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कठिन रोगों के सरल इलाज भाग एक

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कठिन रोगों के सरल इलाज भाग 01
मेरे विद्वान पाठकगणों आज हम आपको कुछ ऐसे कठिन लोगों की चिकित्सा करने के सरल उपाय बताने जा रहे हैं | जिसको जानकर आप आसानी से उन परेशानियों को दूर कर सकते हैं | यहां पर आज हम कुछ ऐसे नुस्खे बताएंगे , जिनका उपायोग करके आप आसानी से आसपास की चीजों से ही सफलतापूर्वक कर सकते हैं | अपनी परेशानी दूर करने के साथ ही आप , अपने परिचितों का भी आसानी से इलाज कर सकते हैं |
\\\ होठों का फटना \\\
सर्दियों में अक्सर लोगों के होठ वातावरण की नमी के कारण फटने लगते हैं | तथा होंठों के दो फटे स्थानों के बीच पपड़ी पड़ जाती है | जिसे लोग प्रायः दांतो से कुतरते रहते हैं | ऐसा करने से उनकी परेशानी घटने के स्थान पर बढ़ती ही चली जाती है | इसके उपचार के लिए आप यह तरीका अपनाएं |
उपचार
आप सभी से एक छोटी सी शीशी का प्रबंध करें और उसमें सरसों का तेल भर ले | इस बात का ध्यान रखें कि व्यापारिक सरसों का तेल प्रयोग न करें , केवल विश्वसनीय जगह से कोल्हू से पेर कर निकाला हुआ तेल ही उपयोग में लायें | तेल को इस शीशी में भरने के बाद इसे सुटक्षित रखें |
सुबह प्रातः उठकर नित्य क्रिया से निवृत होकर नहाने से पहले अपने हाथ की तर्जनी उंगली को इस तेल में डुबोकर , उंगली पर लगा हुआ तेल अपनी नाभि में लगाएं | इस शीशी को हरदम अपने पास ही रखें | दिन में तीन चार बार या जितनी बार हो सके इस तेल को नाभि पर लगाया करें | लगभग 3 या 4 दिन के बाद आपके होठों की खुश्की दूर होनी शुरू हो जाएगी , और इसके नियमित रूप से लगते रहने से धीरे-धीरेहोंठ फटना बिल्कुल ही बंद हो जाएंगे | शीशी अगर 3 से 5 मिली की है तो उसे आपको अपने पास रखने में कोई दिक्कत भी नहीं होगी | यह इलाज किसी भी लिप ऑइंटमेंट से कई गुना बेहतर है | और शीशी छोटी हो तो पास रखने में भी सुविधा रहती है |

[ कुछ अन्य रोगों के विषय में जानने के लिए भाग दो अवश्य देखें ]
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