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आतंकवाद का घिनौना रुप

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आदरणीय सम्पादक जी

                             सादर प्रणाम

      शिक्षित और सभ्य समाज में आतंकवाद का कोई स्थान नहीं है।आतंकवाद की कोई जाति और धर्म भी नहीं होता है।यह सभ्य और शिक्षित समाज में एक कैंसर की तरह ही होता है।इसका समूल नाश ही एकमात्र इलाज है।आतंकवाद और हिन्सा का समर्थन और पोषण करने वाले पाकिस्तान जैसे देशों का पूर्णतया बहिष्कार करने की जरूरत है।सभी देश इस लाइलाज कैंसर जैसे रोग के सफाए के लिए एकजुट होकर जंग ही एकमात्र विकल्प है।
        आज प्रायः सभी देश एक-एककर इस दंश का शिकार हो रहे हैं।अच्छे और बुरे आतंकवाद का भेद किए बगैर इस वैश्विक बुराई पर वार किए जाने की जरूरत है।

      अभी हाल ही में ईस्टर के पावन और पुनीत अवसर पर श्रीलंका में चर्चों और होटलों पर एकसाथ हमले करके निर्दोष और ईश्वर भक्तों पर कायराना हमला करके लगभग 250 सौ से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।और लगभग 500 सौ से अधिक लोगों को घायल किया गया है।श्रीलंका में आपातकाल लगाने पर मजबूर किया गया है।मैं हताहत लोगों की अश्रुपूरित श्रद्धांजली अर्पित करता हूँ।और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ ।
      भारत नें खुफिया जानकारी साझा की थी।और ऐसे हमले के प्रति सचेत भी किया था।परन्तु समय रहते श्रीलंका नें प्रभावी और ठोस कार्यवाही नहीं की ।यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कार्यवाही की गई होती तो इस हादसे को टाला जा सकता था।

        इस तरह के कायरता पूर्ण हमले की जितनी भी भर्तसना की जाय कम है।पूरी दुनिया के देशों से निवेदन है कि ऐसे कायरतापूर्ण हमले की सभी देश विरोध करें।और सभी देश मिलकर आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष करें।अन्यथा एक एक कर सभी देशों को कीमत चुकानी पड़ेगी।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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                             सादर प्रणाम


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