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supreme court kadakhal [ सुप्रीमकोर्ट का दखल



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आदरणीय सम्पादक जी
                          सादर प्रणाम

         भारत निर्वाचन आयोग के आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा नें यदि समय रहते बड़बोले नेताओं पर अंकुश लगाया होता तो सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना पड़ता।सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद भारत निर्वाचन आयोग के आयुक्त ने आदित्यनाथ योगी,आजमखाँ दोनों एक राशि वाले नामों वाले नेताओं पर 72 घंटे तथा मायावती, मेनका गांधी एक राशि वाली महिला नेत्रियों पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया है।
        चुनावों के समय सबसे पावरफुल संस्था भारत निर्वाचन आयोग अपने अधिकारों का निर्वहन किया होता तो सुप्रीम कोर्ट का अपना दखल नहीं देना पड़ता।श्री टी.एन.शेषन ने अपने अधिकारों का जमकर प्रयोग किया था।तबसे ही लोगों ने भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारों और शक्ति को जाना और पहचाना है।
       भारत के सबसे बड़े राजनीतिक घराने,और राष्ट्रीय नेताओं के खिलाफ ऐक्शन लेने का साहस ही कहाँ था? हनुमानजी की तरह "का चुप साधि रहे बलवाना।"जब शक्ति की याद दिलाई जाती है।तभी शक्ति का भान,गुमान होता है।
       इसी तरह जब सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग को उनकी असीमित शक्ति की याद दिलाई तो भारत निर्वाचन आयोग को अपनी ताकत का एहसास हुआ।और फौरन एक्शन में आकर अपनी शक्ति का उपयोग किया तथा उपरोक्त अ राशि तथा म राशि वाली पावरफुल क्रमशः पुरुष और महिला नेताओं पर प्रतिबंध आयद किया।भारत में यहीं विडम्बना रही है कि अधिकारों और शक्तियों से लैश विभिन्न विभागों के अधिकारियों के पास देश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने और शीर्षस्थ नेताओं के खिलाफ साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का सर्वथा अभाव रहा है।सुप्रीम कोर्ट ही समय-समय पर इनपर अंकुश लगाने का काम किया है।
          सभी शीर्षस्थ और अधिकार शक्ति सम्पन्न अधिकारियों को निष्पक्ष और विधि सम्मत कार्यवाही करने में डर और दबाव का सामना नहीं करना चाहिए।क्या कानून से बढ़कर कोई नेता या अभिनेता है?क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए ही है?

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।
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                             सादर प्रणाम


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