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जानलेवा बुखार

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आदरणीय सम्पादक जी
                        सादर प्रणाम


       गर्मियों की शुरूआत होते ही तराई क्षेत्रों में जानलेवा दिमागी बुखार की दस्तक शुरू हो जारी है।यह दिमागी बुखार बिना सौ-दो सौ बच्चों की बलि लिए मानता ही नहीं है।जब तक स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद से जागता है।सौ-दो सौ बच्चों की बलि चढ़ चुकी होती है।कभी गोरखपुर, जौनपुर, बिहार में अपनी जानलेवा दस्तक देता ही रहता है।इसे इंसेफेलाइटिस, दिमागी बुखार,जापानी बुखार चमकी बुखार आदि की संज्ञा दी जाती है।
         इस बार बिहार के मुजफ्फरपुर में इसने अपनी राजधानी बनाई।अस्पतालों में लगभग 200 से अधिक बच्चों की बलि ले चुका है।यह आंकड़े तो अस्पताल में भर्ती मरीजों की है।प्राइवेट अस्पतालों और बिना भर्ती के मरने वाले बच्चों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।बिहार के मुजफ्फरपुर में इसे चमकी बुखार की संज्ञा से नवाजा गया है।हर बार गर्मी से लेकर वर्षा तक इस बुखार के संक्रमण का भय रहता है।

       सरकार हर बार इस बुखार पर रिसर्च करवाने का दावा करती है।मगर यह अपने पांव पसारने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखता है।सरकार से निवेदन है कि समय पूर्व ही इस बुखार पर लगाम लगाने की कृपा करें।ताकि यह बुखार अपने कहर से निर्दोष मासूम बच्चों की बलि न ले सके।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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                             सादर प्रणाम


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