनके नेता,अभिनेताओं, मंत्री,संतरी,प्रधानमंत्री द्वारा भारत के खिलाफ जहर उगलने का क्रम जारी है।मोदी और मोदी सरकार से निवेदन है कि गुलाम कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे से खाली कराकर भारत में शामिल करके गुलाम कश्मीर की जनता को पाकिस्तान के अत्याचारों से मुक्त करवाने की कृपा करें।मोदीजी हैं तो यह भी मुमकिन है।प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

पाकिस्तान की बेजा चिल्ल पों

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम         भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर का 73 साल पुराना कोढ़ यानि 370 जब से हटाया है।तब से लगातार हर मंच पर पाकिस्तान का कश्मीर पर बेजा चिल्ल पों लगातार जारी है।कोई ऐसा मंच नहीं है जहाँ पाकिस्तान ने अपनी अलाप न लगाई हो।हर मंच पर उसे मुँह की खानी पड़ी है।
       केवल पाकिस्तान का सदाबहार ( मौकापरस्त ) मित्र चीन ही उसके सुर में सुर मिला रहा है।कारण है दोनों ही भारत के दुश्मन नं.1और दुश्मन नं. 2 जो ठहरे।दुश्मन का दुश्मन दोस्त ही होता है।इसी तर्ज पर दोनों दुश्मन जानी दोस्त बने हैं।।   
        इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को मुस्लिम देशों से ही ज्यादा सम्मान और समर्थन मिल रहा हैं।वहीं पाकिस्तान को नरेन्द्र मोदी जी की मिल रही ख्याति पच नहीं पा रही है।पाकिस्तान की सरकार जहाँ पानी पी-पी कर भारत को कोस रहा है वहीं पाकिस्तान की जनता अपनी ही सरकार को कटघरे मे खड़ी कर रही है।।
       सीमा पर संघर्ष विराम की पाकिस्तान की नापाक कोशिश लगातार जारी है।बेमौसम बरसात की तरह ही अग्रिम चौकियों पर अंधाधुंध फायरिंग …

गुलाम कश्मीर

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आदरणीय सम्पादक जी
                           सादर प्रणाम       आधुनिक युग में गुलामी किसी बदनुमा धब्बे से कम नहीं है।देश को आजाद हुए लगभग 73 वर्ष हो चुके हैं।पी.ओ.के.वाला कश्मीर आज भी गुलाम कश्मीर के नाम से ही पहचाना जा रहा है।गुलामी का दंश झेलने पर आज भी मजबूर है।
        सन् 1947 ई० में जम्मू कश्मीर के तत्कालीन महाराजा श्री हरी सिंह का राज्य था।इनके लड़के कर्ण सिंह जवाहर लाल नेहरू के निकट सहयोगी थे।श्री हरी सिंह जी को दोहरी मार झेलनी पड़ी।पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर आक्रमण कर दिया और पी.ओ.के.कहा जाने वाले हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया।और उस जीते भूभाग को ही गुलाम कश्मीर की संज्ञा दी।
       जवाहर लाल नेहरू किसी भी कीमत पर शेख अब्दुल्ला को ही जम्मू कश्मीर का शासक बनाने पर तुले हुए थे।जवाहर लाल नेहरू ने शर्त लगा दी थी कि शेख अब्दुल्ला को प्रशासक नियुक्त करने पर ही भारत की सेना लड़ने जाएगी।जब आप शेख अब्दुल्ला को प्रशासक नियुक्त करेंगे।मजबूरन शेख अब्दुल्ला को अंतरिम प्रशासक नियुक्त करना पड़ा।और गुमनामी की मौत मरने के लिए महाराज हरी सिंह बम्बई चले आए।        बलूच लोग भारत…