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मौसम और आधुनिकता पर भारी कुम्भ में आस्था की दो डुबकी

gsirg.com मौसम और आधुनिकता पर भारी कुम्भ में आस्था की दो डुबकी  आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।            हमारे भारत देश धर्म प्रधान देश रहा है।हमारे आदर्श,हमारी सभ्यता, हमारी नैतिकता विश्व के मानचित्र में सबसे अलग पहचान रही है।सैकड़ों सालों तक मुगलों ने हमारी संस्कृति, धर्म,आस्था पर चोट दर चोट दी पर कामयाब नहीं हुए।हमारी श्रद्धा, भक्ति, आस्था की जड़ें इतनी गहरी हैं कि मिटाना तो दूर डिगाना भी आसान नहीं है।हिन्दुस्तान हिन्दू बाहुल्य देश है।इसके बाद तीन शतक वर्ष तक लगभग अंग्रेजों ने भी जड़ें हिलाने की कोशिश की परन्तु धर्म परायण मंगल पाण्डे ने सशत्र क्रांति की शुरुआत कर पहले सेनानी होने का गौरव हासिल किया था।अंंग्रेजों ने भी अनेको प्रलोभन, दण्ड, नारकीय यातनाएं देकर लोगों को धर्म से डिगाने के प्रयत्न किए पर असफल रहे।          मौसम और आधुनिकता पर श्रद्धा और आस्था की डुबकी भारी है।मकर सक्रांति पर अकेले संगम तट पर लगभग सवा दो करोड़ लोगों ने स्नान, दान किया।कल पौष पूर्णिमा की पावन डुबकी के रूप में दूसरा पवित्र गंगास्नान,संगम स्नान, कल्पवास की शुरुआत भी कल से होगी जो एक महीने चलेगी।कल्पवासी एक महीने त…
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" स्टैच्यू आफ यूनिटी " दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
कभी दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति अमेरिका के "स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी"को दर्जा प्राप्त था।अब दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति गुजरात, भारत के नाम दर्ज हो गई है।इसका नाम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी"दिया गया है।इसकी ऊंचाई182 मीटर है।इसके लिए नरेन्द्र मोदी सरकार अवश्य ही बधाई की पात्र है।जिसने भारत के नाम एक विश्व कीर्तिमान दर्ज कराया है।
समाचार पत्रों में इसके प्रचार-प्रसार के लिए 2.6 करोड़ खर्च होने का समाचार छपा था जिसे एक आर.टी.आई ऐक्टिविस्ट के जबाब में सम्बन्धित मंत्रालय ने उत्तर में बताया था।सरकार की यह फिजूलखर्ची नहीं तो क्या है?मूर्ति के आसपास मलिन और गरीब होने का समाचार भी मुद्रित था।यदि यहीं रकम उन गरीब बस्ती का कायाकल्प किया जा सकता था।इससे सरकार की कीर्ति और बढ़ती।देशवासियों के खून-पसीने से कमाई रकम जो टैक्सों के रूप में सरकारी खजाने में जमा की जाती है।यदि इसी रकम से उन आसपास के गरीब लोगों की रोटी का प्रबंध, उनके बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करके उनकी गरीबी दूर की जा सकती थी।जिससे उस रकम के उपार्जन करने वालों को तथा मोदी …

कृषक और कृषि यंत्र

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
भारत में 70% लोगों का मुख्य पेशा कृषि है।70% लोग अन्नदाता और किसान भगवान हैं।सवा अरब जनसंख्या का पेट यहीं 70% अन्नदाता भरते हैं।इसके अतिरिक्त विदेशों में अन्न निर्यात के द्वारा दुनिया के अन्य लोगों का भी पेट भरने का काम यहीं 70% किसान भगवान ही करते हैं।
किसानों का परम्परागत कृषि यंत्र देशी हल ,मिट्टी पलट हल अब केवल म्यूजियम में रखने वाले ही हैं।अब किसी किसान के पास बैल ही नहीं हैं तो हल का क्या काम?अब लगभग सभी किसानों की किसानी ट्रैक्टर पर आधारित है।जुताई से लेकर कटाई, मड़ाई तक सारा कार्य ट्रैक्टर आधारित ही है।कभी बैलगाड़ियों से बारात और मेला लोग आते जाते थे।अब यह सवारी गाड़ी केवल कृषि विज्ञान की किताबों तक ही सीमित होकर रह गई है।अब कोई किसान बनना ही नहीं चाहता।कभी यह कहावत मशहूर थी---"उत्तम खेती मध्यम बान।निकृष्ट चाकरी भीख निदान।।"अब चाकरी अर्थात सरकारी नौकरी प्रथम पसंद बनी हुई है।बैलगाड़ी, देशी हल,मिट्टी पलट हल केवल कृषि विज्ञान की किताबों तक ही सीमित होकर रह गए हैं।कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र भी किसानी से मुँह मोड़ चुके हैं।कोई किसानी क…

दिव्य कुम्भ 2019

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
दिव्य कुम्भ,भव्य कुम्भ, शस्य कुम्भ 2019 का शुभारम्भ 14 जनवरी 2019 से प्रयागराज में हो गया है।कुम्भ का शाब्दिक अर्थ घड़ा होता है। इस बार के कुम्भ में लगभग 15 करोड़ लोगों के प्रयागराज आने की उम्मीद है।ऐसा भव्य और दिव्य कुम्भ में एक साथ इतने लोगों का संगम विश्व के किसी खित्ते में नहीं होता है।यहां लोग आस्था और श्रद्धा की डुबकी लगाने संगम तट प्रयागराज में आते हैं।मुख्यमंत्री उ०प्र० सरकार श्री आदित्यनाथ योगी नें कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी है।18 थानों का अस्थायी निर्माण किया गया है।जिसमेँ महिला और पुरुष थानों की अलग-अलग व्यवस्था है।फायर स्टेशन की भी व्यवस्था की गई है।मेला क्षेत्र में साफ-सफाई की भी खासे इन्तजाम किये गए हैं।1 लाख 22 हजार सुलभ शौचालय का निर्माण किया गया है। खोया-पाया की भी विशाल एल.ई.डी.स्क्रीन की भी व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था ध्यान में रखते हुए 100 बेड का हास्पिटल भी मेला क्षेत्र में कार्य रत है।इसके अलावा भी अन्य अस्पताल भी सेवारत हैं।इसके लिए यू.पी.सरकार पूरी तरह कृत संकल्प है। प्रवासी भारतीयों के लिए टेण्ट सिटी की भव्य व…

आन्दोलनों के दौरान हिंसा और राष्ट्रीय सम्पति की क्षति

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।यदि भारत में आन्दोलनों का जनक श्री मोहनदास करमचंद गांधी को कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।आपनें नमक,सत्याग्रह, अंग्रेजों भारत छोड़ों आदि सफलतापूर्वक आन्दोलनों को छेंड़ा।और प्रसिद्धि पाई।प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन नें कहा था।"कोई हांड़-मांस का पुतला धरती पर चलता-फिरता भी था"।वह अवश्य ही गांधी था।इसमें कोई आश्चर्य नहीं।गांधी में अभूतपूर्व नेतृत्व क्षमता थी।इसके अलावा सुंदरलाल बहुगुणा का चिपको आंदोलन, विनोबा भावे का भूदान आन्दोलन भी भारत के आन्दोलनों में प्रमुख थे।तब के समय में आन्दोलन अहिंसात्मक और बिना राष्ट्रीय/राजकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले ही हुआ करते थे।कालांतर में आजादी के बाद आन्दोलनों की राह हिंसात्मक और राष्ट्रीय/राजकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाए बिना कोई आन्दोलन होता ही नहीं है।आन्दोलनों की दशा और दिशा बदल सी गई है।सरकारी सम्पत्ति को कोई अपनी सम्पत्ति समझता ही नहीं है।शत्रु सम्पत्ति की तरह लोगों/आन्दोलनकारियों का व्यवहार होता है।इस तरह के आन्दोलनों को आन्दोलन कहा ही नहीं जा सकता है।गांधीजी नें जो आन्दोलनों की राह भारत ही नहीं डर…

ड़ाक्टर और मरीज

दोस्तों मै आपको एक दिलचस्प  कहानी सुनाता हूँ।
     एक व्यक्ति को अपने दिल के इलाज के लिए नोएडा के एक फाइवस्टार हॉस्पिटल में जाना पड़ा। अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने पेशेंट को तुरंत बायपास सर्जरी करवाने की सलाह दी ।
      पेशेंट बहुत नर्वस और परेशान हो गया, किंतु वह तुरंत ही सर्जरी की तैयारी में लग गया ।परन्तु...    ऐसे मुश्किल हालात मे भी उसने अपना धैर्य नही खोया, उसने थोडा संयम रखकर सैकेंड ओपीनियन लेना ज्यादा ठीक समझा ।     उसने ऑपरेशन के पहले वाले सारे टेस्ट करवाने के बाद डाक्टरों से आपरेशन मे होने वाले खर्च के बारे मे पूँछा तो डॉक्टरों की टीम ने बजट बताया....18 लाख।
इतनी बड़ी धनराशि, पेशेंट और उसके परिवार वालों को बहुत ही ज्यादा लगी।
लेकिन....
"जान है तो जहान है"....
यह सोचकर वह फॉर्म भरने लगा...
      फार्म भरते भरते एक जगह व्यवसाय का कॉलम आया।मरीज पहले से ही परेशान था,उपर से खर्चे और
आपरेशन की टेंशन थी ।इसी उधेड़बुन में न जाने क्या सोचते सोचते या पता नहीं किस जल्दबाजी में उसने उस काॅलम के आगे "C.B.I." लिख गया।फिर तो जैसे एक चमत्कार हो गया।
         अचानक हॉस्पिट…

भयानक कर्कट रोग कैंसर

Web -gsirg.com
भयानक कर्कट रोग कैंसर इस संसार में प्राणलेवा रोगों में अनेक रोगों का नाम लिया जा सकता है जैसे HIV पॉजिटिव होना , डेंगू , ब्लडप्रेशर , चेचक और कैंसर आदि | इन सभी मारक रोगों में कैंसर का महत्वपूर्ण स्थान है | यह एक दुष्ट रोग है , तथा जिस भी प्राणी को यह रोग हो जाता है , उसे अपने जीवन का अंत निकट दिखाई पड़ने लगता है | क्योंकि अभी तक पूर्ण रूप से इस के सफल और सटीक इलाज की खोज नहीं हो पाई है | केवल आयुर्वेद ही इसकी सफल चिकित्सा करने में पूरी कामयाबी हासिल कर सका है | आज हम इस रोग के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे , और उसके सफल इलाज का वर्णन भी करेंगे |
कारण आयुर्वेद में कैंसर को बड़े ही सूक्ष्म रूप में इसका सफल अध्ययन किया है | आयुर्वेद में कैंसर को रक्तार्बुद के नाम से जाना जाता है | पहले इसे असाध्य रोग माना जाता था | इस रोग की सही जानकारी होने पर रोगी परेशान होकर इस संसार से जाने की तैयारी करने की सोचने लगता है | प्राचीन समय में इस रोग के रोगी '' न '' के बराबर मिलते थे , परंतु आजकल इसका उग्र रूप सामने आ रहा है | इसका प्रमुख कारण है,…