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Showing posts from June, 2019

लुप्त होते महिला मंगल गीत

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आदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम        लोकगीतों की कड़ी में महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले मंगलगीतों का प्रथम स्थान हुआ करता था।महिलाओं द्वारा शादी ब्याह,मुण्डन, छेदन आदि मांगलिक सुअवसरों पर विभिन्न प्रकार के गीत हुआ करते थे।यथा---उड़द और मूंग की बड़ियां बनाए जाने के समय के गीत,मण्डप रोपित होने पर प्रतिदिन सांझ न्यौतने के गीत,तेल चढ़ाए जाने के समय के गीत,द्वार-चार के गीत,स्वागत गीत,खाना खाने के समय के गीत,ब्याहा-भात के समय के गीत,कलेवा के समय के गीत,विदाई गीत आदि।इसके अतिरिक्त होली गीत,गोबर के बल्ला बनाए जाने के समय के गीत।रक्षाबंधन, नागपंचमी के गीत,सावन पर झूला गीत।
      कुल मिलाकर हर मांगलिक अवसर के अलग-अलग महिला मंगल गीतों की सिरीज हुआ करती थी।समय बदला महिला मंगल गीतों के स्थान पर फिल्मी गीत गाए जाने लगे।पुराने जमाने के महिला गीतों में सुर-ताल तथा रस हुआ करता था।अब के फिल्मी गानों में फूहड़ता, अश्लीलता ही परोसी जा रही है।द्विअर्थी गीतों का चलन चल पड़ा है।
     हमारे यहाँ शास्त्रोक्त विधि से वैदिक रीति से शादी का विधान रहा है।उसी अनुसार मांग…

जानलेवा बुखार

heipsir.blogspot.comआदरणीय सम्पादक जी
                        सादर प्रणाम

       गर्मियों की शुरूआत होते ही तराई क्षेत्रों में जानलेवा दिमागी बुखार की दस्तक शुरू हो जारी है।यह दिमागी बुखार बिना सौ-दो सौ बच्चों की बलि लिए मानता ही नहीं है।जब तक स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद से जागता है।सौ-दो सौ बच्चों की बलि चढ़ चुकी होती है।कभी गोरखपुर, जौनपुर, बिहार में अपनी जानलेवा दस्तक देता ही रहता है।इसे इंसेफेलाइटिस, दिमागी बुखार,जापानी बुखार चमकी बुखार आदि की संज्ञा दी जाती है।
         इस बार बिहार के मुजफ्फरपुर में इसने अपनी राजधानी बनाई।अस्पतालों में लगभग 200 से अधिक बच्चों की बलि ले चुका है।यह आंकड़े तो अस्पताल में भर्ती मरीजों की है।प्राइवेट अस्पतालों और बिना भर्ती के मरने वाले बच्चों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।बिहार के मुजफ्फरपुर में इसे चमकी बुखार की संज्ञा से नवाजा गया है।हर बार गर्मी से लेकर वर्षा तक इस बुखार के संक्रमण का भय रहता है।       सरकार हर बार इस बुखार पर रिसर्च करवाने का दावा करती है।मगर यह अपने पांव पसारने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखता है।सरकार से निवेदन है कि समय पूर्व …

पुरातनम् बीज बनाम अद्यतन

helpsir.blogspot.comआदरणीय सम्पादक जी
                               सादर प्रणाम        पुराने जमाने में रासायनिक खादों, उर्वरकों, कीटनाशकों के प्रयोग के बिना केवल गोबर की खाद से जो अन्न पैदा किया जाता था उस अन्न की खुश्बू, स्वाद लाजबाब होता था।खेत,खलिहानों, बागों,चरागाहों में चरकर आई गाय,भैंसों के दूध में गजब का स्वाद और प्रचुर मात्रा में औषधीय गुण होते थे।
       तब के देशी घी में भी गजब की सुगंध पाई जाती थी।खरा करने हेतु कड़ाही में गरम करते वक्त देशी घी की मोहक सुगंध फैल जाया करती थी।जिससे पड़ोसियों को भी पता हो जाता था कि अमुक घर में देशी घी बन रहा है।
     आयुर्वेद में अनुपान के रूप में जिस दूध का वर्णन मिलता है वह छुट्टि चरने वाली देशी गाय का दूध ही माना जाता है।खूंटे से बांधकर नांद में चारा,भूसा खिलाने वाली गाय के दूध में उतने औषधीय गुण नहीं होते हैं जितना छुट्टा चरने वाली गाय के दूध में पाए जाते हैं।
      देशी भूने चने में जो खुश्बू, सोंधापन गोबर की खाद से उपजाए चने में होती थी वह उर्वरकों से उत्पादित चनों में नहीं पाई जाती है।औषधीय गुण भी नहीं पाए जाते हैं।
      पुराने जमाने …

रचनात्मक विपक्ष का अभाव

helpsir.blpgspot.comआदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम       विगत सरकार के(2014--2019)कार्यकाल के दौरान पूरे पाँच वर्ष कांग्रेस ने लगातार संसद बाधित रखी।कभी भी सुचारू और सृजनात्मक, रचनात्मक विपक्ष की भूमिका में नजर ही नहीं आई।मोदी और मोदी सरकार की बुराई में ही पाँच साल निकाल दिया।जन हित,समाज हित,लोक हित,में विपक्ष ने कभी भी सक्रियता नहीं निभाई।
      आज पारदर्शिता का युग है।युवा,और शिक्षित वर्ग सब कुछ देखता और समझता है।अब वह दिन गए जब जनता को लालीपॉप थमाकर पूरे पाँच वर्ष आप मलाई खाते रहते थे।अब जनता पढ़ी-लिखी और समझदार है।उसे सबसे पहले राष्ट्र हित दिखता है।और यह सही भी है।
       राष्ट्र हित से बढ़कर कोई हित हो ही नहीं सकता।पूरे पाँच साल संसद में हो-हुल्लड़ कर आप साबित क्या करना चाहते हैं? संसद किसी के बाप की बपौती नहीं है।यह लोकतंत्र है जो अच्छा काम करेगा।जनता उसी को सिर-आँखों पर बिठाएगी।दुबारा संसद जाने के लिए काम करना जरूरी है।इस बार फिर विपक्ष नें वहीं पुरानी वाली नौटंकी शुरू कर दी है।"एक राष्ट्र, एक चुनाव"के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए सरकार ने …

वृहत्तर भारत

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम        भारत वैसे तो भौगोलिक दृष्टिकोण से एक प्राय द्वीप है।लेकिन यदि वृहत्तर भारत की कल्पना की जाय तो हम किसी महाद्वीप से कम नहीं हैं।ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश रूपी हमारी भुजाओं को काट देनें के बाद भी हम एक विशाल देश के रूप में हैं।क्षेत्रफल और जनसंख्या के दृष्टिकोण से हम सुदृढ़ हैं।जनसंख्या में तो हम चीन को पछ़ाड़कर एक नं.पर पहुंचने के बिल्कुल करीब हैं।
          भगवान नें हमें प्राकृतिक सम्पदा देने में कोई भी कंजूसी नहीं की है।वन सम्पदा, वनौषधि सम्पदा, हिम सम्पदा,पशुधन, पक्षीधन,खनिज ईंधन ,नदी जल,को हाथों से भगवान नें भारत को लुटाया है।सुबह-सबेरे कोयल की तान,मयूर नृत्य, पक्षियों की चहचहाहट, मधुर कलरव गान से आम जनमानस के मन को मुग्ध कर देती है।नदियों की कल-कल,छल-छल ध्वनि कानों में प्रकृति का संगीत की मधुर ध्वनि घोलती है।भारत प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर और प्राकृतिक आपदा से दूर है।    भारत को अगर किसी ने बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है तो मुस्लिमों और बामपंथियों नें।मुस्लिमों की वजह से ईरान, अफगान…

भोजन की बर्बादी

helpsir.blogspot.inआदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम         भोजन का कण और आनन्द का क्षण कभी बर्बाद नहीं करना चाहिए।इसी एक -कण भोजन के लिए हम दिन रात कड़ी,हांड़-तोड़ मेहनत करते हैं।अन्न देवता के लिए ही किसान भगवान दिन-रात कठिन परिश्रम, हांड़-तोड़ मेहनत करके ही अन्न उपजाता है।चन्द्र भूषण त्रिवेदी"रमई काका"ने अपनी कृति "बौछार"में बड़ा ही सुन्दर विवरण अन्न देवता के लिए लिखा है।-----कहि रही घरैरिनि मुनुवा से रे पूतु अन्नु बिखराव न तुम।ए बड़े परिश्रम के मोती इनका माटी म मिलाव न तुम।।"अर्थात इन परिश्रम के मोती को बर्बाद न करने की सलाह कवि ने दी है।
        हमारे यहाँ शादी,पार्टी में खाने से ज्यादा भोजन पत्तलों में बर्बाद कर दिया जाता है।तथा शादी-पार्टी के बाद में बचा भोजन भी व्यर्थ में फेंक दिया जाता है।बस एक ही बात कही जाती है कम नहीं पड़ना चाहिए ताकि बेइज्जती न होने पाए।बर्बाद भले ही हो जाए।ऐसा नहीं है खाने वालों से निवेदन है कि जितना खाना खा सको उतना ही भोजन पत्तलों,प्लेटों में निकालना चाहिए।।
        आंकड़े गवाह हैं कि हमारे भारत देश में जितने …

दांतो की पीड़ा की परेशानियां और उनका इलाज

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इलाज ;  दांतो की पीड़ा की परेशानियां और उनका इलाज
हमारे शरीर में दांतों का स्थान अन्य अंगों की तरह बहुत महत्वपूर्ण तो नहीं है फिर भी यह शरीर का अभिन्न अंग है छोटे बच्चे युवा किशोर जवान और वृद्ध सभी इन परेशानियों से कभी न कभी परेशान होते ही हैं हमसभी जानते हैं कि दांतों का मुख्य कार्य मुंह में ले जाए गए भोजन कोपीसना और कुचलकर लुग्दीबनाना होता है | दांतो की कोई भी परेशानी होने पर जब दांत भोजन को पीसकर लुगदी नहीं बना पाते हैं , तब भोजन खंडित रूप में ही आमाशय में प्रवेश कर जाता है | जिससे भोजन का बहुत बड़ा भाग पच नही पाता है | भोजन का ठीक-ढंग से पाचन न हो पाने पर शरीर में तरह तरह की परेशानियां तथा बीमारियां होने लगती है | इसलिए दातों के रखरखाव की बहुत ज्यादा आवश्यकता है | इसीलिए दांतों की देखभाल आदमी की अनिवार्य आवष्यकताओंके अंतर्गत आती है
दांत क्यों गिरते हैं
दंत रोग विशेषज्ञों के अनुसार 60 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लगभग 80% महिलाओं के तथा लगभग 70% पुरुषों के दांत गिरने शुरू हो जाते हैं | इसके अलावा अगर आप पाश्चात्य देशों के बजाय , पूर्व दिशा में नि…

प्रतियोगी परीक्षाओं मे प्रथम स्थान पर पुरुष

helpsir.blogspot.inआदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।         मा०शि०प०उ०प्र०बोर्ड प्रयागराज की हाई स्कूल और इण्टर मीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर लड़कियों का जादू सिर चढ़कर बोलता है।अर्थात प्रथम स्थान पर हमेशा से ही लड़कियों का नाम होता चला आ रहा है।इसका एक सबसे बड़ा कारण यह भी माना जाता रहा है कि लड़कियों का परीक्षा सेन्टर हमेशा स्थाई रहता है जबकि लड़कों को दूसरे सेन्टर पर परीक्षा देने जाता पड़ता है।       मेरा यह मानना कतई नहीं है कि लड़कियों में प्रतिभाओं की कमी होती है।बल्कि स्थाई सेन्टर जाना पहचाना होता है तथा स्थाई सेन्टर पर परीक्षा देने के कारण मानसिक द्वंद्व अपेक्षाकृत कम होता है।जबकि लड़कों को इसके विपरीत अनजाने माहौल में परीक्षा देने के कारण मानसिक तनाव अधिक होता है।जिसके कारण परीक्षा देने में लड़कियों की अपेक्षा कम सहूलियत होती है।          यही  कारण है कि हाईस्कूल, इण्टर मीडिएट परीक्षा में लड़कियाँ लड़कों से बाजी मार ले जाती हैं।नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में लड़के ही प्रथम स्थान पर होते हैं।असली प्रतिभा का प्रदर्शन इन राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में ही देखने को म…

विश्व पर्यावरण दिवस

helpsir.blogspot.inआदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम        आज विश्व पर्यावरण दिवस है।इस दिन हम सबको मिलकर पर्यावरण की रक्षा की शपथ उठानी होगी।भावी पीढ़ियों की सुरक्षा हेतु कम से कम एक पेंड़ अवश्य लगाना चाहिए।भगवान ने हमें प्राकृतिक सम्पदा दोनों हाथों से लुटाई थी।यह राम,कृष्ण की धरती है।भगवान नें हमें प्राकृतिक सम्पदा देने में कोई कंजूसी नहीं की थी।
           हम प्राकृतिक सम्पदा का दोहन करते-करते प्राकृतिक आपदा को निमंत्रण दे बैठे।प्रकृति का वरदान पेंड़ पौधों,वनस्पति से हमारा भण्डार भरा हुआ था।लेकिन हमने नादानी और नासमझी बश लालच वश हमने इमारती लकड़ी और ईंधन के लिए अमूल्य प्राकृतिक सम्पदा को काट डाला।और जलवायु असंतुलन की समस्या से दो-चार हो रहे हैं।
        त्रहमारे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रीजी नें कम से कम एक पेंड़ लगाकर सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर साझा करने की सलाह जारी की है।जो एक स्वागतयोग्य कदम है।जनसहभागिता और सरकार की सहभागिता से ही ऐसे लक्ष्य पूरे किए जा सकते हैं।विकास के नाम पर राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के समय हमने हजारों पेड़ो को काटकर धराशायी कर दिया। …

मुस्लिमों का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त हो।

helpsir.blogspot.comआदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम       देश की आजादी के समय मुस्लिम आबादी जरूर कम थी।महात्मा गांधी की जिद और तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के मुस्लिम प्रेम नें मुसलमानों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया था।यह एक सर्वमान्य सत्य है कि मुसलमानों में हमेशा से ही देशप्रेम की कमी थी।ए.पी.जे.अब्दुल कलाम और वीर अब्दुल हमीद जैसे अपवादों को छोंड़कर अक्सर मुसलमानों का भारत के संविधान के प्रति कभी भी आदर,सम्मान नहीं था।हमेशा से ही इन्हें बन्देमातरम् से परहेज़ रहा है।
        यह खाते और जीते तो हिन्दुस्तान का हैं,परन्तु ( गुणगान ) बजाते पाकिस्तान का हैं।भारत की जनसंख्या नीति के अनुसार हम दो हमारे दो की नीति रही है।लेकिन यह हम पाँच हमारे पच्चीस के सिद्धांत पर चलते हैं।इनका विश्वास शरिया कानून ही रहा है।
       इनका भारत के संविधान और कानून को न मानना ही हमेशा से सिद्धांत रहा है।अब समय आ गया है इनकी आबादी पाकिस्तान से भी अधिक हो गई है।कुपोषण भी सबसे ज्यादा इसी वर्ग में है।अशिक्षा, भुखमरी भी इनकी ज्यादा बच्चे पैदा करने के कारण ही इसी वर्ग में सर्वाधिक रही है।
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