Skip to main content

लुप्त होते महिला मंगल गीत

helpsir.blogspot.com

आदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम

        लोकगीतों की कड़ी में महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले मंगलगीतों का प्रथम स्थान हुआ करता था।महिलाओं द्वारा शादी ब्याह,मुण्डन, छेदन आदि मांगलिक सुअवसरों पर विभिन्न प्रकार के गीत हुआ करते थे।यथा---उड़द और मूंग की बड़ियां बनाए जाने के समय के गीत,मण्डप रोपित होने पर प्रतिदिन सांझ न्यौतने के गीत,तेल चढ़ाए जाने के समय के गीत,द्वार-चार के गीत,स्वागत गीत,खाना खाने के समय के गीत,ब्याहा-भात के समय के गीत,कलेवा के समय के गीत,विदाई गीत आदि।इसके अतिरिक्त होली गीत,गोबर के बल्ला बनाए जाने के समय के गीत।रक्षाबंधन, नागपंचमी के गीत,सावन पर झूला गीत।
      कुल मिलाकर हर मांगलिक अवसर के अलग-अलग महिला मंगल गीतों की सिरीज हुआ करती थी।समय बदला महिला मंगल गीतों के स्थान पर फिल्मी गीत गाए जाने लगे।पुराने जमाने के महिला गीतों में सुर-ताल तथा रस हुआ करता था।अब के फिल्मी गानों में फूहड़ता, अश्लीलता ही परोसी जा रही है।द्विअर्थी गीतों का चलन चल पड़ा है।
     हमारे यहाँ शास्त्रोक्त विधि से वैदिक रीति से शादी का विधान रहा है।उसी अनुसार मांगलिक गीतों के गाए जाने का विधान रहा है।नव ग्रह शांति, पूर्वजों का निमंत्रण आदि गीतों के माध्यम से गाए जाते थें।और हर गीत में मंगलकामना ही होती थी।अब केवल डी.जे. और बैण्डबाजों का शोरगुल ही बाकी शेष बचा है।अब ऐसे लोकगीतों का गायन केवल रेडियो पर ही सुनाई देते है।बाकी केवल फिल्मी गानों की ही बहार है।चारों ओर कानफोड़ू संगीत ही बजता है।उन पुराने गानों में अपनत्व और मिठास हुआ करती थी।

     अब शायद ही वह समय लौटकर आए जब महिलाओं द्वारा गाई जाने वाले सोहर,नकटा,गारी ,भजन,होली गीत सुनने को मिले।ब्याहा-भात ही बन्द हो चुका है तो गीत कहाँ बचेंगे।

इन गारिन का माख न मानेव गारी प्रेम पियारी जी।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

Comments

Popular posts from this blog

आजादी की अमर नेत्री नीरा नागिन ....विनोद पटेल

आजादी की इस अमर नेत्री को अंग्रेजी शासक ने इतनी यातनाएं दी गईं कि जानकारी होने पर आपका कलेजा मुँह को आजायेगा और नेहरू ही नही नेहरु परिवार कहता है कि चरखा से आजादी मिली?
         नीरा आर्य की कहानी। जेल में जब मेरे स्तन काटे गए ! स्वाधीनता संग्राम की मार्मिक गाथा। एक बार अवश्य पढ़े, नीरा आर्य (१९०२ - १९९८) की संघर्ष पूर्ण जीवनी ।
        नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में भारतीय  सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था | नीरा के मन मे देश की आजादी के प्रति उत्कट भावना थी । नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए इन्होंने अंग्रेजी सेना में तैनात अपने ही अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी |      नीरा ने अपनी एक आत्मकथा भी लिखी है | इस आत्म कथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है -👇🏼      5 मार्च 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी सेठ छज्जूमल के घर जन्मी नीरा आर्य आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सक्रिय सिपाही थीं, जिन पर अंग्रेजी सरकार ने , इनपर भी गुप्तचर होने का झूठा आरोप लगाया था।       बीरबाला नीरा ​को "…

Holi colors with hubbub ;- होली के रंग, हुड़दंग के संग

helpsir.blogspot.com. Holi colors with hubbub ;- होली के रंग, हुड़दंग के संग आदरणीय सम्पादक जी
                           सादर प्रणाम ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।बसंत पंचमी के दिन ही गाँव के माली द्वारा होली का ढाह गाड़ दिया जाता है।जो भक्त प्रहलाद के प्रतीक स्वरूप गाड़ा जाता है।लोकगीत --"गड़िगा बसंता का ढ़ाहु बिना होली खेले न जाबै।"काफी प्रचलित लोकगीत है।
होलीगीत और लोकगीत "फाग"से बसंत पंचमी के बाद दसों दिशाएं गुंजायमान होने लगती हैं।प्रकृति नव पुष्पों और नई कोपलों नव पत्तों से धरा का नया श्रंगार करती है।पेंड़़-पौधे नये वस्त्र धारण करते हैं।         कभी होली गीत "फाग"बसंत पंचमी के बाद से हर गाँव गली मोहल्ला में फाग के आयोजन हुआ करते थे।घर-घर होली के बल्ले गोबर से उपलों की शक्ल में बनाए जाते थे।महीनों पहले से कचरी-पापड़ बनना शुरू हो जाते थे।फाग मण्डलियां शाम होते ही गायन प्रस्तुत करती थी।
 हर्सोल्लास का त्योहार  बड़े हर्षोल्लास से उमंग से लोग होली के हुड़दंग में शामिल होते थे।आपसी बैर भाव मिटाकर होली मिलते थे।पर आज मंहगाई तथा आप…

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मे चुनाव एक पर्व ;

helpsir.blogspot.com दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मेचुनाव एक पर्व  आदरणीय सम्पादक जी 
                           सादर प्रणाम         दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में चुनाव पर्व की घोषणा कल दि०10-03-2019 को चुनाव पर्व की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो चुकी है।चुनावी बिगुल बज चुका है।राजनीतिक दलएन.डी.ए.तथा यू.पी.ए. रूपी पाण्डव और कौरव सेना में शामिल होकर चुनावी महाभारत फतेह करनें के इरादे से 2019 लोकसभा रूपी कुरूक्षेत्र में कूद पड़े हैं। 29 मई को मतगणना में सभी दलों के प्रदर्शन का परिणाम घोषित हो जाएगा।         अगर वास्तविक चुनावीपरिवेशपर समीक्षात्मक नजर ड़ाली जाय,तो राजनीति मे कोई किसी का न तो स्थाई मित्र होता है न ही स्थाई दुश्मन। एक दूसरे के प्रतिद्वंदी  भी स्वार्थ के वशीभूत होकर केवल जीत के लिये किसी भी दल से टिकट पाने की कोशिश मे लग जाते हैं।

       सभी दल पूरे दम-खम के साथ खम ठोंक रहे हैं।लोकतंत्र मंदिर के पुजारी यानि मतदाता पाँच वर्ष में एक बार होनें वाली पूजा में आहुति डालनें को तैयार हैं।भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव में सारी दुनिया की निगाहें टिकी रहती हैं…