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15 अगस्त पर विशेष * ऐसे थे चन्द्रशेषर आजाद*

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आदरणीय सम्पादक जी 

                                 सादर प्रणाम

          चन्द्र शेषर आजाद के बारे में एक बार की घटना जो मैनें राष्ट्र धर्म पत्रिका में पढ़ी थी।प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ।

         अंग्रेजी राज्य था।देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था।अंग्रेजों का जुल्म-ओ-सितम दिनों दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा था।मानवता त्राहि-त्राहि कर रही थी।भारत माँ के सपूत उनकी बेंड़ियाँ काटने को बेचैन थे।क्रांतिकारियों को पुलिस के दमन चक्र का शिकार होना पड़ रहा था।   

          क्रांतिकारियों की धर-पकड़ के लिए अंग्रेजी जासूस सूंघते फिर रहे थे।फिर भी माँ भारती के लड़ैते लाल अंग्रेजी सरकार को नुकसान पहुंचाने से बाज कहाँ आ रहे थे।पकड़े जाने पर भी बड़े गर्व से फांसी का फंदा चूमने की ललक लिए शहीदों की माला में एक और मनका जड़नें को आतुर रहते थे।

            चन्द्र शेषर आजाद केवल एक बार सोलह साल की उम्र में प्रयागराज में ही गिरफ्तार हुए थे।बड़े ही सटीक और निर्भीक प्रश्नोत्तर किए थे।16 कोड़ों की सजा दी गई थी।उसके बाद आजाद आजादथे, आजाद ही रहे।आज आजाद भारतीयों के लिए क्रांति नायक,असल योद्धा, अद्भुत सेनानी, कुशल नेतृत्व कर्ता,असीम ताकत के धनी की छवि व्याप्त है।अद्भुत और गजब की पर्सनैलिटी के मालिक आजाद वाकई आजाद थे।

         विशुद्ध कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे।भारतीय क्रांति के इतिहास में इन्हें ब्राह्मण शिरोमणि कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

         बात उन दिनों की है जब आजाद को अंग्रेजों से ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लेने के लिए एक गैरेज में नौकरी करनी पड़ी।गैरेज में बनने के लिए पुरानी म़ोटर कारें आया करती थी।एक बहुत ही पुरानी कार गैरेज में आई।जिसका स्टेरिंग जाम था।

         आजाद गैरेज में सबसे बलिष्ठ मैकेनिक के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे।सभी लोगों ने ताकत लगाई स्टेरिंग व्हील टस से मस न हुआ।आजाद को बुलाया गया।आजाद नें इतनी जोर से ताकत लगाकर स्टेरिंग व्हील घुमाई कि स्टेरिंग व्हील तो न घूमी आजाद की कलाई अवश्य पलट गई।

       चिकित्सा हेतु उन्हें अस्पताल लाया गया।सर्जन ने सर्जरी की सलाह दे दी।उन दिनों क्लोरोफार्म से ही बेहोश करने की प्रथा थी।आजाद को जानकारी थी कि क्लोरोफार्म की बेहोशी की अवस्था में आदमी दिमाग में सुरक्षित राज भी बड़बड़ा देता है।

        आजाद बेहोशी के लिए कदापि तैयार नहीं थे।सर्जन से बिना बेहोश किए आपरेशन की जिद लगाए बैठे थे।सर्जन बिना बेहोशी के आपरेशन को कतई तैयार नहीं था।आजाद ने अपने दिल को कड़ा किया।ईच्छा शक्ति को और द्रढ़ किया।अपने को बेहोशी के लिए तैयार किया।

       आपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।होश आने पर नर्स ने कहा कि आप बेहोशी में खूब बड़बड़ा रहे थे।आजाद की छठी इन्द्रिय जागृत हो उठी।आजाद ने तपाक से पूछा क्या बड़बड़ा रहा था।नर्स ने कहा बस यहीं कह रहे थे--हमे कुछ नहीं बताना।हमे कुछ नहीं बताना।आखिर कौन सी बात है जो आप बताना नहीं चाहते।आजाद ने कहा जब बेहोशी में नहीं बताया तो हमे कुछ भी नहीं बताना।आजाद की दृढ़ ईच्छा शक्ति की जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है।

        ऐसे थे हमारे अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद।इन्हें इनकी माताश्री प्यार से चन्दू बुलाया करती थीं।एक अरब तीस करोड़ भारतीयों की विनम्र श्रद्धांजलि।

        " ऐसे महापुरुष बसुधा पर कभी-कभी आते हैं।               

         मानवता के लिए सभी कुछ अपना दे जाते हैं। "

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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