Skip to main content

विभिन्न स्तरों पर शिक्षा का अनवरत गिरता स्तर

helpsir.blogspot.in
आदरणीय सम्पादक जी

                            सादर प्रणाम

         कभी इसी प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में पढ़कर आई.ए.एस.,पी.सी.एस.आदि उच्च पदों पर चयनित होते थे।इन्हीं स्कूलों में पढ़कर सी.एम.,पी.एम. तक पदों की शोभा बढ़ा चुके हैं।परन्तु खेद का विषय है कि सरकार और शिक्षासुधार के विद्वानों की कतिपय गलत नीतियों, और दूषित मानसिकता के कारण आज गलत सरकारी नीतियों तथा सरकारी उपेक्षा के कारण ही प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा का स्तर लगातार गिरता ही जा रहा है।

       सरकार ने अनेकों प्रलोभनों को देने के बाद भी स्तर सुधरता नजर नहीं आ रहा है।निःशुल्क शिक्षा, फ्री ड्रेस, कापी किताब मिड डे मील वजीफा आदि देने के बावजूद भी शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार नहीं हो रहा है।पढना सभी लोग प्राइवेट स्कूलों में ही चाहते हैं।लेकिन पढ़ाना सरकारी स्कूलों में ही चाहते हैं।

      अब सरकारी स्कूलों में बिल्डिंग और संसाधनों को ही देखा जा सकता है।तब सीमित संसाधनों और पेड़ों के नीचे बैठकर भी अच्छी पढ़ाई होती थी।अब अध्यापक पढ़ाना ही चाहते न ही छात्र पढ़ना चाहते हैं।केवल वेतन अच्छा चाहिए।इसके सापेक्ष प्राइवेट स्कूलों में कम वेतन के बावजूद भी अच्छा प्रदर्शन का दबाव रहता है।
       ऐसा नहीं है कि सरकारी स्कूलों में योग्य शिक्षकों की कमी है।केवल शिक्षक अपनी कुछ समस्याओं के कारण बच्चों को पढ़ाना ही नहीं चाहते हैं या फिर पढ़ा नही पा रहे हैं।एक जमाना था जब डिप्टी साहब का आगमन सुनकर ही स्कूलों की स्थिति चाक चौबंद हो जाया करती थी।आज स्थिति यह है कि डी.एम.,पी.एम.,सी.एम के भी आने पर भी वह भय कहीं दिखाई नहीं देता है।

        अतः सरकार से निवेदन है कि प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा का स्तर सुधारने की जरूरत है।शिक्षकों की जबाबदेही तय करने की जरूरत है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

Comments

Popular posts from this blog

Holi colors with hubbub ;- होली के रंग, हुड़दंग के संग

helpsir.blogspot.com. Holi colors with hubbub ;- होली के रंग, हुड़दंग के संग आदरणीय सम्पादक जी
                           सादर प्रणाम ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।बसंत पंचमी के दिन ही गाँव के माली द्वारा होली का ढाह गाड़ दिया जाता है।जो भक्त प्रहलाद के प्रतीक स्वरूप गाड़ा जाता है।लोकगीत --"गड़िगा बसंता का ढ़ाहु बिना होली खेले न जाबै।"काफी प्रचलित लोकगीत है।
होलीगीत और लोकगीत "फाग"से बसंत पंचमी के बाद दसों दिशाएं गुंजायमान होने लगती हैं।प्रकृति नव पुष्पों और नई कोपलों नव पत्तों से धरा का नया श्रंगार करती है।पेंड़़-पौधे नये वस्त्र धारण करते हैं।         कभी होली गीत "फाग"बसंत पंचमी के बाद से हर गाँव गली मोहल्ला में फाग के आयोजन हुआ करते थे।घर-घर होली के बल्ले गोबर से उपलों की शक्ल में बनाए जाते थे।महीनों पहले से कचरी-पापड़ बनना शुरू हो जाते थे।फाग मण्डलियां शाम होते ही गायन प्रस्तुत करती थी।
 हर्सोल्लास का त्योहार  बड़े हर्षोल्लास से उमंग से लोग होली के हुड़दंग में शामिल होते थे।आपसी बैर भाव मिटाकर होली मिलते थे।पर आज मंहगाई तथा आप…

Global threat - Terrorism China's cooperation i वैश्विक खतरा - आतंकवाद चीन का प्रश्रय

helpsir.blogspot.com
वैश्विक खतरा आतंकवाद को चीन का प्रश्रय
आदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम


      भारत के दो दुश्मन चीन और पाकिस्तान भारत की छाती पर आखिर कब तक मूंग दलते रहेंगे।भारत नें संयुक्त राष्ट्र संघ से दो बार आतंकी मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने के लिए प्रयास किए।लेकिन चीन की अड़ंगेबाजी के कारण चीन का प्रश्रयदोनों बार मुँह की खानी पड़ी।
      किन्तु जब इस बार भारत के अविचल प्रयासों से फ्रांस, अमेरिका, इंंग्लैण्ड के संयुक्त प्रयास किया,तो उन्हें भी चीन की ही अड़ंगेबाजी के कारण मुँह की खानी पड़ी है।
       आखिर चीन क्यों बार-बार आतंकियों को बचाता है। ऐसा करके वहविश्व पटलपर क्या संदेश देना चाहता है।

विश्व बिरादरी पाकिस्तान को साथ देने के लिए चीन पर कूटनीतिक दबाव बनाने में क्यों विफल हो जाता है?इसका सीधा और सटीक जवाब यही हो सकता है कि वह ( चीन)परोक्ष रूप से आतंकवाद का पोषण कर रहा है।
      यही कारण है कि अमेरिका, इंंग्लैण्ड, फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश अपने आतंकवाद के उन्मूलन के प्रयासों मे विफल हो जाते हैं। वास्तविकता के धरातल पर यह की चीन की…

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मे चुनाव एक पर्व ;

helpsir.blogspot.com दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मेचुनाव एक पर्व  आदरणीय सम्पादक जी 
                           सादर प्रणाम         दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में चुनाव पर्व की घोषणा कल दि०10-03-2019 को चुनाव पर्व की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो चुकी है।चुनावी बिगुल बज चुका है।राजनीतिक दलएन.डी.ए.तथा यू.पी.ए. रूपी पाण्डव और कौरव सेना में शामिल होकर चुनावी महाभारत फतेह करनें के इरादे से 2019 लोकसभा रूपी कुरूक्षेत्र में कूद पड़े हैं। 29 मई को मतगणना में सभी दलों के प्रदर्शन का परिणाम घोषित हो जाएगा।         अगर वास्तविक चुनावीपरिवेशपर समीक्षात्मक नजर ड़ाली जाय,तो राजनीति मे कोई किसी का न तो स्थाई मित्र होता है न ही स्थाई दुश्मन। एक दूसरे के प्रतिद्वंदी  भी स्वार्थ के वशीभूत होकर केवल जीत के लिये किसी भी दल से टिकट पाने की कोशिश मे लग जाते हैं।

       सभी दल पूरे दम-खम के साथ खम ठोंक रहे हैं।लोकतंत्र मंदिर के पुजारी यानि मतदाता पाँच वर्ष में एक बार होनें वाली पूजा में आहुति डालनें को तैयार हैं।भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव में सारी दुनिया की निगाहें टिकी रहती हैं…