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रचनात्मक विपक्ष का अभाव


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आदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम

       विगत सरकार के(2014--2019)कार्यकाल के दौरान पूरे पाँच वर्ष कांग्रेस ने लगातार संसद बाधित रखी।कभी भी सुचारू और सृजनात्मक, रचनात्मक विपक्ष की भूमिका में नजर ही नहीं आई।मोदी और मोदी सरकार की बुराई में ही पाँच साल निकाल दिया।जन हित,समाज हित,लोक हित,में विपक्ष ने कभी भी सक्रियता नहीं निभाई।
      आज पारदर्शिता का युग है।युवा,और शिक्षित वर्ग सब कुछ देखता और समझता है।अब वह दिन गए जब जनता को लालीपॉप थमाकर पूरे पाँच वर्ष आप मलाई खाते रहते थे।अब जनता पढ़ी-लिखी और समझदार है।उसे सबसे पहले राष्ट्र हित दिखता है।और यह सही भी है।
       राष्ट्र हित से बढ़कर कोई हित हो ही नहीं सकता।पूरे पाँच साल संसद में हो-हुल्लड़ कर आप साबित क्या करना चाहते हैं? संसद किसी के बाप की बपौती नहीं है।यह लोकतंत्र है जो अच्छा काम करेगा।जनता उसी को सिर-आँखों पर बिठाएगी।दुबारा संसद जाने के लिए काम करना जरूरी है।

         इस बार फिर विपक्ष नें वहीं पुरानी वाली नौटंकी शुरू कर दी है।"एक राष्ट्र, एक चुनाव"के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए सरकार ने गोष्ठी बुलाई है।पहले,माया-ममता नें किनारा किया।फिर ऐन मौके पर कांग्रेस ने भी पलटी मार दी।यह सब क्या है?इस नाटकबाजी का मतलब आखिर क्या है?दो बार से आपको नेता प्रतिपक्ष की भूमिका के लिए आवश्यक सीटें भी नहीं मिल रही हैं।फिर भी आपकी नाटकबाजी और पैतरेबाजी में तनिक भी कमी नहीं आ रही है।आप अपनी हार की समीक्षा क्यों नहीं करते? कमी दूर करने का गम्भीर प्रयास क्यों नहीं करते?आप सरकार की मंशानुरूप चलने का प्रयास करें।सरकार के कदम से कदम मिलाकर चलें।केवल मोदी को गाली देनें,कोसने से ही विपक्ष नहीं बनता।इससे मोदी की ख्याति और बढ़ती जाती है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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                             सादर प्रणाम


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