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यौन अपराधो की बाढ़

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आदरणीय सम्पादक जी                               सादर प्रणाम       कभी भारत में नारी शक्ति की पूजा की जाती थी। नवरात्रि में आज भी कुंवारी कन्याओं को भोजन और मां दुर्गा के रूप में पूजा अर्चना करने का विधान है। हमारे यहां बहुत पहले से ही नारी को आत्मरक्षा हेतु शस्त्र शिक्षा दी जाती रही है। इतिहास गवाह रहा है कि रानी लक्ष्मीबाई,दुर्गावती ने युद्ध भूमि में शत्रुओं से जमकर लोहा लिया और शत्रुओं के दांत खट्टे कर दिए।          आजकल महिला यौन उत्पीडन की बाड़ ही आ गई है। ऐसा तो मेरा भारत कभी नहीं था।तेलंगाना कार्ड के चारों अभियुक्तों के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने से खुशी का माहौल है।        दूसरी तरफ उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के मृत्यु के समाचार से लोग गहरे सदमें में हैं।डा0प्रियंका रेड्डी पशु चिकित्सक की आबरूरेजी और कत्ल केस के अभियुक्तों को पुलिस ने एनकाउंटर में मारे गिराया।जिससे सारे देश में खुशी का माहौल है।         सोशल मीडिया में सारी पोर्न वेबसाईट्स को बन्द करने की जरूरत है। फिल्म निर्देशकों को देश हित में मसाला फिल्मों के निर्माण से थोड़ा करना चाहिए। चरित्र निर्माण वाली फ…
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जहरीला होता प्रर्यावरण

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आदरणीय सम्पादक जी                                सादर प्रणाम        भारत हमेशा से ही श्रषि, मुनियों,का देश रहा है।इस देश की धरती ने श्रीराम, श्रीकृष्ण भगवान को जन्म देने वाली माटी होने का गौरव हासिल किया है।आज भी 125 अरब लोगों का प्यारा हिन्दुस्तान विश्व गुरू बनने की राह पर अग्रसर है। ईश्वर ने भारत को प्राकृतिक सम्पदा देने में कोई कमी नहीं की है।
              कभी भारत की हवा सुगंधित हुआ करती थी।पेड़, पौधे, लताओं, बेलों फूलदार पौधों, औषधीय गुणों से युक्त पौधों से गुजर कर आनेवाली हवा भारतीयों तथा पशु-पक्षियों की सेहत,बल-पौरुष में निरंतर वृद्धि करती रहती थी।इसी कारण शायद यह कहावत बनी होगी कि शहर की दवा से ज्यादा फायदेमंद देहात की हवा होती है।          शुद्ध हवा देने के खजाने पीपल ,बरगद100%नीम 75% के रूप मैं प्रकृति के पास मौजूद है।वनक्षेत्र जितना ज्यादा संकुचित होता जा रहा है।उतना ही ज्यादा मानव जीवन संक्रमित होता जा रहा है। विकास के नाम पर 4 लेन,6 लेन रोडो में लाखों पेड़ काटे जा रहें हैं। परिणाम स्वरूप जहरीली हवा,वायुप्रदूषण के रूप में सामने मुंह बाए खड़ी है।           …

सिंगल यूज प्लास्टिक पशुओं और मानवों के लिए घातक

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आदरणीय सम्पादक जी                               सादर प्रणाम            सिंगल यूज प्लास्टिक को बैन करके सरकार ने निश्चित ही बहुत अच्छा निर्णय लिया है।यह सरकार का दूरदर्शी और सूझ-बूझ से भरा निर्णय ही कहा जाएगा।             प्रतिबंधित होने के बावजूद भी लोगों के इसके मोहपाश में जकड़े होने के प्रमाण मिल ही जाते हैं।लोगों को इधर-उधर पन्नी लटकाए घूमते आसानी से देखा जा सकता है।लोगों का पन्नी प्रेम से उबर पाना आसान नहीं है।           यह प्लास्टिक, एक ऐसी अजर-अमर तत्व या वस्तु है,जो सैकड़ों सालों तक यह नष्ट नहीं होती।इसमें किसी भी तरह का खाद्य पदार्थ नहीं चाहिए।क्योंकि इसके मिश्रण से खाद्य पदार्थ जहरीले हो जातें हैं।         गरम सब्जी, चाय आदि कभी भी नहीं रखने चाहिए।पन्नी में भरकर फलों के छिलके आदि भरकर कूड़ेदानों में नहीं फेंकना चाहिए।इन्हीं पन्नियों को खाकर जानवर ज्यादा मरते हैं।          प्रकृति के जलीय जीव जैसे कछुये और मछलियों आदि की मौत भी अजर-अमर तत्व प्लास्टिक को खाकर ही होती हैं।जलाने पर भी वातावरण को प्रदूषित करके जहरीला बनाती है।दमा,स्वांस,एलर्जी जैसी बीमारियां भी अधिक ह…

करतारपुर कारीडोर पर पाकिस्तान की पैंतरेबाजी

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आदरणीय सम्पादक जी                                 सादर प्रणाम        लगभग 550 वर्ष पूर्व अविभाजित भारत के गुरुद्वारा ननकाना साहिब में सिखों के प्रथम गुरू नानकदेव जी का जन्म हुआ था।तत्कालीन समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए नानकदेव जी नें समाज सुधार का कार्य किया था।उनकी शिक्षा आज भी प्रासंगिक हैं।            आपका जन्म स्थल सिखों के लिए सबसे बड़े तीर्थस्थल के रूप में विख्यात है।सरकार ने करतारपुर से ननकाना साहिब तक एक कारीडोर का निर्माण किया है।पाकिस्तान और भारत सरकार अपने-अपने हिस्से की जमीन पर सड़क निर्माण भी करवा लिया है।अब केवल यात्रा ही शुरू होना बाकी है।             पाकिस्तान अपने चिरपरिचित अन्दाज में रोड़े अटकाने का काम जारी रखे हुए हैं।इमरान सरकार कोई भी वैध पहचान पत्र होने की बात कह रही है।जबकि पाक सेना पासपोर्ट होने को जरूरी बता रही है।सिखों की धार्मिक भावना और आस्था पर आघात किया जा रहा है।20 डालर का आस्था शुल्क भी पाकिस्तान वसूलना चाहता है।जो सिखों की धार्मिक और आस्था पर कुठाराघात है।             पाकिस्तान हमेशा की तरह इस बार भी अपनी पैतरेबाजी से बाज नही…

खतरनाक होती हवा

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आदरणीय सम्पादक जी                                सादर प्रणाम         हवा जहरीली होती जा रही है।औसत आयु घटती ही जा रही है।सांस लेना दूभर होता जा रहा है।दमा,एलर्जी, सांस,खांसी रोग बढ़ते ही जा रहे हैं।अभी तक केवल दिल्ली की ही हवा जहरीली थी। लेकिन अब तो लखनऊ, हापुड़,बनारस,गाजियाबाद भी जहरीली हवा यानि वायु प्रदूषण की चपेट में है।         कल कारखानों की जहर उगलती चिमनियों, ईंट भट्ठों की जहर उगलती चिमनियों तथा डीजल/पेट्रोल के जहर उगलते साइलेंसरों का जहरीला धुँआ और पर्यावरण को संतुलित कारक पेंड़ों का कटना ही अधिक जिम्मेदार है।           हरियाणा, पंजाब, उ०प्र०के किसानों द्वारा पराली जलाना भी जिम्मेदार है।धुँआ भी देशभक्त होता जा रहा है।पंजाब/हरियाणा का पराली जलाने का धुआंं पाकिस्तान जाने के बजाय दिल्ली में ही डेरा डाल देता है।धुंआ भी पाकिस्तान से घृणा करता है।किसानों को पराली जलाने के अपराध में सजा/जुर्माना द्वारा दंडित भी किया जा चुका है।सम/विषम योजना भी दिल्ली के प्रदूषण रोंकने में सहायक नहीं सिद्ध हो रहा है।         वह दिन दूर नहीं जब भावी पीढ़ी को सांस लेने के लिए आक्सीजन सिलिंड…

प्राइवेट हाथों में पलता फूलता विद्युत उद्योग

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आदरणीय सम्पादक जी                               सादर प्रणाम         विद्युत, चपला, चंचला यथा नाम तथा गुण।कब आए,कब जाए कुछ भी पता नहीं।केन्द्र सरकार ने हर घर बिजली के लिए सौभाग्य योजना चलाई जो निश्चय ही स्वागतयोग्य कदम है।अंधेरे को मिटाकर उजाला फैलाना ही सरकार का एकमात्र उद्देश्य है।           केरोसिन(मिट्टी का तेल)का सस्ते गल्ले की दूकानों से मिलना बंद हो गया है।एक तरफ सरकार अंधेरा मिटाने को कृत संकल्प है।दूसरी तरफ प्राइवेट हाथों में फलता-फूलता विद्युत उद्योग सरकार के उद्देश्यों पर पलीता लगा रहा है।           सरकार अगर10घरों में उजाला फैलाने का प्रयास कर रही है तो दूसरी तरफ प्राईवेट फर्मों वाले बकाया बिल के नाम पर 12 घरों की बिजली का कनेक्शन काट रहे हैं।कुल मिलाकर सरकारी बिल यदि 2-3 हजार का आता था तो अब प्राइवेट संस्था द्वारा वहीं बिल 30-40 हजार का आता है।           जनता बिजली के नाम पर लुट रही है।केरोसिन भी कहीं नहीं मिल रहा है।गरीब का झोपड़ा आज भी अंधेरे में डूबा हुआ है।सरकार इनके घर में भी उजाला लाने का प्रयास करें।बिल के नाम पर प्राइवेट फर्मों के मकड़जाल से मुक्त करा…

प्रकाशपर्व दीपावली के दिव्य मिट्टी के दिये

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आदरणीय सम्पादक जी
                               सादर प्रणाम        दीप पर्व दीपावली सिरीज का पहला पर्व करवा चौथ आज दि०17-10-2019 को पड़ रहा है।इस दिन हिन्दू सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत करती हैं।तथा चन्द्रोदय होते ही चन्द्र देवता की पूजा आराधना के पश्चात पारायण करती हैं।पति की लम्बी उम्र की कामना करती हैं।
        भारतीय मतानुसार यहीं से शीत ऋतु का आगमन भी माना जाता है।करवा चौथ और दीपावली का गहरा सम्बंध है।एक उक्ति है---**करवा हैं करवाली वहिके बरहें रोज दिवाली।**         दीपावली में शास्त्रों की दृष्टि से मिट्टी के दियों का ही महत्व है।लक्ष्मी पूजन मिट्टी के दिये जलाने से ही शुभ है।तेल जलने से वातावरण की शुद्धि होती है।विधान तो देशी घी जलाने का है।आज भी प्रतीक स्वरूप हर घर में पाँच देशी घी के दिये जलाए जाते हैं।       मिट्टी के दिये खरीदने से किसी गरीब कुम्हार के घर में भी दीप जलने का आप प्रबंध करेंगे।वह भी हंसी-खुशी दीपावली मनाएगा।बिजली के बल्ब से रोशनी तो जरूर होगी लेकिन वातावरण शुद्धि से वंचित रहना पड़ेगा।प्रकाश ज्ञान का पर्याय माना गया ह…