सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

धर्म ; जीवनसंग्राम में विजय प्राप्ति के उपाय [ 1 / 13 ]

             web - gsirg.com

\\ जीवनसंग्राम में विजय प्राप्ति का उपाय \\
    
    हमारा भूमंडल बहुत बड़ा है , इसमें अनेकों प्राणी निवास करते हैं | सभी प्राणियों में सबसे श्रेष्ठ मानव को माना गया है | परन्तु इस संसार में ऐसा कोई प्राणी नहीं है , जिसके जीवन में मुसीबतें  न हों | प्रत्येक प्राणी को अपने जीवन में विपत्तियों का सामना करना ही पड़ता है | क्योंकि दिन और रात के समान ही कालचक्र सदा घूमता रहता है , जिससे आज कोई बच नही पाया है | जिस प्रकार हर दिन के बाद रात आती है ठीक उसी तरह हर सुख के बाद दुख भी प्राणी केजीवन मैं आता रहता है | यह विपत्तियां एक प्रकार से मानव के धैर्य साहस , सहिष्णुता और आध्यात्मिकता की परीक्षा लेती हैं | जीवन के इस संग्राम में जो पुरुष अपनी मुसीबतों का निर्भीकता और दृढ़ता के साथ मुकाबला कर पाता है , उसे ही इस जीवन के संग्राम में विजय प्राप्त होती है , उसे ही सफल पुरुष कहा जा सकता है |
  
 \\  हंसते हुए सहज भाव से करें मुकाबला \\
  
    कोई भी प्राणी अपने जीवन में आने वाली विपत्तियों कि किसी भी प्रकार उपेक्षा नहीं कर सकता है | वास्तव में विपत्तियां हमारी प्रतिकूलताएं हैं , जिनका हमें डटकर मुकाबला करना ही होता है | प्रत्येक प्राणी जिन वस्तुओं की जिन परिस्थितियों में इच्छा करते हैं , वह चाहते हैं कि उन इच्छाओं की पूर्ति भी उनकी आशाओं के अनुरूप ही हो , पर किन्ही कारणों से उन इच्छाओं की पूर्ति ना होना पाना ही विपत्तियां जान पड़ने लगती है | हमारी आशा के विपरीत हमारे स्वार्थ के स्थूल या सूक्ष्म जो भी रूप जीवन में सामने आते हैं , उन्हीं तथ्यों या रूपों को ही हम विपत्ति मान लेते हैं | इसके निवारण का सरल उपाय यह है कि हम अपने स्वार्थ , मोह , ममता , लोभ और धैर्य को मर्यादित और संयमित रखें | ऐसा करने से ही हम इन पर विजय प्राप्त कर सकते हैं | इसीलिए सादाजीवन बिताने पर जीवन से मुसीबतों की मात्रा कम हो जाती है | इसके बावजूद भी अगर कुछ मुसीबतें शेष रहती है , तो हर हम वक्त उनका समस्यायों और विपत्तियों का आसानी से हंसते हुए , सहज भाव से मुकाबला कर सकते है |

          \\  घबराएं नहीं \\
   
     अगर हम अपना जीवन सादा , स्वावलंबी और सही रूप से बिताना शुरू दें , तो हम भविष्य में आने वाली छोटी तथा बड़ी विपत्तियों का साहस के साथ मुकाबला कर सकते हैं | हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि कुछ मुसीबतें तो केवल काल्पनिक होती हैं | जिनको तूल देकर हम बेकार में अपने चारों और भय का वातावरण न बनाएं | किसी कार्य को करने से पहले उसकी पूरी रूपरेखा तैयार करने लेने पर हमें असफलता का मुंह नहीं देखना पड़ता है | परंतु यदि मजबूर होकर हम बेमन से कोई कार्य करेंगे , तब ही सफलता मिलना ही संदिग्ध हो जाता है |  अगर आप यह सोचते हैं कि सफलता आपके भाग्य मैं लिखी थी | तो यह काल्पनिक विचार हैं | इसके लिए आप अपने भाग्य को दोषी न ठहराएँ | कभी-कभी अतिरिक्त कारणों से या परिस्थिति से अनजान होने या अज्ञानता से या अनभिज्ञ कारणों से भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है | परंतु यदि हम इन परेशानियों को ईश्वर द्वारा हमारी आस्तिकता , आत्मविश्वास , धैर्य और सहिष्णुता की परीक्षा मानकर स्वीकार करें , तथा सच्चे मन से अपने कर्तव्य पथ पर चलें | तो इसमे कोई संदेह नही कि हर व्यक्ति प्रत्येक मुसीबत का आसानी से हंसते मुकाबला कर इन समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकता हैं |

        \\ साहस और संतोष \\
    
     यदि हर मानव कर्तव्य पथ पर चलते हुए अपना जीवनयापन संतोषपूर्वक व्यतीत करता है | उस समय कोई भी मुसीबत उसका जीवनपथ बाधित नहीं कर पाती है , क्योंकि ऐसा पुरुष इन सभी दिक्कतों को ईश्वरीय विधान मानकर सहर्ष स्वीकार कर लेता है | परिणामस्वरुप उसके मनोबल में इतनी वृद्धि हो जाती है कि वह कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति अर्जित कर ही लेता है | इसलिए प्रत्येक परिस्थिति में अपने मन को संतुलित , शांत और स्थिर रखने का प्रयत्न करना चाहिए | दूसरों के सुख को देख कर दुखी और बेचैन होने के बजाए प्रत्येक मानव को उन अभावग्रस्त लोगों को देखकर संतोष करना चाहिए , जो बहुत ही अभावों में अपना जीवन बिता रहें हैं | साथ ही यह भी सोचना चाहिए कि ईश्वर हम पर बहुत दयालु है , कि हम पर इन लोगों की अपेक्षा ईश्वर की बहुत ही ज्यादा दया प्राप्त है |
  
        \\  कमजोर न बने \\
 
    जीवन में किसी वस्तु का अभाव होना ही विपत्तियों का मूल कारण है | इस अभाव के लिए दिन-रात चिंतन करना बेकार है | हमें चाहिए कि हम इन विपत्तियों को प्रयत्नपूर्वक सुधारने का प्रयास करें, तथा भरसक कोशिश करें कि कभी भी विपत्तियों से घबराकर , प्रयत्नों को छोड़ देने की बात ही न सोंचें , बल्कि ऐसे समय में हमें दोगुने उत्साह के साथ उद्देश्य की प्राप्ति के लिए संलग्न हो जायें | हमे चाहिए की हम जीवन की समस्याओं का हल अपने पड़ोस और परिवार के सदस्यों से भी मिलकर भी करें | उनके प्रेरक विचार और बहुमूल्य सुझाव हमारी कठिनाई को आसान कर देते हैं , जिसकी प्रेरणा से तथा आत्मबल से विपत्तियों का निवारण किया जा सकता है | इसमें कमजोरी या कामचोरी दिखाने से हम सदैव अभावग्रस्त ही बने रहेंगे |
  
     \\ जीवन संग्राम में विजय प्राप्त करें \\
    उपरोक्त बातों का ध्यान देने के बाद हमें यह ज्ञात होता है कि जीवन एक प्रकार का संग्राम है | इसमें विजय प्राप्त करने के लिए प्रत्येक को अपने जीवन के कार्यक्षेत्र रूपी अखाड़े में निडर होकर युद्ध करें | जीवन में सफलता पाने के लिए हर मानव को विपत्तियों को पराजित करना ही होगा | इसमें हमारा पुरुषार्थ , सूझबूझ , दूसरों का परामर्श और मार्गदर्शन एवम् अपने आत्ममित्रों और हितचिंतक द्वारा किया गया समाधान हमारा अवलंबन साबित होगा | जिससे हम विपत्तियों पर विजय प्राप्त कर अपना जीवन सफल बना सकते हैं |

           \\ इति श्री \\

        \\ web - gsirg.com \\


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

इलाज ; एसिड अटैक [1/15 ] D

web - gsirg.com इलाज ; एसिड अटैक के क्या कारण आजकल अखबारों में तेजाब से हमले की खबरें पढ़ने को मिल ही जाती हैं। तेजाब से हमला करने वाले व्यक्ति प्रायः मानसिक बीमार या किसी हीनभावना से ग्रस्त होते हैं। ऐसे लोग अपनी हीनभावना को छिपाने तथा उसे बल प्रदान करने के लिए अपने सामने वाले दुश्मन व्यक्ति पर तेजाब से हमला कर देते हैं। कभी-कभी इसका कारण दुश्मनी भी होता है , इसके अलावा कभी-कभी लोग अपनी आत्मरक्षा के लिए भी एसिड अटैक का अवलंबन कर लेते हैं। कारण कुछ भी हो किंतु इसमें पीड़ित को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है। ऐसे हमलों का होना या ऐसी घटनाएं होना हर देश में आम बात हो गई है। इस्लामी देशों में लड़कियों को उनकी किसी त्रुटि के कारण तो ऐसी धमकियां खुलेआम देखने को मिल जाती हैं। \\ शरीर का बचाव \\ यदि के शरीर किसी पर तेजाब से हमला होता है , उस समय शरीर के जिस भाग पर तेजाब पड़ता है , वहां पर एक विशेष प्रकार की जलन होने लगती है | इस हमले में शरीर का प्रभावित भाग बेडौल , खुरदरा और भयानक हो सकता है | इस हमले से पीड़ित व्यक्ति शरीर की त...

इलाज ; कुष्ठ रोग जानकारी और बचाव

web - gsirg.com इलाज ; कुष्ठ रोग जानकारी और बचाव यह एक घृणित रोग है | इस रोग में आदमी के शरीर के अंगों का गलना शुरू हो जाता है | इस रोग से प्रभावित अंगों से दुर्गंधयुक्त मवाद निकलने लगती है , धीरे-धीरे रोगी के यह अंग गल गल कर बहने लगते हैं | रोग की चरमावस्था पर धीरे-धीरे के अंग शरीर से गायब या समाप्त हो जाते हैं | जिसके कारण कोई अन्य व्यक्ति उसके पास उठता बैठता या खाता पीता नहीं है | इसके अलावा वह रोगी से किसी प्रकार का संबंध भी नहीं रखना चाहता है | दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो लोग ऐसे रोगी को घृणा की दृष्टि से देखते हैं | इस रोग का रोगी स्वयं भी अपने आप से घृणा करने लगता है , कभी-कभी तो रोगी रोग से परेशान होकर आत्महत्या करने का विचार भी करने लगता है | कुष्ठ हर चूर्ण बनाना कुष्ट के रोगी को चाहिए कि वह अपने रोग से निजात पाने के लिए यह चूर्ण बना ले | इसके लिए रोगी को बकायन नामक वृक्ष के बीज इकट्ठा करना होता है | इन बीजों की मात्रा जब 2 किलो ग्राम के लगभग हो जाए , तब इनकी साफ-सफाई कर ले , ताकि उन पर लगी धूल मिट्टी आदि निकल जाए | अब इन बीजों की आधी मात्रा यानी 1 किल...

काम शक्ति से भरपूर बनाने वाली औषधि | Kamshakti se bharpoor bananewali aoshdhi

                                  web - helpsir.blogspot.com काम शक्ति से भरपूर बनाने वाली औषधि यह तो सभी जानते हैं कि जीवन का आखिरी चरण अर्थात होना एक शारीरिक है | शरीर के बुड्ढे हो जाने पर व्यक्ति की सभी इंद्रियां और अंग प्रत्यंग कमजोर हो जाते हैं | प्रत्येक व्यक्ति को अपने पूरे जीवन का एक लंबा अनुभव होता है | बुढ़ापे मे आदमी का शरीर अवश्य कमजोर हो जाता है , परन्तु उसका मन कभी कमजोर नहीं हो पाता है | क्योंकि व्यक्ति के मन की कोई उम् सीमा नहीं होती है | इसलिए मन सदैव ही युवा बना रहता है | दूसरे शब्दों में इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि मन पर काल का प्रभाव कभी नहीं पड़ता है | Mircle Drug मन की अनंत इच्छाएं Young medicine प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अनेकों इच्छाएं करता रहता है , तथा उनकी पूर्ति के लिए आजीवन उसमें संलग्न भी रहता है | पर उसकी यह इच्छाएं केवल और केवल उसकी मृत्यु के बाद ही उसका पीछा छोड़ती है | ऐसी ही अनेकों इच्छाओं में कामेच्छा भी शामिल है | हर व्यक्ति अपने ज...