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वृहत्तर भारत

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम

        भारत वैसे तो भौगोलिक दृष्टिकोण से एक प्राय द्वीप है।लेकिन यदि वृहत्तर भारत की कल्पना की जाय तो हम किसी महाद्वीप से कम नहीं हैं।ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश रूपी हमारी भुजाओं को काट देनें के बाद भी हम एक विशाल देश के रूप में हैं।क्षेत्रफल और जनसंख्या के दृष्टिकोण से हम सुदृढ़ हैं।जनसंख्या में तो हम चीन को पछ़ाड़कर एक नं.पर पहुंचने के बिल्कुल करीब हैं।
          भगवान नें हमें प्राकृतिक सम्पदा देने में कोई भी कंजूसी नहीं की है।वन सम्पदा, वनौषधि सम्पदा, हिम सम्पदा,पशुधन, पक्षीधन,खनिज ईंधन ,नदी जल,को हाथों से भगवान नें भारत को लुटाया है।सुबह-सबेरे कोयल की तान,मयूर नृत्य, पक्षियों की चहचहाहट, मधुर कलरव गान से आम जनमानस के मन को मुग्ध कर देती है।नदियों की कल-कल,छल-छल ध्वनि कानों में प्रकृति का संगीत की मधुर ध्वनि घोलती है।भारत प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर और प्राकृतिक आपदा से दूर है।

    भारत को अगर किसी ने बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है तो मुस्लिमों और बामपंथियों नें।मुस्लिमों की वजह से ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंग्लादेश के रूप में विभाजन झेलना पड़ा है।बामपंथियों के कारण भारत के कई प्रांत नक्सलवाद रूपी कैंसर से पीड़ित हैं।
       उपरिवर्णित इन दोनों मतावलंबियों ने भारत की आर्थिक, सांस्कृतिक,धार्मिक आस्था पर लगातार चोट करके भारी मात्रा में आघात पहुंचाया है।अब समय आ गया है कि इन दोनों भारत विरोधियों से कड़ाई से निपटा जाना चाहिए।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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होलीगीत और लोकगीत "फाग"से बसंत पंचमी के बाद दसों दिशाएं गुंजायमान होने लगती हैं।प्रकृति नव पुष्पों और नई कोपलों नव पत्तों से धरा का नया श्रंगार करती है।पेंड़़-पौधे नये वस्त्र धारण करते हैं।         कभी होली गीत "फाग"बसंत पंचमी के बाद से हर गाँव गली मोहल्ला में फाग के आयोजन हुआ करते थे।घर-घर होली के बल्ले गोबर से उपलों की शक्ल में बनाए जाते थे।महीनों पहले से कचरी-पापड़ बनना शुरू हो जाते थे।फाग मण्डलियां शाम होते ही गायन प्रस्तुत करती थी।
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आदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम


      भारत के दो दुश्मन चीन और पाकिस्तान भारत की छाती पर आखिर कब तक मूंग दलते रहेंगे।भारत नें संयुक्त राष्ट्र संघ से दो बार आतंकी मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने के लिए प्रयास किए।लेकिन चीन की अड़ंगेबाजी के कारण चीन का प्रश्रयदोनों बार मुँह की खानी पड़ी।
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