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विभिन्न स्तरों पर शिक्षा का अनवरत गिरता स्तर

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आदरणीय सम्पादक जी

                            सादर प्रणाम

         कभी इसी प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में पढ़कर आई.ए.एस.,पी.सी.एस.आदि उच्च पदों पर चयनित होते थे।इन्हीं स्कूलों में पढ़कर सी.एम.,पी.एम. तक पदों की शोभा बढ़ा चुके हैं।परन्तु खेद का विषय है कि सरकार और शिक्षासुधार के विद्वानों की कतिपय गलत नीतियों, और दूषित मानसिकता के कारण आज गलत सरकारी नीतियों तथा सरकारी उपेक्षा के कारण ही प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा का स्तर लगातार गिरता ही जा रहा है।

       सरकार ने अनेकों प्रलोभनों को देने के बाद भी स्तर सुधरता नजर नहीं आ रहा है।निःशुल्क शिक्षा, फ्री ड्रेस, कापी किताब मिड डे मील वजीफा आदि देने के बावजूद भी शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार नहीं हो रहा है।पढना सभी लोग प्राइवेट स्कूलों में ही चाहते हैं।लेकिन पढ़ाना सरकारी स्कूलों में ही चाहते हैं।

      अब सरकारी स्कूलों में बिल्डिंग और संसाधनों को ही देखा जा सकता है।तब सीमित संसाधनों और पेड़ों के नीचे बैठकर भी अच्छी पढ़ाई होती थी।अब अध्यापक पढ़ाना ही चाहते न ही छात्र पढ़ना चाहते हैं।केवल वेतन अच्छा चाहिए।इसके सापेक्ष प्राइवेट स्कूलों में कम वेतन के बावजूद भी अच्छा प्रदर्शन का दबाव रहता है।
       ऐसा नहीं है कि सरकारी स्कूलों में योग्य शिक्षकों की कमी है।केवल शिक्षक अपनी कुछ समस्याओं के कारण बच्चों को पढ़ाना ही नहीं चाहते हैं या फिर पढ़ा नही पा रहे हैं।एक जमाना था जब डिप्टी साहब का आगमन सुनकर ही स्कूलों की स्थिति चाक चौबंद हो जाया करती थी।आज स्थिति यह है कि डी.एम.,पी.एम.,सी.एम के भी आने पर भी वह भय कहीं दिखाई नहीं देता है।

        अतः सरकार से निवेदन है कि प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा का स्तर सुधारने की जरूरत है।शिक्षकों की जबाबदेही तय करने की जरूरत है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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                             सादर प्रणाम


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