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महापर्व..... लोकतंत्र

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आदरणीय सम्पादक जी
                        सादर प्रणाम


        पाँच साल बाद आने वाला महापर्व लोकतंत्र आ चुका है।इस महायज्ञ रूपी महापर्व में प्रथम आहुति प्रथम चरण के मतदान 11 अप्रैल को पड़़ चुकी है।मतदान मध्यम से भारी हुआ है।यू.पी.में मतदान प्रतिशत 63 रहा है।सबसे कम मतदान प्रतिशत 57 बिहार का रहा है।7 चरणों में होने वाले मतदान का पहला चरण बिना हिन्सा के समाप्त हो चुका है।त्रिपुरा आदि में 81% तक मतदान हुआ है।जो स्वस्थ लोकतंत्र का परिचायक है।

        सरकार और निजी संगठनों के भारी प्रयास स्वरूप मतदाता अवश्य जागरूक हुआ है।बढ़ा मतदान प्रतिशत इस बात का सबूत रहा है।अनपढ़ और गरीब वर्ग इस यज्ञ रूपी महापर्व में आहुति डालने में सदैव आगे रहा है।पढ़ा लिखा शिक्षित वर्ग मतदान करने में सदैव से ही उदासीन रहा है।जागरूक केवल जागे हुए इसी वर्ग को करना है।अपना स्वार्थ और निजी कार्य छोड़कर इस महापर्व के लिए समय निकाल कर मतदेय स्थल तक अवश्य पहुंच कर मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेकर नये भारत का निर्माण में सक्रिय योगदान अवश्य करें।

         किसी भी प्रकार के प्रलोभन और मुफ्त प्राप्त होने वाले नशे जैसे शराब, मदिरा, धन,साड़ी, बर्तन, रुपया,पैसा देने वालों के झांसे में न फंसें यह सब देनेवाले प्रत्याशियों और उनके एजेंटो की शिकायत चुनाव आयोग से तुरंत करें।ऐसा करना चुनाव आचार संहिता का खुला उलंघन है।और कानूनी अपराध है।धन और सामान तथा शराब, मदिरा पिलाना लोकतंत्र में अपराध माना गया है।यदि कोई बाहुबली जबरदस्ती वोट डालने के लिए मजबूर करता है तो यह भी संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।

          अतः आम जन मानस से अनुरोध है कि बिना किसी जोर जबरदस्ती के बिना किसी डर दबाव के बिना किसी प्रलोभन के योग्य और ईमानदार प्रत्याशी को देश हित में मतदान करें।कोई भी मतदाता छूटना नहीं चाहिए सबको मतदान के लिए जागरूक और प्रेरित करने की कृपा करेंं।एक भी मतदाता छूटे ना।सबको मतदान करना है।

           "पहले मतदान।फिर जलपान।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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