Skip to main content

आगजनी की बढ़ती घटनाएं और बचाव की जरुरत

helpsir.blogspot.com
आदरणीय सम्पादक जी

                               सादर प्रणाम

       हिन्दी भाषा मे आग स्त्रीलिंग शब्द है।कहावत है कि आग गर्मियों में मायके में निवास करती है।होली करने मायके आती है।तब से गर्मी भर मायके में ही निवास करती है।जरा सी ही चिंगारी से उग्र रूप धरकर पूरा गांव जला देने पर आमादा हो जाती है।पवन देव का सहयोग मिलने पर आग की लपटें आकाश छूने की कोशिश करने लगती है।
    आग का जानी दुश्मन पानी ही इस पर काबू पा सकता है।आग भड़क उठने पर जीव और जीविका दोनों को जलाकर भस्म कर देती है।भड़ककर जवान होने पर फायर फाइटर भी पसीना छोड़ते नजर आते हैं।

        आग से बचाव के द्वारा ही घर,गाँव, खेत,खलिहान जीव,जीविका सबको सुरक्षित रखा जा सकता है।इसको भड़कने का मौका नहीं दिया जाना ही सर्वोत्तम बचाव है।सावधानी बरतने से ही इसको शांत रखा जा सकता है।

      बीड़ी,सिगरेट के टोटें फेकते समय इन्हें पूर्णतया बुझा देना चाहिए।चूल्हे की घूरा में फेकने से पहले पूरी तरह बुझाकर ही फेंकना चाहिए।चिराग, ढ़िबरी,लालटेन बुझाकर ही सोना चाहिए।बचाव ही सर्वोत्तम उपाय है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

Comments

Popular posts from this blog

Holi colors with hubbub ;- होली के रंग, हुड़दंग के संग

helpsir.blogspot.com. Holi colors with hubbub ;- होली के रंग, हुड़दंग के संग आदरणीय सम्पादक जी
                           सादर प्रणाम ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।बसंत पंचमी के दिन ही गाँव के माली द्वारा होली का ढाह गाड़ दिया जाता है।जो भक्त प्रहलाद के प्रतीक स्वरूप गाड़ा जाता है।लोकगीत --"गड़िगा बसंता का ढ़ाहु बिना होली खेले न जाबै।"काफी प्रचलित लोकगीत है।
होलीगीत और लोकगीत "फाग"से बसंत पंचमी के बाद दसों दिशाएं गुंजायमान होने लगती हैं।प्रकृति नव पुष्पों और नई कोपलों नव पत्तों से धरा का नया श्रंगार करती है।पेंड़़-पौधे नये वस्त्र धारण करते हैं।         कभी होली गीत "फाग"बसंत पंचमी के बाद से हर गाँव गली मोहल्ला में फाग के आयोजन हुआ करते थे।घर-घर होली के बल्ले गोबर से उपलों की शक्ल में बनाए जाते थे।महीनों पहले से कचरी-पापड़ बनना शुरू हो जाते थे।फाग मण्डलियां शाम होते ही गायन प्रस्तुत करती थी।
 हर्सोल्लास का त्योहार  बड़े हर्षोल्लास से उमंग से लोग होली के हुड़दंग में शामिल होते थे।आपसी बैर भाव मिटाकर होली मिलते थे।पर आज मंहगाई तथा आप…

आजादी की अमर नेत्री नीरा नागिन ....विनोद पटेल

आजादी की इस अमर नेत्री को अंग्रेजी शासक ने इतनी यातनाएं दी गईं कि जानकारी होने पर आपका कलेजा मुँह को आजायेगा और नेहरू ही नही नेहरु परिवार कहता है कि चरखा से आजादी मिली?
         नीरा आर्य की कहानी। जेल में जब मेरे स्तन काटे गए ! स्वाधीनता संग्राम की मार्मिक गाथा। एक बार अवश्य पढ़े, नीरा आर्य (१९०२ - १९९८) की संघर्ष पूर्ण जीवनी ।
        नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में भारतीय  सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था | नीरा के मन मे देश की आजादी के प्रति उत्कट भावना थी । नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए इन्होंने अंग्रेजी सेना में तैनात अपने ही अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी |      नीरा ने अपनी एक आत्मकथा भी लिखी है | इस आत्म कथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है -👇🏼      5 मार्च 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी सेठ छज्जूमल के घर जन्मी नीरा आर्य आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सक्रिय सिपाही थीं, जिन पर अंग्रेजी सरकार ने , इनपर भी गुप्तचर होने का झूठा आरोप लगाया था।       बीरबाला नीरा ​को "…

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मे चुनाव एक पर्व ;

helpsir.blogspot.com दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मेचुनाव एक पर्व  आदरणीय सम्पादक जी 
                           सादर प्रणाम         दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में चुनाव पर्व की घोषणा कल दि०10-03-2019 को चुनाव पर्व की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो चुकी है।चुनावी बिगुल बज चुका है।राजनीतिक दलएन.डी.ए.तथा यू.पी.ए. रूपी पाण्डव और कौरव सेना में शामिल होकर चुनावी महाभारत फतेह करनें के इरादे से 2019 लोकसभा रूपी कुरूक्षेत्र में कूद पड़े हैं। 29 मई को मतगणना में सभी दलों के प्रदर्शन का परिणाम घोषित हो जाएगा।         अगर वास्तविक चुनावीपरिवेशपर समीक्षात्मक नजर ड़ाली जाय,तो राजनीति मे कोई किसी का न तो स्थाई मित्र होता है न ही स्थाई दुश्मन। एक दूसरे के प्रतिद्वंदी  भी स्वार्थ के वशीभूत होकर केवल जीत के लिये किसी भी दल से टिकट पाने की कोशिश मे लग जाते हैं।

       सभी दल पूरे दम-खम के साथ खम ठोंक रहे हैं।लोकतंत्र मंदिर के पुजारी यानि मतदाता पाँच वर्ष में एक बार होनें वाली पूजा में आहुति डालनें को तैयार हैं।भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव में सारी दुनिया की निगाहें टिकी रहती हैं…