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भारत का वामपंथ देश - विरोधी विचारधारा

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आदरणीय सम्पादक जी                                  सादर प्रणाम        बाम पंथ शुरू से ही भारत विरोधी विचार धारा रही है। जेएनयू, एएमयू, जामिया मिल्लिया,नदवा कालेज, जादवपुर विश्वविद्यालय तथा इनके छात्रावास भारत विरोधी कार्यों में रत रहते हैैं।             समय-समय पर कुख्यात आतंकियों के आवास भी इन्हीं छात्रावासों से पकड़े गए हैं।छात्रों राजनीति में बाम पंथ का दखल कतई उचित नहीं है।बाम पंथ विचार धारा जबरदस्ती छात्र जीवन में घुसेड़ना देश और छात्र हित में नहीं है।इससे गरीब छात्रों का भविष्य ज्यादा प्रभावित होता है। टुकड़े-टुकड़े गैंग का लीडर कन्हैया कुमार इसी फैक्ट्री की उपज है।          ए0एम0यू0 राजा दिलीप सिंह की जमीन पर बना था। लेकिन आज भी मुहम्मद अली जिन्ना का लगा फोटो राष्ट्र विरोधी मानसिकता का परिचायक है। यहां हमेशा से ही भारत विरोधी गतिविधियां संचालित होती रही हैं। बाम पंथ और ईसाई मिशनरियों ने जबरदस्ती या यह संस्था के कुछ भारतीय काफी समय से प्रलोभनवश धर्म परिवर्तन के कार्यों में लगे हुए हैं।            केरल इसका जीता-जागता उदाहरण है।इस्लाम+ईसाई+बाम पंथ हमेशा से ही भारत…
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मकर संक्रान्ति और सेहत से जुड़ाव

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आदरणीय सम्पादक जी                                  सादर प्रणाम          मकर संक्रान्ति का सीधा और सहज सम्बंध पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से है।यह पर्व हमेशा से ही 14-15 जनवरी को ही मनाया जाता है।नक्षत्र विज्ञान के अनुसार इसी दिन सूर्य देवता धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।            इसी दिन से भगवान भास्कर उत्तरायण हो जाते हैं। महाभारत कालीन घटना के अनुसार उत्तरायण सूर्य में मृत्यु होने पर सीधा स्वर्ग मिलता है। भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के वरदान के कारण इसी सूर्य देवता के उत्तरायण होने का इंतजार किया था।           पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन गंगा माता को धरती पर अवतरित कराने वाले भगीरथ ने कपिल मुनि के आश्रम से गंगा जी को अपने सगर के पुत्रों का तर्पत किया था। गंगा माता सागर में विलीन हो गयी थीं।इसीलिए**सारे तीर्थ बार-बार,गंगा सागर एक बार।**गंगा स्नान और दान तथा खिचड़ी का विशेष महत्व है।         नाथ परम्परा की पीठ गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में पहली खिचड़ी नेपाल के राजा की चढ़ती है।इस समय गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर श्री आदित्य नाथ "योगी ज…

शीत के कारण थम गई जिन्दगी

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आदरणीय सम्पादक जी                                सादर प्रणाम        शीत ऋतु मानों सब कुछ जमा देने पर अमादा है।मानव जीवन थम सा गया है।पारा निरंतर शून्य की ओर अग्रसर है।सबसे बुरी हालत पशु-पक्षियों की है। रफ़्तार का पहिया जाम सा हो गया है। झुग्गी-झोपड़ियों वाले तथा गोमती नदी के पुल पर सोने वाले लोगों की करता दशा होगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।                सरकारी अलाव और रैन बसेरों की व्यवस्था नाकाफी है।लोग घरों में दुबकने पर मजबूर हैं।सीमा पर निगरानी करने वाले सैनिकों तथा रात्रि गश्त करने वाले सिपाहियों की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल है।इस हांड़ कंपा देने वाली ठंड में बिचारे सिपाहियों, सैनिकों की करता हालत होगी? मजबूरी में ड्यूटी तो देते ही होंगे। लेकिन उनकी दशा खराब होना लाजिमी है।             पहाड़ों से ज्यादा इस बार मैदानी इलाकों की हालत गंभीर है।सूर्य देवता भी शीत के आगे नतमस्तक हैं।कुहरा सितम ढ़ा रहा है।सूर्य देवता को कुहरा और पाला ने आच्छादित कर रखा है।बूढ़े और बच्चों की बहुत बुरी दशा है। निर्धन और असहायों की हालत बहुत बुरी है।           सभी प्रकृति के सित…

जो शहीद हुए हैं, उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी ।

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आदरणीय सम्पादक जी                                   सादर प्रणाम          स्वाधीनता संग्राम चल रहा था। क्रांतिकारियों के दिल में भारतमाता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने की भावना हिलोरें मार रही थी। आजादी के दीवानों के दिलों में कुछ कर गुजरने की तमन्ना बलवती होती जा रही थी।पूरे हिन्दुस्तान में यत्र-तत्र-सर्वत्र क्रांतिकारियों के द्वारा क्रांतिकारी घटनाएं घटित की जा रहीं थी।        ऐसे माहौल में रायबरेली भला कहां पीछे रहने वाला था।राना बेनी माधव के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर भाग ले रहा था।           धन्य है री तू सेहगों की माटी मातृभूमि पर बलिदान होने के लिए दो अमर शहीद सहित तीन क्रांतिकारियों को जन्म दिया।          सन् 1921ई0में अमर शहीद श्री राम औतार तथा शालिकराम नें सेहगों के तालुकेदार के दो सिपाहियों को मृत्यु के घाट उतार दिया और तीन सिपाहियों को घायल करके अधमरा कर दिया।          श्री राम औतार की मां जिन्हें कलक्टराइन कहा जाता था,अपनी दूध की सौगंध देकर सिपाहियों को मारने को कहा था।तथा अदालत में झूठ न बोलने को कहा था।              राम औतार और शालिकर…

गलन भरी सर्दी , ठिठुरन भरी हवाऐं

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आदरणीय सम्पादक जी                                सादर प्रणाम         रिकार्ड बनते ही हैं टूटने के लिए।हर साल शीत ऋतु में नये रिकार्ड बनते हैं और पुराने रिकॉर्ड टूटते हैं।इस साल भगवान कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। गरीबों और असहायों,तथा घुमंतू परिवारों को सर्दी से जमा देने पर तुले हैं। हमारे यहां प्रयास लगने पर ही कुआं खोदने का चलन रहा है।          सरकार ने रैन बसेरों पर आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।तथा प्रमुख चौराहों पर अलाव जलाने के निर्देश दिए हैं।पर सर्दी के सितम के आगे सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।शीत ऋतु बूढ़े डंगर पशुओं तथा वृद्ध जनों की सफाई के लिए ही आती है।              एक प्रसिद्ध कहावत है___"लरिकन से हम बोलित नाहीं,ज्वान लगै संग भाई।बुढ़वन का हम छोंड़ित नाहीं, चहै ओढ़ैं सात रजाई।"शीत ऋतु में लेह, लद्दाख क्षेत्र में जहां माइनस 29 डिग्री सेल्सियस तापक्रम इस समय है। वहां हमारे सेना के जवान मुस्तैदी से सीमाओं की पहरेदारी करते हैं। उनके शौर्य,वीरता और पराक्रम के कारण ही हम अपने घरों में सुख पूर्वक ही रजाई ओढ़कर आराम से सोते हैं।         …

भारत और पाकिस्तान के वैज्ञानिकों मे अन्तर

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आदरणीय सम्पादक जी                                सादर प्रणाम        कभी भारत और पाकिस्तान हिन्दुस्तान का ही हिस्सा हुआ करते थे। आजादी के तुरंत बाद बंटवारे के परिणाम स्वरूप पाकिस्तान का जन्म हुआ था।तब से अब तक दोनों देशों के बीच प्रतिद्वंदिता बदस्तूर जारी है।         भारत के परमाणु वैज्ञानिक श्री अब्दुल कलाम जी "मिसाइल मैन"के रूप में प्रसिद्ध होकर भारत के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति के पद पर सुशोभित हुए। भारत में आज भी इन्हें आदर के साथ याद किया जाता है।          आज दि०25-12-2019 को लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई जी का जन्म दिन है।श्री अटल बिहारी बाजपेई जी ने ही श्री अब्दुल कलाम जी को राष्ट्रपति पद पर सुशोभित किया था।श्री अटल बिहारी बाजपेई जी तथा श्री अब्दुल कलाम जी को भारत का युग पुरुष कहा जाय तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।             दूसरी तरफ पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक श्री अब्दुल कादिर खान जी को परमाणु प्रसार के आरोप में अपने ही देश पाकिस्तान के इस्लामाबाद में नजरबंद की स्थिति में जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ रहा है।इन्हें किसी से भी मिलने-जुलने क…

भारत में दंगों की गन्दी राजनीति

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आदरणीय सम्पादक जी                                 सादर प्रणाम        हमारे भारत महान में वोट बैंक की गन्दी राजनीति के लिए कुछ विपक्षी राजनीतिक दलों के द्वारा दंगों की गन्दी राजनीति अक्सर की जाती रही है। धार्मिक उन्माद फैला कर देश की गरीब जनता को दंगों की आग में झोंक देने की पुरानी परंपरा रही है।इस समय भी यहीं परम्परा अपनाई जा रही है। नागरिक संशोधन बिल के नाम पर देश को दंगों की गन्दी राजनीति में झोंक दिया गया है।                कुछ राजनीतिक दल इसके नाम पर आज भी देश को इस गन्दे खेल में उलझा रखा है।रेहड़ी,खोमचे वालों को,रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी छीनने का प्रयास किया जा रहा है।दंगों की आड़ में राष्ट्रीय सम्पत्ति को आग के हवाले कर रहे हैं।यह स्वस्थ राजनीति कतई नहीं कही जा सकती है। विरोध व्यक्त करने का यह तरीका नाजायज है।          लाखों लोगों की रोजी-रोटी हरी जा रही है। छात्रों की परीक्षाएं स्थगित की जा रही हैं। देश की प्रगति इस गन्दी परम्परा से बाधित की जा रही है।मात्र 17%अल्पसंख्यकों के वोट बैंक के लिए 83% जनता के साथ अन्याय किया जा रहा है।               लोकसभा और राज्यस…