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मुस्लिमों का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त हो।

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आदरणीय सम्पादक जी

                             सादर प्रणाम

       देश की आजादी के समय मुस्लिम आबादी जरूर कम थी।महात्मा गांधी की जिद और तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के मुस्लिम प्रेम नें मुसलमानों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया था।यह एक सर्वमान्य सत्य है कि मुसलमानों में हमेशा से ही देशप्रेम की कमी थी।ए.पी.जे.अब्दुल कलाम और वीर अब्दुल हमीद जैसे अपवादों को छोंड़कर अक्सर मुसलमानों का भारत के संविधान के प्रति कभी भी आदर,सम्मान नहीं था।हमेशा से ही इन्हें बन्देमातरम् से परहेज़ रहा है।
        यह खाते और जीते तो हिन्दुस्तान का हैं,परन्तु ( गुणगान ) बजाते पाकिस्तान का हैं।भारत की जनसंख्या नीति के अनुसार हम दो हमारे दो की नीति रही है।लेकिन यह हम पाँच हमारे पच्चीस के सिद्धांत पर चलते हैं।इनका विश्वास शरिया कानून ही रहा है।
       इनका भारत के संविधान और कानून को न मानना ही हमेशा से सिद्धांत रहा है।अब समय आ गया है इनकी आबादी पाकिस्तान से भी अधिक हो गई है।कुपोषण भी सबसे ज्यादा इसी वर्ग में है।अशिक्षा, भुखमरी भी इनकी ज्यादा बच्चे पैदा करने के कारण ही इसी वर्ग में सर्वाधिक रही है।
       इतिहास गवाह है जहाँ इनकी जनसंख्या बढ़ी है।हिन्दू कटे हैं।आज तक सभी राजनीतिक दलों की तुष्टिकरण नीति के कारण रोजा-ईद पर चुनाव के समय पर राजनेताओं ने जालीदार टोपी जरूर पहनी है।
      .पहली बार नरेन्द्र मोदी सरकार ने मजारों पर माथा नहीं टेका है।और मंदिरों पर पूजा अर्चना की है।टीका,तिलक की प्रथा चलाई है।इससे पूर्व चुनाव के समय बुखार उतरवाने बुखारी के पास फतवा जारी करवाने जरूर जाते थे।इस बार बुखारी इन्तज़ार करते रह गए।कोई दल नहीं गया।और प्रचंड बहुमत से नरेन्द्र मोदी ने सरकार बनाई।

      अब समय आ गया है कि मुसलमानों का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त किया जाय।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों,रायबरेली।

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