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Showing posts from 2018

नव वर्ष मे सपनों का भारत

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।अंग्रेजी कैलेण्डर का नव वर्ष 2019 का आगमन हो चुका है।आओ इस नव वर्ष 2019 का स्वागत करें।नव वर्ष 2019 में कामना है कि नूतन वर्ष 2019 में कहीं कोई अपराध न हो।कोई बलात्कार न हो।कहीं कोई दहेज़ हत्या न हो।किसी कुंवारी से छेड़छाड़ न हो।किसी की किसी बीमारी से मौत न हो।धर्म का उत्थान हो।अधर्म का नाश हो।सभी सुखी हों।दुःख का अंत हो।सभी निरोगी हों।सभी स्वस्थ हो।किसी का किसी से बैर न हो।किसी का किसी से कोई वैमनस्यता न हो।सबको सबसे प्यार हो।संस्कारों की वृद्धि हो।रिश्तों नातों का सम्मान हो।त्रय ताप से मुक्ति हो।अकाल मृत्यु से मुक्ति हो।न दुःख हो हमें हम न दुःख दें किसी को।सभी प्राणियों में सदा प्रेम होवै।नव वर्ष में बस यहीं कामना है।प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

स्वगात है नववर्ष ( 2019 ) तुम्हारा

अंग्रेजी कैलेण्डर वर्ष 2019 आपके एवं आपके परिवार का दामन खुशियों से भर दे।सदैव सुख ही सुख बरसे।सभी स्वस्थ और निरोग रहें।आप नित नये उंन्नति के सोपानों पर चढ़ते हुए सर्वोच्च शिखर पर विद्यमान हों।शुभ 2019 प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

शुभ विदाई 2018 &अलविदा

GSirg.com  शुभ विदाई 2018 &अलविदा    आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। अलविदा 2018 आज तुम जाने वाले हो।तुमनें बहुतों को हंसाया, रुलाया।कहीं खुशी कहीं गम दिया।भारत को नभ,थल,जल में परमाणु सम्पन्न बनाया।बिजली,सिंचाई,दवाई, जन सुनवाई में भारत को सम्पन्न बनाया।किसी को नौकरी दिया।किसी को 2019 देखना भी नसीब नहीं हुआ।    अब आपको भावभीनी विदाई। अलविदा 2018  प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

अलविदा 2018

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।अलविदा 2018 आज तुम जाने वाले हो।तुमनें बहुतों को हंसाया, रुलाया।कहीं खुशी कहीं गम दिया।भारत को नभ,थल,जल में परमाणु सम्पन्न बनाया।बिजली,सिंचाई,दवाई, जन सुनवाई में भारत को सम्पन्न बनाया।किसी को नौकरी दिया।किसी को 2019 देखना भी नसीब नहीं हुआ।   अब आपको भावभीनी विदाई।अलविदा 2018 प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

प्राइमरी स्कूल बनाम पब्लिक स्कूल

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।प्राइमरी शिक्षा पर सरकार दिल खोल कर खर्च कर रही है।बच्चों को लुभाने के लिए एम.डी.एम. जैसे अनेकों प्रलोभन देनें के बावजूद भी परिणाम ढ़ाक के तीन पात वाली कहावत ही चरितार्थ हो रही है।लोगों का प्राइमरी शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों से मोहभंग होता ही जा रहा है।लोग अपने बच्चों का एडमीशन पब्लिक स्कूल, कान्वेंट स्कूल में ही लेना पसंद कर रहे हैं।प्राइमरी स्कूलों का शिक्षा का स्तर गिरता ही जा रहा है।केवल बिल्डिगें ही शानदार बनती जा रहीं हैं।शिक्षा बदहाल होती जा रही है।इन शिक्षकों के सापेक्ष पब्लिक स्कूल के शिक्षिकाओं एवं शिक्षकों का वेतन में जमीन-आसमान का अंतर है।और परीक्षा परिणामों में भी जमीन-आसमान का अंतर है।जहां सरकारी स्कूलों के शिक्षक/शिक्षिकाओं का वेतन 40-42हजार रुपये है।वहीं पब्लिक स्कूल के शिक्षक/शिक्षिकाओं का वेतन महज 2-3हजार प्रति महीने है।फिर भी प्रदर्शन 2-3 हजार वालों का ही सर्वोत्तम है। 40-50 हजार रुपये वालों का प्रदर्शन लोकप्रिय नहीं है।लेकिन ऐसा नहीं है कि सरकारी शिक्षक अयोग्य होते हैं।योग्य तो सरकारी वाले पब्लिक स्कूल वालों से ज्यादा होते हैं।लेकिन …

कुपोषण का पोषण

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।भारत में बच्चों तथा महिलाओं में कुपोषण की समस्या काफी सालों से विकराल है।N.R.H.M.के लाख प्रयासों के बावजूद कुपोषण हटाने के प्रयास ना काफी हैं।आंकड़े गवाह हैं कि इतने प्रयासों के बावजूद कुपोषण को समूल नष्ट नहीं किया जा सका है।आपको रेलवे स्टेशन, शहरों,कस्बों, गांवों में कुपोषित बच्चों, महिलाओं की श्रंखला देखी जा सकती है।आयरन की टिकिया भर दे देने से कुपोषण मिटने वाला नहीं है।इन्हें रोज संतुलित भोजन और पौष्टिक आहार की रोज जरूरत है।हमारे भारत देश की 90% महिलाएं और बच्चे आयरन और कैल्शियम की भारी कमी देखी गई है।भारतीय समुदाय को जागृत किए जाने की जरूरत है।कुपोषित माँ से कुपोषित बच्चों के जन्म लेनें की सम्भावना सबसे प्रबल होती है।आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ती के प्रयास सराहनीय और नाकाफी हैं।सरकार से निवेदन है कि युद्ध स्तर पर कैम्प लगाकर रक्त जांच करके इन कुपोषित माँ,बच्चों को के कुपोषण को दूर किए जाने की जरूरत है।ताकि भावी पीढ़ी को कुपोषण मुक्त किया जा सके।कुपोषण को दूर किए बिना स्वस्थ भारत की कल्पना भी बेमानी है।बच्चों और महिलाओं को पकी मिट्टी खाते देखा जा सकता है।य…

सर्वोच्च पंचायत संसद मे माननीयों का प्रदर्शन

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा/राज्यसभा में माननीयों द्वारा नूराकुश्ती लोकसभा/राज्यसभा टी.वी.पर लाइव प्रसारण होनें के कारण माननीयों का नंगा नाच सभी लोग देख रहे हैं।संयुक्त विपक्ष द्वारा जब से एन.डी.ए.सरकार का गठन हुआ है तब से आज तक सुचारु रूप से संसद चलने नहीं दिया।विपक्षीगणों का सकारात्मक एवं रचनात्मक विपक्ष की भूमिका नहीं निभाई गई।उनकी बातों और अड़ंगेबाजी के कारण संसद में विधाई कार्य भी और जरूरी और जनहित के मुद्दे भी उठाए नहीं जाते हैं।केवल संसद बाधित करना ही इनका एकमात्र उद्देश्य है।यह कभी सक्रिय विपक्ष की भूमिका में नजर नहीं आए।भारत की सबसे सस्ती कैन्टीन शायद संसद में ही है।सबसे ज्यादा सुख सुविधाएं शायद माननीयों को ही प्राप्त हैं।जनता की मेहनत की खून-पसीने की कमाई शायद इन माननीयों द्वारा ही उड़ाई जाती है।गरीबों, किसानों के नाम पर जीत कर संसद पहुंचते ही सारे कानून गरीबों, किसानों के हित में बनाए जाते हैं।पर गरीबों को और गरीबी ही नसीब हुई है।गरीबों का उद्धार होते कभी नहीं देखा गया।गरीबों पर हर चुनावों के बाद मंहगाई थोपी गई।आजादी के बाद से आज तक हर संसद मे…

शीतलहर का भीषण आगाज

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।हमारे यहाँ एक कहावत है जब प्यास लगे तब कुंआ खोदो।भीषण शीत लहर जारी है।हिमांचल प्रदेश में28 साल का रिकॉर्ड टूटा है।दिल्ली में 12 साल का रिकॉर्ड टूटा है।यू.पी.के मैदानी क्षेत्रों में भी भीषण शीत लहर जारी है।किसानों को फसल में पानी देनें के लिए रात-रात जागकर इस हांड़ कपा देने वाली सर्दी में फसल की रक्षा,सुरक्षा में रत होना पड़ रहा है।गरीब ग्रामीण क्षेत्रों में सिसक,तड़प रहा है।लखनऊ में गोमती नदी के पुल तथा चारबाग में फटे,पुराने चीथड़ों में लिपटे गरीब लोगों को ठण्ड से सिकुड़ते, सिमटते देखा जा सकता है।डांगर जानवरों और बूढ़े आदमियों को समेटने के लिए ही शीत ऋतु आती है।ठंड से बूढ़े,बच्चे ही ज्यादा प्रभावित होते हैं।सरकार ने घोषणा कर रखी है कि सभी तहसीलों में निधि भेजी जा चुकी है।पर अब तक कहीं भी कम्बल बांटने और अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं की गई है।सरकार से निवेदन है कि गरीबों को कम्बल बांटने और चौराहों पर अलाव जलवाने की शुरुआत करने की कृपा करें।प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

कर्ज माफी : एक चुनावी जीत का आसान फार्मूला

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।कर्जमाफी एक चुनावी फार्मूला सा बन गया है।चुनाव जीतने का अचूक फार्मूला बनता जा रहा है।इससे लोगों द्वारा कर्ज न चुकाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।जो सरकारी कर्ज चुकाने में सक्षम हैं वह भी कर्ज नहीं चुकाते।जो अक्षम हैं वह तो हैं ही अक्षम।सभी भारी भरकम या यूँ कह सकते हो कि अधिकतम जितना कर्ज निकल सकता है लेकर अक्षम,सक्षम सभी लोकसभा/विधानसभा चुनावों की बाट जोहनें में लग जाते हैं।लाभ होता भी है।विपक्षी दल वाले कर्जमाफी की घोषणा कर सत्तापक्ष वाले बन जाते हैं।यह एक परिपाटी सी चल निकली है।यह एक प्रकार का लालच देकर मत बटोरने का तरीका है।पाँच साल सत्ता सुख भोगो।मंहगाई की मार झेलने के लिए वोटर फिर कमर कस लेता है।केन्द्रीय चुनाव आयोग को इसे आदर्श चुनाव संहिता के तहत अयोग्य घोषित कर के इसे अवैधानिक करार दे।इससे देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाती है।यह एक सत्ता प्राप्त करने का अनुचित तरीका है।लालच देकर मत बटोरने को अनुचित और निष्पक्ष मतदान नहीं कहा जा सकता है।चुनाव आयोग को दखल देने की जरूरत है।इसे स्वच्छ राजनीति नहीं कहा जा सकता।चुनावी वैतरणी पार करके सत्ता सुख प्…

माता की प्रसन्नता से मिलती है मुक्ति

web - GSirg.com माता की प्रसन्नता से मिलती है मुक्ति मां भगवती की लीला कथा के अनुकरण से शिवसाधक को कई प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त होती हैं , जैसे शक्ति , भक्ति और मुक्ति आदि | माता की लीला कथा का पाठ करने से ही शक्ति के नए नए आयाम खुलते हैं | यह एक अनुभव की बात है | आदिकाल से ही माता के भक्तजन इस अनुभव को प्राप्त करते रहे हैं , और आगे भी प्राप्त करते रहेंगे | भक्तों का ऐसा मानना है , कि शक्ति प्राप्त का इससे सहज उपाय अन्य कोई नहीं है | इसके लिए दुर्गा सप्तशती की पावन कथा का अनुसरण करना होता है , जो लोग धर्म के मर्मज्ञ हैं तथा जिनके पास दृष्टि है केवल वही लोग इस सत्य को सहज रूप में देख सकते हैं |
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दुर्गा सप्तशती का पाठ माता की भक्ति करने वालों के जानकारों का विचार है , कि माता की शक्ति प्राप्त का साधन , पवित्र भाव से दुर्गा सप्तशती के पावन पाठ करने पर ही प्राप्त हो सकता है | इस पवित्र और शक्ति दाता पावन कथा का प्रचार केवल धरती पर…

अटल स्मृति

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।भारत रत्न, महान वक्ता,सुंदर व्यक्तित्व, मधुर वाणी,महान चिन्तक,महान विचारक,लोकप्रिय राजनेता, पूर्व प्रधानमंत्री सभी दलों द्वारा सम्मानित, हाजिर जबाब,हर दिल अजीज, महान कवि हृदय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी जयंती 25 दिसम्बर अटल तिथि के रूप में हम अपने प्रिय है श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं।एक घटना याद आ रही है--अटल बिहारी वाजपेयी जी माधव राव सिंधिया जी से चुनाव हार गए थे।राजशेखर व्यास जी दोनों हस्तियों के परिचित थे।श्री प्रगति वादी लेखक राजशेखर व्यास जी नें सिंधिया जी से निवेदन किया कि बाजपेयी के पैर छूकर आशिर्वाद लेने को कहा।सिंधिया जी नें व्यास जी को यू आर जीनियस कहकर बाजपेयी जी के चरणों को छूकर आशिर्वाद मांगा।अटल जी नें कहा पुत्र के हाथो हारकर भी अच्छा लगता है।ऐसी थी दो महान दिवंगत राजनीतिक दोस्ती।दूसरी कहानी अटल जी के एल.एल.बी.करने की है अटलजी और अटल जी के पिता जी नें कानपुर के डी.ए.वी.कालेज में साथ-साथ एडमीशन लिया था।कहते हैं अटल जी शर्मीले स्वभाव के थे।अटलजी ओजस्वी, तेजस्वी, योग्य, ज्ञानी विश्व ख्याति लब्ध कुशल प्रशासक,लोकप्रिय…

टूटते परिवार , दरकते रिश्ते , खोते संस्कार

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टूटते परिवार , दरकते रिश्ते , खोते संस्कार
आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। कहने को तो हम शिक्षित, सभ्य सामाजिक बनते जा रहे हैं।वास्तव में शिक्षा का प्रतिशत जरूर बढ़ता जा रहा है।लेकिन हम वास्तव में असभ्य और अशिक्षित से बदतर होते जा रहे हैं।संयुक्त परिवारों की संख्या लगातार घटते जा रहें हैं।रिश्ते लगातार दरकते जा रहे हैं।एकल परिवारों की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है।संस्कारों की इतिश्री होती जा रही है।नौबत स्कूलों में नैतिक शिक्षा पढ़ाने की आ गई है।टाप टू बाटम भृष्टाचार बढ़ता ही जा रहा है।अस्थि,मज्जा, खून,रोम-रोम में भृष्टाचार रच बस गया है।संयुक्त परिवारों में दादा-दादी,नाना-नानी की भूमिका बच्चों को शिक्षाप्रद, प्रेरणा दायक कहानियां सुनाने, बच्चों को संस्कारित करने की हुआ करती थी।सबसे पहले बड़े-बूढ़ों के पैर छूने की शिक्षा यहींं दादा-दादी,नाना-नानी बच्चों को शिक्षा देते थे।
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आज वृद्धाश्रमों,ओल्ड एज ह…

भाषा और व्याकरण

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।भारत विविधताओं वाला देश है।विभिन्न धर्म, जाति,भाषा, बोली,रीति रिवाज, वाला एक बहुत विशाल देश है।यहाँ एक पुरानी कहावत है "कोस,कोस पर बदलै पानी,चार कोस पर बदलै बानी।"यहाँ विविधता में एकता है।देश भक्ति यहाँ हर भारतीय में कूट-कूट कर भरी है।प्रत्येक भाषा का अपना एक व्याकरण होता है।हर भाषा का व्याकरण है और हर भाषा ,भाषा की श्रेणी में आती है।सारी दुनिया ने उर्दू को कैसे भाषा की मान्यता प्रदान कर के भाषा की श्रेणी डाल दिया है।इस भाषा का कोई व्याकरण नहीं है।बिना व्याकरण के कारण ही तो एक कहावत मशहूर है कि नुक्ते के हेर- फेर खुदा जुदा होत है।चिट्ठी आती है अब्बू अजमेर गए हैं।पढ़ने वाला खत पाठक पढ़ता है अब्बू आज मर गए हैं। व्याकरण विहीन उर्दू भाषा मानी जाती है।उर्दू केवल जबान है भाषा नहीं।अरबी,फारसी आदि भाषाओं की श्रेणी में हैं।सभी भाषाओं की अपनी व्याकरण है।फिर उर्दू को भाषा की श्रेणी कैसे प्राप्त हुई?अब हमारे भारत देश के मोबाइल धारकों ने एक नई भाषा का आविष्कार कर दिया हिन्दी के शब्दों का अंग्रेजी का पाजामा पहना दिया जाता है।इसे शायद हिन्गलिश नाम दिया गया  है।…

जानलेवा वायु प्रदूषण

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जानलेवा वायु प्रदूषण  आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। किसी भी आदमी को ज्यादा समय तक जिन्दा  रहने के लिए शुद्ध हवा,शुद्ध पेयजल,शुद्ध और पौष्टिक भोजन की जरूरत होती है।"जहाँ रहिहैं नर हुवैं बनइहैं घर।"देश की राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता निरंतर खराब ही ती जा रही है।आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदूषण के तय मानकों से काफी ज्यादा खराब है।आंकड़ा विदों नें 18 महीने कम आयु जीनें की घोषणा कर रखी है।दिल्ली वाले तो हैं ही अब कमजोर फेफड़ों वाले जानें जाएंगे।बच्चों की दर्द भरी दुर्दशा की कहानी ही कुछ और है अस्थमा रोगियों की संख्या बच्चे, बूढ़े, और जवान सब को अस्थमा, सांस लेनें में परेशानी बढ़ती जा रही है।यदि वायु गुणवत्ता का ग्राफ इसी तरह गिरता गया तो विदेशी मेहमानों का दिल्ली आगमन पर असर जरूर पड़ेगा।डीजल/पेट्रोल चालित वाहनों की लगातार बढ़ती तादात, विकास के नाम पर कल कारखानों का जहर उगलता धुंआ वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। -------------------------------------------------------------------------------------




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मातृ पितृ भक्ति

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मातृ पितृ भक्ति  आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। हिन्दुस्तान में मातृ-पितृ भक्तों की लम्बी श्रंखला रही है।समय-समय पर एक से बढ़कर एक मातृ-पितृ भक्तों नें जन्म लिया हैः-- यथा---श्रवण कुमार, ध्रुव, नचिकेता, परशुराम  आदि। पुराने जमाने में या कह सकते हैं।सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर तक मातृ-पितृ भक्तों की भक्ति करनें वालों की संख्या कम नहीं हुई।राजा हरिश्चंद्र, भगवान श्री राम,भगवान श्रीकृष्ण,तथा पाण्डवों नें आदर्श प्रस्तुत किया है।इन सभी महापुरुषों ने माता-पिता की आज्ञा पालन,सत्य,सदाचार कुशल प्रजा पालक ,धर्म परायण आदि सद् गुणों से परिपूर्ण अनुकरणीय व्यक्तित्व के महामानव थे।
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------------------------------------------------------------------------------------------- कलयुग उपरोक्त युगों का उल्टा शास्त्रों में बताया गया है।इस युग में आए दिन समाचार पत्रों, टी.वी.,रेडियो आदि सभी संचार माध्यमों से कलयुगी पुत्रों द्वारा माता-पिता की हत्या के समाचार मिलते ही रहते हैं।इस युग में माता-पिता का तिरस्कार, अकारण पिटा…

मातृ पितृ भक्ति

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।हिन्दुस्तान में मातृ-पितृ भक्तों की लम्बी श्रंखला रही है।समय-समय पर एक से बढ़कर एक मातृ-पितृ भक्तों नें जन्म लिया हैः-- यथा---श्रवण कुमार, ध्रुव, नचिकेता, परशुराम  आदि।पुराने जमाने में या कह सकते हैं।सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर तक मातृ-पितृ भक्तों की भक्ति करनें वालों की संख्या कम नहीं हुई।राजा हरिश्चंद्र, भगवान श्री राम,भगवान श्रीकृष्ण,तथा पाण्डवों नें आदर्श प्रस्तुत किया है।इन सभी महापुरुषों ने माता-पिता की आज्ञा पालन,सत्य,सदाचार कुशल प्रजा पालक ,धर्म परायण आदि सद् गुणों से परिपूर्ण अनुकरणीय व्यक्तित्व के महामानव थे।कलयुग उपरोक्त युगों का उल्टा शास्त्रों में बताया गया है।इस युग में आए दिन समाचार पत्रों, टी.वी.,रेडियो आदि सभी संचार माध्यमों से कलयुगी पुत्रों द्वारा माता-पिता की हत्या के समाचार मिलते ही रहते हैं।इस युग में माता-पिता का तिरस्कार, अकारण पिटाई, अपमानित होना आम बात हो गया है।माता-पिता से इस युग में संतानें बड़ी होकर पूछती हैं।तुमनें किया ही क्या है?तुम बेवकूफ हो।बीच में मत बोला करो।आदि जुमलों से अपने रचनाकार, शिल्पकार, कृतिकार,पालनहार,देवतुल्य, ज…

दूषित पेयजल

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दूषित पेयजल  आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। डायरिया एक जान लेवा रोग है। उचित समय पर इलाज, ग्लूकोज इन्फ्यूजन न मिले तो पानी की कमी और इन्फेक्शन के कारण जान जा सकती है।पहले इस रोग का कारण दूषित भोजन ही माना जाता था,परन्तु कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दूषित जल से यह रोग ज्यादा होता है।दूषित जल ज्यादा जिम्मेदार है इस रोग का।दूषित भोजन तो जिम्मेदार है ही। ---------------------------------------------------------------------------------

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--------------------------------------------------------------------------------- कोल्ड डायरिया ज्यादा खतरनाक होता है।ठण्ड लग जाने के कारण फैलने वाले डायरिया को कोल्ड डायरिया कहते हैं। सरकार को चाहिए कि हर गाँव, घर मुहल्ले के पेयजल श्रोतों की जाँच ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत स्तर पर फ्री अनिवार्य रूप से करवानी चाहिए।जहाँ पेयजल श्रोत दूषित पाए जांय वहां वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था करवाने की कृपा करें।छतों पर रखी पानी टंकियों और घर के अंदर सप्लाई वाली पाइपों के द्वारा भी कुछ न कुछ प्लास्टिक प्रदूष…

दूषित पेयजल

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।डायरिया एक जान लेवा रोग है। उचित समय पर इलाज, ग्लूकोज इन्फ्यूजन न मिले तो पानी की कमी और इन्फेक्शन के कारण जान जा सकती है।पहले इस रोग का कारण दूषित भोजन ही माना जाता था,परन्तु कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दूषित जल से यह रोग ज्यादा होता है।दूषित जल ज्यादा जिम्मेदार है इस रोग का।दूषित भोजन तो जिम्मेदार है ही।कोल्ड डायरिया ज्यादा खतरनाक होता है।ठण्ड लग जाने के कारण फैलने वाले डायरिया को कोल्ड डायरिया कहते हैं।सरकार को चाहिए कि हर गाँव, घर मुहल्ले के पेयजल श्रोतों की जाँच ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत स्तर पर फ्री अनिवार्य रूप से करवानी चाहिए।जहाँ पेयजल श्रोत दूषित पाए जांय वहां वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था करवाने की कृपा करें।छतों पर रखी पानी टंकियों और घर के अंदर सप्लाई वाली पाइपों के द्वारा भी कुछ न कुछ प्लास्टिक प्रदूषण तो फैलता ही होगा।इन सब की जाँच करवाने से डायरिया रोग की मारक क्षमता रोककर शिशु मृत्यु दर अवश्य कम की जा सकती है।डायरिया रोग बच्चों में हर सीजन में ज्यादा फैलता है।बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है।शिशु और जवानों …

16 Dec

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16 Dec
आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम। आज दि० 16-12-2018 अनेकों राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं का गवाह बना।आज ही के दिन सन् 1971 ई० में भारत नें पाकिस्तान को बड़ी बुरी गति से पराजित किया था। इस युद्ध में वीरगति प्राप्त सैनिकों को अश्रु-पूरित श्रद्धांंजलि सादर समर्पित है।भारतीय सैनिक अफसर श्री "अरोड़ा "के सामनें पाकिस्तानी सैनिकों के आला अफसर " नियाजी"नें लगभग 99 हजार सैनिकों के साथ बिना शर्त आत्म समर्पण किया था।



और आज ही के दिन "बांग्लादेश"का जन्मोदय हुआ था।इस युद्ध में जल सेना के कैप्टन पंडित महेन्द्र नाथ मुल्ला की बहादुरी कौन भूल सकता है? इस युद्ध का और वीरतापूर्वक पाकिस्तान को हराने का सारा श्रेय आयरन लेडी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी भारत सरकार जाता है।इस युद्ध का हाल सजीव जानने के लिए B.B.C.लंदन द्वारा प्रसारित "ढ़ाका डायरी" सुनकर पढ़कर जाना जा सकता है।भारतीय वीर सैनिकों के हाथ दिल्ली सरकार ने बांध रखे हैं।नहीं तो एक भी आतंकवादी रूपी कुत्तों की क्या मजाल है जो थप्पड़, पत्थर से मारें।अगर इन वीर सैनिकों के हाथ खोल दिए जांय तो एक भी …