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प्रतियोगी परीक्षाओं मे प्रथम स्थान पर पुरुष


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आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

         मा०शि०प०उ०प्र०बोर्ड प्रयागराज की हाई स्कूल और इण्टर मीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर लड़कियों का जादू सिर चढ़कर बोलता है।अर्थात प्रथम स्थान पर हमेशा से ही लड़कियों का नाम होता चला आ रहा है।इसका एक सबसे बड़ा कारण यह भी माना जाता रहा है कि लड़कियों का परीक्षा सेन्टर हमेशा स्थाई रहता है जबकि लड़कों को दूसरे सेन्टर पर परीक्षा देने जाता पड़ता है।

       मेरा यह मानना कतई नहीं है कि लड़कियों में प्रतिभाओं की कमी होती है।बल्कि स्थाई सेन्टर जाना पहचाना होता है तथा स्थाई सेन्टर पर परीक्षा देने के कारण मानसिक द्वंद्व अपेक्षाकृत कम होता है।जबकि लड़कों को इसके विपरीत अनजाने माहौल में परीक्षा देने के कारण मानसिक तनाव अधिक होता है।जिसके कारण परीक्षा देने में लड़कियों की अपेक्षा कम सहूलियत होती है।

          यही  कारण है कि हाईस्कूल, इण्टर मीडिएट परीक्षा में लड़कियाँ लड़कों से बाजी मार ले जाती हैं।नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में लड़के ही प्रथम स्थान पर होते हैं।असली प्रतिभा का प्रदर्शन इन राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में ही देखने को मिलता है।जहाँ लड़कों का मानसिक परिपक्वता प्रतिशत लड़कियों के सापेक्ष अधिक होता है।ऐसा नहीं है कि इन परीक्षाओं में लड़कियों का प्रदर्शन नगण्य होता है।हमारी बेटियाँ भी किसी मामलों में लड़को से पीछे कतई नहीं हैं।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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