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इलाज ; '' थायराइड '' जाने जरूरी तथ्य

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लाज ; '' थायराइड '' जाने जरूरी तथ्य ''


हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में थायराइड का महत्वपूर्ण स्थान है | हमारे शरीर का यह अंग , यह एक प्रकार की ग्रंथि है , जो गर्दन में स्थित होती है | यह ग्रंथि तितली के आकार की होती है , तथा यह टी 3 तथा टी 4 नामक हार्मोन्स का स्राव करती रहती है | यह दोनों ही हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक रखते है , तथा शरीर को कई प्रकार के रोगों से भी बचाते है | आज हम यहां आपको इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों और तथ्यों से आपको अवगत करा रहे हैं | इससे आप स्वयं ही जानकारी पाकर और चिकित्सीय जांच करवा कर , इससे बचने के उपाय , तथा इसकी चिकित्सा भी कर सकते हैं |

थायराइड ग्रंथि का काम

चिकित्सीय क्षेत्र मे '' फिजियोलॉजी '' अर्थात '' शरीर विज्ञान ''के जानकारों के अनुसार , हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार के हारमोंस की अलग-अलग ग्रंथियाँ और उनकी अलग अलग भूमिकाएं होती हैं | विभिन्न प्रकार के हार्मोन्स के कार्य भी भिन्न-भिन्न होते हैं | थायराइड ग्रंथि से उत्पन्न होने वाले हार्मोन्स टी 3 और टी 4 शरीर में उपस्थित , इंसुलिन और कार्टीसोन हार्मोन्स के साथ मिलकर शरीर के मेटाबॉलिज्म को सही रखते हैं , जिसके कारण शरीर का वजन , शरीर के आनुपातिक ढंग से ठीक रहता है | इसके अलावा शरीर के तापक्रम को नियंत्रित करने , हृदय गति को नियमित रखने मे भी टी 3 तथा टी 4 महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं | थायराइड के कारण ही मनुष्य के दिमाग की क्रियाएं सही रूप से संचालित हुआ करती हैं | इन कार्यों के अलावा भोजन को ऊर्जा में बदलने और पाचन तंत्र को ठीक रखने का कार्य भी थाईराइड का ही है |

थायराइड के प्रकार

मानव शरीर में दो प्रकार के थायराइड उपस्थित रहते हैं जिन्हें हाइपोथाइरॉयटिज्म तथा हाइपरथाइरायडिज्म के नाम से जाना जाता है | इसमें पहले प्रकार की थायराइड ग्रंथि का महत्वपूर्ण कार्य , यहां से ही टी3 और टी 4 नामक हार्मोन्स का स्राव होता है , परंतु किसी कारण से जब यह ग्रंथि अपनी पूर्ण क्षमता से काम नहीं कर पाती है , तब ही उपरोक्त हार्मोन्स का स्राव सही ढंग से नहीं हो पाता है | इन हार्मोन्स के सही ढंग से श्राव न हो पाने के कारण , शरीर का मेटाबॉलिज्म मन्द पड़ जाता है | जिसके परिणाम स्वरुप शरीर का वजन बढ़ने लगता है |

इसी प्रकार पहली प्रकार की थाईराइड ग्रंथि के विपरीत जब दूसरे प्रकार की थायरायड ग्रंथि '' हाइपरथाइरायडिज्म '' , अगर तेजी से काम करने लगे ततो स्थिति बिल्कुल विपरीत हो जाती है | जिसके कारण शरीर का वजन घटने लगता है , और दुर्बलता आने लगती है |

थायराइड ग्रंथि के सुस्त होने के कारण

थायराइड ग्रंथि को सुस्त करने मैं मानव मन के तनाव , शरीर के पोषण की कमी और सूजन आदि है | इसके अलावा शरीर में होने वाली कई प्रकार की बीमारियां भी इनकी कार्यप्रणाली को दूषित कर देती हैं | इन बीमारियों में , शरीर में विषाक्तता होना , किसी अन्य प्रकार का संक्रमण और लीवर या किडनी में होने वाले कई प्रकार के दोष होना आदि जिम्मेदार हैं | इसके अलावा कई प्रकार की एलोपैथिक दवाएं भी , इनकी कार्यप्रणाली को दूषित कर देती हैं | इन ही महत्वपूर्ण कारणों से थायराइड की स्वाभाविक क्रियाएं सुस्त होकर , इसकी कार्यप्रणाली को दूषित कर देती हैं |

थायराइड हारमोंस को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए आदमी को चाहिए कि , वह आयरन , आयोडीन, जिंक , सेलेनियम , विटामिन B 2 , b3 , b6 तथा विटामिन सी और डी का भरपूर उपयोग करें |

आयुर्वेदिक चिकित्सा

थायराइड ग्रंथि सुचारू रूप से कार्य करें , इसके लिए आयुर्वेदाचार्यों ने बहुत ही आसान और सरल उपाय बताया है | थायरायड से पीड़ित व्यक्ति को चाहिए कि , वह सबसे पहले निर्धारित चेकअप करवा कर यह सुनिश्चित करें कि , उसका थायराइड सही ढंग से काम कर रहा है , अथवा नहीं | यदि इसमें गड़बड़ी मिले तो उसे चाहिए कि , वह किसी बाजार से काफी मात्रा में हरी धनिया के पौधे ले आए | घर में इन पौधों की पत्तियों को इकट्ठा कर सिलबट्टे से अथवा खरल से पीसकर इसकी चटनी बना ले | चटनी बनाने में केवल हरी पत्तियों का ही उपयोग होगा | उसमें नमक या मिर्च आदि कुछ भी मिलाने की जरूरत नहीं है | यदि इसमें कुछ भी मिला दिया गया तब यह औषधि बेकार हो जाएगी | इस औषध की एक चम्मच मात्रा दिन में दो बार सेवन करना प्रारंभ करें | लगभग 15 दिनों की चिकित्सा के बाद , रोगी को पुनः अपना चिकित्सीय परीक्षण करवाकर , औषधि के प्रभाव की जानकारी कर लेनी चाहिए , क्योंकि आधुनिक जांचों से पता कर लेने के पश्चात , उसे यह पता लग जाएगा कि , कि अभी और उसे कितने दिनों तक औषधि का प्रयोग करना है | कुछ दिनों के नियमित प्रयोग से आप थायराइड ग्रंथि के दूषण से मुक्ति पा जाएंगे |

औषधि काल में खानपान

औषधि सेवन के दिनों में रोगी को चाहिए कि , वह पत्तागोभी , ब्रोकली और सोया फूड आदि का सेवन सीमित मात्रा में करें , और अपने तनाव पर काबू रखें | विटामिन व मिनरल से भरपूर खाद्य पदार्थों का प्रचुरता से उपयोग करें | औषधि के सेवन काल मे सेलेनियम और जिंक से भरपूर भोजन लेने से बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है | इसके अलावा आयोडीन , आंवला , फैटी एसिड तथा सेलेनियम युक्त खाद्य पदार्थों का उपयोग करें | खाने वाले नमक में समुद्री नमक को छोड़ ही दिया जाए तो अच्छा है | इस नमक के स्थान पर सैन्धव नमक का उपयोग किया जा सकता है | अन्य किसी परामर्श के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से लगातार संपर्क बनाए रखना चाहिए |

जय आयुर्वेद



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