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प्रबन्धतन्त्र द्वारा अपने पाल्यों को टापर बनाने का कुत्सित प्रयास

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आदरणीय सम्पादक जी
                            सादर प्रणाम


         बिहार के टापर घोटाला और व्यापम् घोटाले की आँच ठंडी भी नहीं हुई थी।कि इस बीमारी के वायरस यू.पी.के रायबरेली जिले तक आ पहुंचे हैं।बुराई स्वयमेव बड़ी तेजी से  फैलतीहै।जबकि अच्छाई को प्रचारित, प्रसारित करना पड़ता है।
       यू.पी.के रायबरेली जिले के प्रबंध तंत्र के एक विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य द्वारा अपने लड़के/लड़कियों को टापर बनाने का एक मामला प्रकाश में आया है।
      डी.आई.ओ.एस.द्वारा जांच के आदेश दे दिए गए हैं।जो भी हो लेकिन यह परंपरा गलत है।इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाय कम है।इससे असली प्रतिभाएं कुण्ठित होती हैं।उनका मनोबल गिरता है।और वह अवसाद का शिकार होते हैं।
        सच तो यह है कि प्रतिभाओं को पुष्पित,पल्लवित होनें का अवसर मिलना चाहिए।और वह इनाम,इकराम के हकदार होते हैं।लड़का चाहे पी.एम.,सी.एम.किसी का भी हो।अगर उसमें प्रतिभा का अभाव है तो उसे टापर बनाने का मिथ्या प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।प्रतिभा ईश्वर प्रदत्त होती है।
        प्रतिभा हनन का कोई भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।प्रतिभा तराशने, संवारने का प्रयास किया जाना चाहिए।जबरदस्ती टापर बनाने से वह टापर नहीं बन सकता।प्रतियोगी परीक्षाओं में कलई खुल जाएगी।पीतल पर सोने का पानी चढ़ाने से वह सोना नहीं बन सकती।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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वैश्विक खतरा आतंकवाद को चीन का प्रश्रय
आदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम


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                         सादर प्रणाम

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