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नारद का महल मोह

gsirg.com नारद का महल मोह
      मित्रोंआज हम तुम्हे भारतीय धर्म ग्रन्थों से सम्बन्धित एक दिलचस्प कहानी बताने जा रहे हैं, हमे आशा ही नही पूर्ण विश्वास है कि यह कहानी आपका पूरा मनोरंजन करेगी।       एक बार देवर्षि नारद को तीनो लोकों का भ्रमण करते हुए मन मे ख्याल आया कि मै तो सभी देवी देवताओं के पास भ्रमण करके पहुँचता ही रहता हूँ। सभी के पास सभी सुख सुविधाओं से युक्त ऊँचे ऊँचे विशालकाय महल हैं। उनके मन में यह भी आया कि भगवान् श्रीकृष्ण के पास भी तो बहुत महल आदि हैं ही,यदि वे एक- आध हमको भी दे दें तो हम भी यहीं आराम से टिक जायें, नहीं तो इधर-उधर घूमते रहना पड़ता है। भगवान् के द्वारिका में बहुत महल थे।
      यही विचार करते करते नारदजी पहुँच गये द्वारिकापुरी और भगवान् से कहा," भगवन् ! आपके पास तो बहुत से महल हैं, एक हमको भी दो तो हम भी आराम से यहीं रहें। आपके यहाँ साथ रहने के अलावा यहीं खाने- पीने का भी इंतजाम अच्छा ही है ,सो मेरा शेष जीवन भी आराम से कट जायेगा। "
      भगवान् सोंच मे पड़ गये कि यह मेरा परमभक्त है, विरक्त संन्यासी है। अगर मैंने इसे महल दे दिया और  अगर कहीं यह राजसी ठाठ…
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नवयुवको मे बढता नशे का दौर

gsirg.com नवयुवको मे बढता नशे का दौर आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। नवयुवकों में नशे की लत बढ़ती ही जा रही है।नवयुवतियां भी नवयुवकों के साथ कदमताल मिला रही हैं।वाइन,रम,विह्सकी और गाँजा की चिलम की लत विशेष रूप से बढ़ी है।शादी-पार्टी में डांस करने वाले 90% लड़के अंग्रेजी शराब के नशे में होते हैं।और खूब धमाल मचाते हैं।बाइक पर बैठकर गुटखे को दाँत से कुतर कर बड़ी शान से फंकी मारकर बाइक को हवाई जहाज बनाना इनकी आदत में शुमार है।लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों से आगे रहती हैं।फिर यह क्षेत्र अछूता कैसे रह जाता।इस क्षेत्र में भी लड़कियां लड़कों से पीछे कहाँ हैं? शराब पीने का केवल बहाना होना चाहिए।खुशी है तो भी सेलीब्रेट करने के लिए अंग्रेजी शराब की पार्टी होना जरूरी है।गम हो तो गम कम करने के लिए शराब की पार्टी होना जरूरी है।खुशी के मौके पर ज्यादा प्याले छलकते हैं।बिना शराब के कैसी खुशी ? नये लड़के और लड़कियों में नशे की लत बढ़ती ही जा रही है।सिगरेट के धुएं के लच्छे उड़ाना इनकी शान में शामिल है।हर फिक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया।गुटखा,सिगरेट, वाइन,रम,विह्सकी के पैग पर पैग गटकना हर वर्ग की पार्टी में फैशन बनता…

सिमटते जंगल , हिंसक होते जीव जन्तु

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सिमटते जंगल , हिंसक होते जीव जन्तु 
आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। भारत देश की राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता का मानक,मानक स्तर  से मारक स्तर तक जा पहुंची है।लोग बढ़ रहे हैं,पेड़ घट रहे हैं।कल कारखाने बढ़ रहे हैं।पेट्रोल/ डीजल चालित वाहन बढ़ रहे हैं।प्रदूषण स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।लोग बीमार पड़ रहे हैं।भारत में भगवान ने खूब प्राकृतिक सम्पदा दी है।कोई कंजूसी भगवान नें प्राकृतिक सम्पदा देने में नहीं की है।दोनो हाथों से लुटाया है।वन सम्पदा का ह्रास कुछ तेजी से हुआ है विगत दो दशकों में।वन सम्पदा खोने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।असंतुलित बारिश, बेमौसम बरसात, का असर कृषि पर पड़ता है।70% कृषक अन्नदाता मुश्किल में पड़ जाता है।वन सम्पदा का दोहन घटा कर सरकारी भूमि पर वृक्षारोपण का अभियान चलाना होगा।वरना वह दिन दूर नहीं जब बच्चों के लिए शुद्ध वायु के लिए आक्सीजन सिलिण्डर भी खरीदना पड़ेगा।वन क्षेत्र सिमटता जा रहा है।वन्यजीवों को रहने के लिए हमने छोड़ा ही क्या है?जंगल कट रहे हैं।वाहनों का शोर ध्वनि प्रदूषण बढ़ा रहा है साथ में वायु प्रदूषण भी।ऐसे वातावरण में वन्यजीवों का रहना म…

सिमटते जंगल, हिंसक होते जीव - जन्तु

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सिमटते जंगल , हिंसक होते जीव जन्तु  आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। भारत देश की राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता का मानक,मानक स्तर  से मारक स्तर तक जा पहुंची है।लोग बढ़ रहे हैं,पेड़ घट रहे हैं।कल कारखाने बढ़ रहे हैं।पेट्रोल/ डीजल चालित वाहन बढ़ रहे हैं।प्रदूषण स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।लोग बीमार पड़ रहे हैं।भारत में भगवान ने खूब प्राकृतिक सम्पदा दी है।कोई कंजूसी भगवान नें प्राकृतिक सम्पदा देने में नहीं की है।दोनो हाथों से लुटाया है।वन सम्पदा का ह्रास कुछ तेजी से हुआ है विगत दो दशकों में।वन सम्पदा खोने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।असंतुलित बारिश, बेमौसम बरसात, का असर कृषि पर पड़ता है।70% कृषक अन्नदाता मुश्किल में पड़ जाता है।वन सम्पदा का दोहन घटा कर सरकारी भूमि पर वृक्षारोपण का अभियान चलाना होगा।वरना वह दिन दूर नहीं जब बच्चों के लिए शुद्ध वायु के लिए आक्सीजन सिलिण्डर भी खरीदना पड़ेगा।वन क्षेत्र सिमटता जा रहा है।वन्यजीवों को रहने के लिए हमने छोड़ा ही क्या है?जंगल कट रहे हैं।वाहनों का शोर ध्वनि प्रदूषण बढ़ा रहा है साथ में वायु प्रदूषण भी।ऐसे वातावरण में वन्यजीवों का रहना म…

मौसम और आधुनिकता पर भारी कुम्भ में आस्था की दो डुबकी

gsirg.com मौसम और आधुनिकता पर भारी कुम्भ में आस्था की दो डुबकी  आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।            हमारे भारत देश धर्म प्रधान देश रहा है।हमारे आदर्श,हमारी सभ्यता, हमारी नैतिकता विश्व के मानचित्र में सबसे अलग पहचान रही है।सैकड़ों सालों तक मुगलों ने हमारी संस्कृति, धर्म,आस्था पर चोट दर चोट दी पर कामयाब नहीं हुए।हमारी श्रद्धा, भक्ति, आस्था की जड़ें इतनी गहरी हैं कि मिटाना तो दूर डिगाना भी आसान नहीं है।हिन्दुस्तान हिन्दू बाहुल्य देश है।इसके बाद तीन शतक वर्ष तक लगभग अंग्रेजों ने भी जड़ें हिलाने की कोशिश की परन्तु धर्म परायण मंगल पाण्डे ने सशत्र क्रांति की शुरुआत कर पहले सेनानी होने का गौरव हासिल किया था।अंंग्रेजों ने भी अनेको प्रलोभन, दण्ड, नारकीय यातनाएं देकर लोगों को धर्म से डिगाने के प्रयत्न किए पर असफल रहे।          मौसम और आधुनिकता पर श्रद्धा और आस्था की डुबकी भारी है।मकर सक्रांति पर अकेले संगम तट पर लगभग सवा दो करोड़ लोगों ने स्नान, दान किया।कल पौष पूर्णिमा की पावन डुबकी के रूप में दूसरा पवित्र गंगास्नान,संगम स्नान, कल्पवास की शुरुआत भी कल से होगी जो एक महीने चलेगी।कल्पवासी एक महीने त…

" स्टैच्यू आफ यूनिटी " दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
कभी दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति अमेरिका के "स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी"को दर्जा प्राप्त था।अब दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति गुजरात, भारत के नाम दर्ज हो गई है।इसका नाम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी"दिया गया है।इसकी ऊंचाई182 मीटर है।इसके लिए नरेन्द्र मोदी सरकार अवश्य ही बधाई की पात्र है।जिसने भारत के नाम एक विश्व कीर्तिमान दर्ज कराया है।
समाचार पत्रों में इसके प्रचार-प्रसार के लिए 2.6 करोड़ खर्च होने का समाचार छपा था जिसे एक आर.टी.आई ऐक्टिविस्ट के जबाब में सम्बन्धित मंत्रालय ने उत्तर में बताया था।सरकार की यह फिजूलखर्ची नहीं तो क्या है?मूर्ति के आसपास मलिन और गरीब होने का समाचार भी मुद्रित था।यदि यहीं रकम उन गरीब बस्ती का कायाकल्प किया जा सकता था।इससे सरकार की कीर्ति और बढ़ती।देशवासियों के खून-पसीने से कमाई रकम जो टैक्सों के रूप में सरकारी खजाने में जमा की जाती है।यदि इसी रकम से उन आसपास के गरीब लोगों की रोटी का प्रबंध, उनके बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करके उनकी गरीबी दूर की जा सकती थी।जिससे उस रकम के उपार्जन करने वालों को तथा मोदी …

कृषक और कृषि यंत्र

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
भारत में 70% लोगों का मुख्य पेशा कृषि है।70% लोग अन्नदाता और किसान भगवान हैं।सवा अरब जनसंख्या का पेट यहीं 70% अन्नदाता भरते हैं।इसके अतिरिक्त विदेशों में अन्न निर्यात के द्वारा दुनिया के अन्य लोगों का भी पेट भरने का काम यहीं 70% किसान भगवान ही करते हैं।
किसानों का परम्परागत कृषि यंत्र देशी हल ,मिट्टी पलट हल अब केवल म्यूजियम में रखने वाले ही हैं।अब किसी किसान के पास बैल ही नहीं हैं तो हल का क्या काम?अब लगभग सभी किसानों की किसानी ट्रैक्टर पर आधारित है।जुताई से लेकर कटाई, मड़ाई तक सारा कार्य ट्रैक्टर आधारित ही है।कभी बैलगाड़ियों से बारात और मेला लोग आते जाते थे।अब यह सवारी गाड़ी केवल कृषि विज्ञान की किताबों तक ही सीमित होकर रह गई है।अब कोई किसान बनना ही नहीं चाहता।कभी यह कहावत मशहूर थी---"उत्तम खेती मध्यम बान।निकृष्ट चाकरी भीख निदान।।"अब चाकरी अर्थात सरकारी नौकरी प्रथम पसंद बनी हुई है।बैलगाड़ी, देशी हल,मिट्टी पलट हल केवल कृषि विज्ञान की किताबों तक ही सीमित होकर रह गए हैं।कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र भी किसानी से मुँह मोड़ चुके हैं।कोई किसानी क…