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बिखरा साम्राज्य अक्षम नेतृत्व

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आदरणीय सम्पादक जी
                          सादर प्रणाम


         कभी कांग्रेस के सामने बड़े-बड़ो की चुनाव में जमानतें जब्त हो जाया करती थी।1951--1984 तक कांग्रेस का भारतीय राजनीति में स्वर्णिम युग कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।इसमे भी डी.आई.आर.मीसा अर्थात इमरजेंसी के काले अध्याय को हटा दिया जाय तो सब स्वर्णिम ही कहा जाएगा।

        इन्दिरा गांधी का कुशल नेतृत्व और कुशल रणनीतिक क्षमता के कारण ही ढ़ाई साल में ही प्रचंड बहुमत से जीती जनता पार्टी सरकार को ढ़ाई साल में ही घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।और फिर विशाल बहुमत से कांग्रेस सरकार गठित कर दी थी।अगर सेनापति ही कमजोर होता है तो सैनिक लूट-पाट करने ही लगते हैं।यहीं हाल राजीव गांधी जी के शासन काल में शुरू हो गया।
        राजीव गांधी राजनीति के चतुर खिलाड़ी नहीं थे।चापलूसों,धोखेबाजों नें यहीं से घोटालों की नींव रखना शुरू कर दिया।इसके बाद कांग्रेस के शासन काल को यदि घोटालों की सरकार कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
          यही कारण है कि लगातार कांग्रेस की नेतृत्व क्षमता कमजोर होती गई और घोटालों, लूट-पाट का दौर बढ़ता गया।अब कांग्रेस की हालत यह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सांसदों की संख्या केवल 52 पर सिमट चुकी है।यह संख्या विपक्षी दल की आवश्यक सांसद संख्या से भी तीन कम है।
         इस लोकसभा चुनाव2019 में जनता नें जातिवाद, परिवार वाद,भाई-भतीजावाद को लगभग नकार दिया है।राष्ट्र वाद,विकास वाद इन सभी वादों पर भारी पड़ा है।अब देश बदल चुका है।देश को गाली देनें वालों कन्हैया कुमार जैसे नेताओं और उसका समर्थन करने वाले बामदलों तथा कांग्रेस जैसे दलों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

        अब समय आ गया है कि कांग्रेस जैसे दलों को आत्म मंथन करने की जरूरत है।तथा ए.सी.कमरों को त्याग कर जनता के बीच आकर जनता के हित में काम करके ही कामयाबी हासिल की जा सकती है।केवल हलो,हाय,टा-टा से चुनाव के समय में काम चलने वाला नहीं है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों,रायबरेली।

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