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वृक्षारोपण

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आदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम        यह पावन भूमि राम,कृष्ण की धरती रही है।यहां एक से बढ़कर एक महान मूर्धन्य विद्वानों, वीर,शिरोमणि, तथा अन्य विलक्षण प्रतिभा से सम्पन्न साधु,संतों ने जन्म लिया है।भगवान नें प्राकृतिक सम्पदा देने में कोई कन्जूसी नहीं बरती है।प्राकृतिक संसाधनों को दोनों हाथों से भर-भरकर लुटाया है।
       गोलकुंडा की खान से कोहिनूर नामक हीरा निकला था।जिसे खरीदने के लिए पूरी दुनिया की दौलत कम पड़ गई थी।जब हीरे के तीन टुकड़े किए गए तो दुनिया के दौलतमंद उस हीरे को खरीद सकी थी।      वन सम्पदा में इमारती लकड़ी तथा कीमती फर्नीचर तैयार होने वाली लकड़ी भी भगवान ने खूब दी थी।हमने निजी स्वार्थ बश प्रकृति प्रदत्त सम्पदा का खूब दोहन किया।
        अब स्थिति यह आ गई है कि सांस लेने भर की हवा भी नहीं बची है।दिल्ली की वायु गुणवत्ता मारक स्तर पर पहुंच चुकी है।यहीं कारण है कि शहर की दवा और देहात की हवा बराबर होती है।
        हमने नादानी वश जिन्दा रहने के लिए परम आवश्यक आक्सीजन देने वाले वृक्षों को काट डाला।और जलवायु असंतुलन को न्यौता दे बैठे।और …
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हार की जीत ( CWC 2019 ) ?

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आदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम          4 साल बाद आने वाला क्रिकेट महाकुंभ क्रिकेट विश्व कप 2019 जिसका फाइनल मैच क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले विश्व के सबसे प्रतिष्ठित मैदान Lord'S के मैदान लंदन में मेजबान इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड के बीच 14 जुलाई 2019 को खेला गया।Lord'S के मैदान पर क्रिकेट खेलना हर क्रिकेट खिलाड़ी के लिए सपना होता है।
         फाइनल खेलने वाली दोनों टीमों ने इससे पहले कभी क्रिकेट विश्व कप नहीं जीता था।क्रिकेट के जनक कहे जाने वाले इंग्लैंड ने 1975 ई० जबसे क्रिकेट विश्व कप शुरू हुआ ,कभी भी विश्व कप नहीं जीता था।उसका सपना क्रिकेट विश्व कप जीतने का था।मुकाबले में कभी भी इंग्लैंड जीतती नजर नहीं आई।
         न्यूजीलैंड नें टास जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी।50 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 241 रन न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने बनाए।जबाब में मेजबान इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने 241 रन पर इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने आल आउट होकर 241 रन बनाकर मैच टाई करवाने में सफलता अर्जित की।
      अब फैसला सुपर ओवर में होना निश्चित हुआ।सुपर ओवर में …

सफेद हाथी बने ग्रामीण डाकघर

helpsir.blogspot.comआदरणीय सम्पादक जी
                           सादर प्रणाम       डाकघर कभी का जिम्मेदार और भरोसेमंद महकमा माना जाता था।इस विभाग में लापरवाही का लेशमात्र स्थान नहीं था।बड़े से बड़े डाकू भी पोस्टमैन या मेल प्यून को लूटने की हिम्मत नहीं कर पाता था।यह विभाग सबसे पुराना और विश्वसनीय माना जाता था।          कहने को सभी ग्रामीण डाकघर भी C.B.S.बना दिए गए।परन्तु B.S.N.L.के सर्वर कभी रहते ही नहीं है।और सर्वर की अनुप्लब्धता के चलते बाबुओं की चाँदी है।केवल सीट पर बैठकर सोने का काम शेष बचा है।सर्वर न होने का बहाना बनाकर काम न करना ही एकमात्र काम बचा है।           वी.वी.आई.पी.कहे जाने वाले जनपद रायबरेली के उपडाकघर सेहगों, रायबरेली में डाकघर की सेवाओं का यह आलम है कि 1000 प्रति माह जमा होनेवाली आर.डी.पूरे पाँच साल जमा करने के उपरांत 74000 हजार भुगतान होना था।लेकिन सर्वर न उपलब्ध होने के चलते मई 5,2019 को परिपक्व हुए खाते का भुगतान 5 जुलाई 2019 तक नहीं हो सका है।डाकघर जाने पर उप डाकपाल महोदय जी हमेशा से ही तैयार जबाब सर्वर न होना बताकर टाल देते हैं।बकौल उप डाकपाल 5 बार रजि०डाक से डाक …

क्रिकेट विश्व कप 2019 मे अजेय भारत का विजयरथ रुका।

helpsir.blogspot.comआदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम       क्रिकेट विश्व कप 2019 में भारत का अजेय अभियान अब तक लगातार जारी था।कल दि 30-06-2019 को इंग्लैंड के खिलाफ भारत का अजेय अभियान थम सा गया।इस मैच में भारत नें 5 विकेट के नुकसान पर केवल 306 रन बनाकर 31 रन से मैच गंवा बैठी।इस मैच को भारत ने कभी भी जीतने के लिए खेला ही नहीं।यह मैच इंग्लैंड के लिए करो या मरो का मैच था।यदि इंग्लैंड टीम यह मुकाबला हार जाती तो सेमीफाइनल में पहुंचने की सारी उम्मीदें समाप्त हो जाती।मगर मेजबान इंग्लैंड नें हर विभाग में भारत को मात दी।
       बंग्लादेश और पाकिस्तान के समर्थकों की भारत के जिताने की दुआ भी काम नहीं आई।पाकिस्तान और बंग्लादेश सबेरे वाली गाड़ी से चले जाएंगे की हालत मे आ गये।
       यदि भारत यह मैच जीतता तो इन दोनों देशों की उम्मीदें भी कायम रहती।हतास पाकिस्तान के बासित नें पहले ही कहा था कि पाकिस्तान को बाहर करने के इरादे से भारत हार भी सकता है।और ऐसा ही हुआ।       भारत के गेंदबाज मोहम्मद शमी और बुमराह का प्रदर्शन उम्मीद से ज्यादा उम्दा रहा है।रोहित शर्मा ने भी काबिलियत औ…

लुप्त होते महिला मंगल गीत

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आदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम        लोकगीतों की कड़ी में महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले मंगलगीतों का प्रथम स्थान हुआ करता था।महिलाओं द्वारा शादी ब्याह,मुण्डन, छेदन आदि मांगलिक सुअवसरों पर विभिन्न प्रकार के गीत हुआ करते थे।यथा---उड़द और मूंग की बड़ियां बनाए जाने के समय के गीत,मण्डप रोपित होने पर प्रतिदिन सांझ न्यौतने के गीत,तेल चढ़ाए जाने के समय के गीत,द्वार-चार के गीत,स्वागत गीत,खाना खाने के समय के गीत,ब्याहा-भात के समय के गीत,कलेवा के समय के गीत,विदाई गीत आदि।इसके अतिरिक्त होली गीत,गोबर के बल्ला बनाए जाने के समय के गीत।रक्षाबंधन, नागपंचमी के गीत,सावन पर झूला गीत।
      कुल मिलाकर हर मांगलिक अवसर के अलग-अलग महिला मंगल गीतों की सिरीज हुआ करती थी।समय बदला महिला मंगल गीतों के स्थान पर फिल्मी गीत गाए जाने लगे।पुराने जमाने के महिला गीतों में सुर-ताल तथा रस हुआ करता था।अब के फिल्मी गानों में फूहड़ता, अश्लीलता ही परोसी जा रही है।द्विअर्थी गीतों का चलन चल पड़ा है।
     हमारे यहाँ शास्त्रोक्त विधि से वैदिक रीति से शादी का विधान रहा है।उसी अनुसार मांग…

जानलेवा बुखार

heipsir.blogspot.comआदरणीय सम्पादक जी
                        सादर प्रणाम

       गर्मियों की शुरूआत होते ही तराई क्षेत्रों में जानलेवा दिमागी बुखार की दस्तक शुरू हो जारी है।यह दिमागी बुखार बिना सौ-दो सौ बच्चों की बलि लिए मानता ही नहीं है।जब तक स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद से जागता है।सौ-दो सौ बच्चों की बलि चढ़ चुकी होती है।कभी गोरखपुर, जौनपुर, बिहार में अपनी जानलेवा दस्तक देता ही रहता है।इसे इंसेफेलाइटिस, दिमागी बुखार,जापानी बुखार चमकी बुखार आदि की संज्ञा दी जाती है।
         इस बार बिहार के मुजफ्फरपुर में इसने अपनी राजधानी बनाई।अस्पतालों में लगभग 200 से अधिक बच्चों की बलि ले चुका है।यह आंकड़े तो अस्पताल में भर्ती मरीजों की है।प्राइवेट अस्पतालों और बिना भर्ती के मरने वाले बच्चों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।बिहार के मुजफ्फरपुर में इसे चमकी बुखार की संज्ञा से नवाजा गया है।हर बार गर्मी से लेकर वर्षा तक इस बुखार के संक्रमण का भय रहता है।       सरकार हर बार इस बुखार पर रिसर्च करवाने का दावा करती है।मगर यह अपने पांव पसारने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखता है।सरकार से निवेदन है कि समय पूर्व …

पुरातनम् बीज बनाम अद्यतन

helpsir.blogspot.comआदरणीय सम्पादक जी
                               सादर प्रणाम        पुराने जमाने में रासायनिक खादों, उर्वरकों, कीटनाशकों के प्रयोग के बिना केवल गोबर की खाद से जो अन्न पैदा किया जाता था उस अन्न की खुश्बू, स्वाद लाजबाब होता था।खेत,खलिहानों, बागों,चरागाहों में चरकर आई गाय,भैंसों के दूध में गजब का स्वाद और प्रचुर मात्रा में औषधीय गुण होते थे।
       तब के देशी घी में भी गजब की सुगंध पाई जाती थी।खरा करने हेतु कड़ाही में गरम करते वक्त देशी घी की मोहक सुगंध फैल जाया करती थी।जिससे पड़ोसियों को भी पता हो जाता था कि अमुक घर में देशी घी बन रहा है।
     आयुर्वेद में अनुपान के रूप में जिस दूध का वर्णन मिलता है वह छुट्टि चरने वाली देशी गाय का दूध ही माना जाता है।खूंटे से बांधकर नांद में चारा,भूसा खिलाने वाली गाय के दूध में उतने औषधीय गुण नहीं होते हैं जितना छुट्टा चरने वाली गाय के दूध में पाए जाते हैं।
      देशी भूने चने में जो खुश्बू, सोंधापन गोबर की खाद से उपजाए चने में होती थी वह उर्वरकों से उत्पादित चनों में नहीं पाई जाती है।औषधीय गुण भी नहीं पाए जाते हैं।
      पुराने जमाने …