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सत्ता सुन्दरी के लिए खूनखराबा

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आदरणीय सम्पादक जी

                             सादर प्रणाम

        सत्ता, सल्तनत, तख्त-ओ-ताज के लिए अति प्राचीन समय से ही खून-खराबा, कत्ल-ओ-गारत होते चले आ रहे हैं।राजमद में चूर होकर अनेकों, राजाओं, सुल्तानों ,सम्राटों, नें गैरों-अपनों के खून करके ही राजतिलक करवाए हैं।इसका एक बहुत लम्बा इतिहास रहा है।इतिहास में अनेकों किस्से-कहानियां भरी पड़ी हैं।इस धरती पर एक से बढ़कर एक राजा,सुभट,सम्राट,महाराजा वीर ,बहादुर हुए और धरती को अपनों-गैरों के खून से लाल किए है।

       अंग्रेजों के जाने बाद भारत में लोकतंत्र का राज कायम हुआ।लेकिन पहले प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने ही लोकतंत्र की हत्या कर प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए।सरदार वल्लभ भाई पटेल को 7 वोट तथा जवाहर लाल नेहरू जी को 1 वोट मिला था।लेकिन मोहनदास करमचंद गांधी जी की कृपा से तथा अपने धन-बल पर आखिरकार प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने में श्री जवाहरलाल नेहरु जी ही सफल हुए थे।तब से अब तक कभी-कभी लोकतंत्र की हत्या या लोकतंत्र के लहूलुहान होने के समाचार मिलते ही रहे हैं।

        ताजा घटना क्रम पर नजर डालें तो दि०14-05-2019 को उ०प्र०के वी.वी.आई.पी.कहे जाने वाले जनपद रायबरेली में सदर विधायक सुश्री अदिति सिंह पर जानलेवा हमला करके एक बार फिर लोकतंत्र की हत्या का कुत्सित प्रयास किया गया।अदिति सिंह किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं।आप रायबरेली सदर के 5 बार के बाहुबली विधायक श्री अखिलेश सिंह की पुत्री हैं।अखिलेश सिंह उ०प्र०के 5 वें नं. के बाहुबली विधायक रहे हैं।जिनको हराने के लिए सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी ने सम्मिलित प्रयास किया था।कड़ी मेहनत करके वोट मांगें थे लेकिन अखिलेश सिंह अपराजेय रहे थे।
        मोदी लहर में भी अखिलेश सिंह अपराजेय रहे थे।कभी भी सदर विधायक श्री अखिलेश सिंह पराजित नहीं हुए।इस बार स्वेच्छा से अपनी पुत्री अदिति सिंह के लिए राजनीति छोड़कर रायबरेली सदर सीट जितवाने में कामयाब हुए थे।

        अखिलेश सिंह की ही कृपा से कांग्रेस केM.L.C.श्री दिनेश प्रताप सिंह जी अपने सगे भाई श्री अवधेश प्रताप सिंह को जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर कांग्रेस पार्टी के रूप में जितवाने में सफल हुए थे।स्वयं भी कांग्रेस से M.L.C. बनने में कामयाबी हासिल की थी।समय ने करवट बदली और दिनेश प्रताप सिंह भा.ज.पा.में चले गए और सोनिया गांधी के सामने 2019 लोकसभा चुनाव में भा.ज.पा.के टिकट पर चुनाव लड़ा।परिणाम अभी भविष्य के गर्भ में है।
      कांग्रेस के पास 31 जिला पंचायत सदस्यों ने पहले डी.एम.के पास परेड की।लेकिन शासन प्रशासन के कृपापात्र दिनेश प्रताप सिंह की कुर्सी पर कोई आँच नहीं आई।मजबूर होकर कांग्रेस पार्टी हाईकोर्ट 31 जिला पंचायत सदस्यों के शपथपत्र के साथ पहुंची।हाईकोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए मतदान के लिए 14 मई की तिथि नियत की थी।
        दिनेश प्रताप सिंह जी के समर्थकों ने रायबरेली के सारे प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध कर दिया।N.H.24 B के चुरुआ टोल प्लाजा से हरचंद पुर के कठवारा तक मारपीट, फायरिंग होती रही।और पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बनी रही।अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले जिला पंचायत सदस्य श्री राकेश अवस्थी को बुरी तरह मारपीट कर मरणासन्न कर दिया।यह लोकतंत्र की हत्या नहीं तो और क्या है?

         जब 31 जिला पंचायत सदस्यों ने हाईकोर्ट और डी.एम.कार्यालय में परेड की है तो स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था से मतदान में रोड़े क्यों अटकाएं जा रहे हैं।तथा लोकतांत्रिक विधि से चुनी राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश और लोकतंत्र की रक्षा कर पानें में क्यों विफल है?

       जब वर्तमान विधायक का यह हाल है तो आम जनता के हाल का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।आम जनता की रक्षा राम भरोसे ही है।सत्ता शासन के मद में चूर सत्तानसीनों के लिए कानून प्रशासन मजाक की विषय वस्तु बनकर रह गई है।

         तुलसीदास ने रामायण में ठीक ही लिखा है।---समरथ को नहिं दोष गोसाईं।केवल राम जी नें भरत के लिए ही तुलसीदास के शब्दों में लिखा है-----
      भरतहिं होई न राजमद विधि,हरि,हर पद पाय।।        

            कबहुंकि कांजी सीकरनि क्षीर सिंधु बिलगाय।।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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