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यूरिया खाद के लिए मारामारी

helpsir.blogspot.com आदरणीय सम्पादक जी                                सादर प्रणाम        2014 से 2019 तक यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के शासन काल में यूरिया खाद और डी.ए.पी.उर्वरक तथा रसोई गैस की कोई किल्लत नहीं थी।इस बात की चहुंओर प्रशंसा होती रहती थी।        परन्तु आज 2020 में किसानों को यूरिया खाद,डी.ए.पी.उर्वरक के लिए भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।न तो साधन सहकारी समितियों में न ही प्राइवेट लाइसेंस धारक उर्वरक विक्रेताओं के यहां प्रर्याप्त उपरोक्त दोनों उर्वरक की आपूर्ति हो पा रही है। जिसके लिए किसानों को खरीफ फसलों के लिए यूरिया खाद के लिए काफी मशक्कत और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।           यदि उर्वरकों के लिए मारामारी शब्द का इस्तेमाल किया जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। मीडिया केवल रिया का समाचार दिखा रहा है। यूरिया का समाचार सभी चैनलों से गायब है।           अन्नदाता को अपनी फसलों के पोषण के लिए यदि उर्वरकों की प्रर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो किसान भगवान एक अरब 36करोड़ लोगों के पेट भरने को कैसे सुनिश्चित करेगा।           किसान 3-3दिन एग्र
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गुमनाम स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों की यादों को संजोये रखना

helpsir.blogspot.com आदरणीय सम्पादक जी                                 सादर प्रणाम          दि०30-08-2020 को भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने"मन की बात"कार्यक्रम में देशवासियों से अपील की है कि गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की याद को अक्षुण्ण रखने तथा सभी देशवासियों को प्रेरणा लेने के उद्देश्य से इन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी सोशल मीडिया पर लिखने की अपील की है।ताकि भावी पीढ़ी भी इन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की याद ताजा कर सके तथा प्रेरणा ले सके।           मेरा सरकार से निवेदन है कि इन गुमनाम स्वतंत्रता नायकों की जीवनी और कृतित्व को उनके अपने ग्राम पंचायत,क्षेत्र पंचायत,जिला पंचायत के सरकारी प्राइमरी स्कूलों तथा अन्य सरकारी भवनों की दीवारों पर अंकित करवाने तथा उनके चित्रों को (यदि उपलब्ध हो सके तो) बनवाने की कृपा करें।ताकि भावी पीढ़ी के छात्रों, नौनिहालों को उनकी यादों अक्षुण्ण रखने में मदद मिल सके।तथा भावी पीढ़ी इनके जीवन से प्रेरणा ले सके।इससे राष्ट्र भक्ति की भावना जागृत होगी। तथा इनके अंशज-वंशज गर्व की अनुभूति कर सकेंगे।             इन गुमनाम

परीक्षा और सुरक्षा

helpsir.blogspot.com आदरणीय सम्पादक जी                                 सादर प्रणाम जे ई ई और नीट परीक्षा सितम्बर में करवाने की अनुमति मिल चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय ने फाइनल इयर की बिना परीक्षा कराने डिग्री न देने की बात कही है।प्रोन्नत केवल अन्य परीक्षाओं के छात्र ही किए जा सकते हैं। फाइनल इयर की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से होनी हैं।              सर्वोच्च न्यायालय ने परीक्षा और सुरक्षा देने की बात कही है।दो गज की दूरी तथा मास्क तथा सेनेटाइजर अनिवार्य कर दिया गया है। चाहिए भी छात्र किसी भी देश की भविष्य की पूंजी होते हैं।इन्हीं छात्रों में भविष्य के मंत्री,सन्तरी, प्रधानमंत्री और नेता अभिनेता तथा आई.ए.एस.,पी.सी.एस छिपे होते हैं।             छात्र हित में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्र हित को भी ध्यान में रखा है।कोरोना वायरस की प्रसार की गति को ध्यान में रखकर उचित निर्णय दिया है। विश्व विद्यालय अनुदान आयोग की देखरेख में अन्य बाकी बची सभी विश्व विद्यालयों की फाइनल परीक्षाएं आयोजित करवाने का आदेश दिया है।क्योंकि बिना फाइनल परीक्षा के डिग्री न देने की बात कही है। प्रमोद कुमार दीक्षित सेहगों रा

कोरोना का चरामबिन्दु आना शेष

helpsir.blogspot.com आदरणीय सम्पादक जी                                 सादर प्रणाम भारत में कोरोना का चरम बिन्दु आना अभी शेष है।आज हम रोजाना लगभग 9 लाख से भी अधिक टेस्ट कोरोना के कर रहे हैं। मृत्यु दर भी सकल विश्व के मुकाबले कम लगभग 1.99% पर स्थिर है। ठीक होने वाले मरीजों का प्रतिशत लगभग 72% है।75% पहुंचते ही हम लगभग कोरोना के चरम बिन्दु पर पहुंच जाएंगे। जिसमें अभी लगभग 2-3 सप्ताह  का समय लग सकता है। सितम्बर 2020 के मध्य अथवा अंतिम सप्ताह तक हम कोरोना के पीक प्वाइंट पर पहुंच जाएंगे।रोज इस समय 65000-68000तक कोरोना संक्रमितों की आ रही है।यह पीक पर पहुंचने के साथ बढ़ भी सकती है। लेकिन यह लगभग अटल सत्य है कि अब भारत में मृत्यु दर नहीं बढ़ सकती है।इसका मुख्य कारण हमारी केन्द्रीय सरकार और प्रांतीय सरकारों द्वारा समय पर लिए गए उचित फैसलों तथा हमारे कोरोना वारियर्स के समर्पण भाव से की जाने वाले चिकित्सकीय व्यवस्थाओं के कारण ही सम्भव हो सका है। हमारे देश के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी गजब की है।कुछ हद तक मृत्यु दर कम होने का श्रेय इसको भी जाता है।यह सत्य है कि कोरोना की कोई दवा अथवा वैक्सी

शिक्षा बनाम नैतिकता

helpsir.blogspot.com आदरणीय सम्पादक जी                              सादर प्रणाम        देश की आजादी के समय यानि 1948ई०में भारत देश का यह कहकर उपहास उड़ाया जाता था कि यह तो अनपढ़ों का देश है। भारत गरीबों का देश है। भारत जादूगरों का देश है। यहां सबसे ज्यादा विकलांग रहते हैं। यहां भिखारी बहुत हैं। यहां जादू-टोना, तंत्र-मंत्र बहुत हैं। आदि-आदि।सवाल यह उठता है कि जब भारत गरीब और गरीबों का देश था तो मुगल और अंग्रेज यहां करता करने आए थे?लूट-फूंक के बाद यहां क्यों टिक गये?                 भारत राम और कृष्ण का देश है। भारत सोने की चिड़िया था,है और रहेगा। यहां भगवान ने जी भरकर प्राकृतिक सम्पदा दोनों हाथों से भर-भरकर लुटाया है। जब हम आजादी के समय कथित रूप से अनपढ़ थे तब कहीं भी बलात्कार नहीं होते थे।हम उस समय नारी को देवी कहकर बुलाते थे। नारी का सम्मान होता था। हमारी पुरानी मान्यता और परम्परा थी कि हम नारी पर हाथ नहीं उठाते थे।          एक महाभारत कालीन कथा है कि बाबा भीष्म पितामह ने शिखण्डी जो पूर्व जन्म में नारी था लेकिन भीष्म पितामह ने उसको नारी मानते ही हथियार नहीं उठाए थे।मेरे देश की धनी संस

कोरोना और बाधित ओ०पी०डी०

helpsir.blogspot.com आदरणीय सम्पादक जी                              सादर प्रणाम           कोरोना संकट के कारण विश्व में लगभग सभी कार्य बाधित हुए हैं। भारत जैसे विकासशील देश में कोरोना ने पिछले 4 महीने से शिक्षा, स्वास्थ्य सहित सभी विभागों की गतिविधियों में पूर्ण विराम सा लगा दिया है। जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और न्यायपालिका के कार्य बाधित होने से देश भारी मुसीबतों का सामना कर रहा है। इसमें भी स्वास्थ्य विभाग की ओ.पी.डी.बन्द होने से जन हानि होने की महती सम्भवाना बढ़ती ही जा रही है।         लखनऊ के लगभग सभी बड़े अस्पतालों में पहले कोरोना की जांच करवाने की सलाह दी जाती है। प्राइवेट में यह जांच लगभग 4500रू०की होती है। सरकारी जांच केन्द्रों में यह जांच मुफ्त है।जिसके कारण सभी विभागों के रोगी मेडिकल कॉलेज अथवा अन्य सरकारी जांच केन्द्रों का रुख कर रहे हैं। जिसके कारण सरकारी जांच केन्द्रों में कार्य का दबाव बढ़ता ही जा रहा है।                         समाचार पत्रों में अभी हाल ही में कार्य दबाव बढ़ने के कारण ही यह समाचार छपा है कि किसी बाबू द्वारा निगेटिव रिपोर्ट को भी पाज़िटिव करार दिया गया है।

डाक्टरों का रोग अनुसंधान और रोग निदान

helpsir.blogspot.com आदरणीय सम्पादक जी                          सादर प्रणाम       राजा महाराजाओं के जमाने में हर राज़ परिवार के इलाज के लिए राज वैद्यों की नियुक्ति होती थी।यह राज वैद्य राज्य के सबसे योग्य वैद्य हूआ करते थे। रामायण काल में सुषेण वैद्य लंका के राजा रावण के राज वैद्य थे। लेकिन अपने वैद्य धर्म के साथ न्याय करते हुए रावण के दुश्मन श्री राम के अनुज लक्ष्मण जी के इलाज के इलाज के लिए संजीवनी बूटी का अनुसंधान के साथ प्राप्ति स्थान का पता भी बताया था।और सूर्योदय के पूर्व ही बूटी लाने का आदेश दिया था।           धन्य थे वे वैद्य ।जो दुश्मन के इलाज में भी कोताही नहीं बरतते थे।राम चरित मानस में बाबा तुलसीदास जी ने उल्लेख किया है---"सचिव,वैद्य,गुरु तीनि जो प्रिय बोलैं भय इस। राज्य,धर्म,तनु तीनि का होय बेगिहिंवु नाश।।"कहते हैं किसी वैद्य जी को पर्दे की बात कहकर केवल रोगी को बांधकर केवल रस्सी दिखाई गई और वैद्यराज नें रस्सी देखकर ही बता दिया कि इसे भूसे की आवश्यकता है।क्योंकि वह रस्सी किसी भैंस के गले में बंधी हुई थी।ऐसा था हमारे पुराने जमाने के वैद्यों का ज्ञान।          पुरा