Skip to main content

नयी पीढ़ी मे पश्चिमी सभ्यता की झलक

helpsir.blogspot.com
आदरणीय सम्पादक जी
                              सादर प्रणाम
               मेरे भारत महान की सभ्यता, संस्कृति और जीवन मूल्यों के कारण ही भारत को महान बनाते हैं।हिन्दू धर्म और हिन्दू दर्शन की शिक्षाएं ही इसे अन्य धर्मों से अलग पहचान दिलाते हैं।हमारे संस्कार ही हमें वसुधैव कुटुम्बकम की शिक्षा देते हैं।
              हमारी नई पीढ़ी के युवाओं, तरुणों में पश्चिमी सभ्यता की झलक देखी जा सकती है।हमारे जीवन मूल्यों, आदर्शों और संस्कारों का पतन न ई पीढ़ी में आसानी से देखने को मिल जायेगा।जो काम गोरी,गजनी,तैमूर और अंग्रेज नहीं कर सके वह काम सोशल मीडिया और दूरदर्शन के आधुनिक चैनलों नें कर दिखाया।मीडिया और चैनलों का असर युवा और तरुण वर्ग में गहरी छाप साफ देखी जा सकती है।हम थोड़ा-थोड़ा अंग्रेज होते जा रहे हैं।अंग्रेजियत हिन्दुस्तानी पर थोड़ा-थोड़ा भारी पड़ती जा रही है।वाइन,व्हिस्की, रम,मदिरा का सेवन नई पीढ़ी में बढ़ा है।युवा नशे के मकड़जाल में उलझते ही जा रहे हैं।गांजा का उपयोग भी काफी बढ़ा है।नई पीढ़ी में पार्टी संस्कृति का चलन कुछ ज्यादा ही बढ़ा है।नशें में डी.जे.की धुनों पर थिरकना फिदरत बनती जा रही है।आदर,सम्मान करने की आदतों में ह्रास होता जा रहा है।वृद्ध जन शेल्टर होमों की शोभा बनते जा रहे हैं।
        हमें खुद सुधरना ही होगा।उधार की सभ्यता,संस्कृति से बचना होगा।हमें अपनी सभ्यता संस्कृति का प्रचार प्रसार करनें और जीवन में अपनाने की जरूरत है।
           यूनान मिश्र रोमा सब मिट गये जहाँ से।
                     कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी।।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

Comments

Popular posts from this blog

Holi colors with hubbub ;- होली के रंग, हुड़दंग के संग

helpsir.blogspot.com. Holi colors with hubbub ;- होली के रंग, हुड़दंग के संग आदरणीय सम्पादक जी
                           सादर प्रणाम ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।बसंत पंचमी के दिन ही गाँव के माली द्वारा होली का ढाह गाड़ दिया जाता है।जो भक्त प्रहलाद के प्रतीक स्वरूप गाड़ा जाता है।लोकगीत --"गड़िगा बसंता का ढ़ाहु बिना होली खेले न जाबै।"काफी प्रचलित लोकगीत है।
होलीगीत और लोकगीत "फाग"से बसंत पंचमी के बाद दसों दिशाएं गुंजायमान होने लगती हैं।प्रकृति नव पुष्पों और नई कोपलों नव पत्तों से धरा का नया श्रंगार करती है।पेंड़़-पौधे नये वस्त्र धारण करते हैं।         कभी होली गीत "फाग"बसंत पंचमी के बाद से हर गाँव गली मोहल्ला में फाग के आयोजन हुआ करते थे।घर-घर होली के बल्ले गोबर से उपलों की शक्ल में बनाए जाते थे।महीनों पहले से कचरी-पापड़ बनना शुरू हो जाते थे।फाग मण्डलियां शाम होते ही गायन प्रस्तुत करती थी।
 हर्सोल्लास का त्योहार  बड़े हर्षोल्लास से उमंग से लोग होली के हुड़दंग में शामिल होते थे।आपसी बैर भाव मिटाकर होली मिलते थे।पर आज मंहगाई तथा आप…

Global threat - Terrorism China's cooperation i वैश्विक खतरा - आतंकवाद चीन का प्रश्रय

helpsir.blogspot.com
वैश्विक खतरा आतंकवाद को चीन का प्रश्रय
आदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम


      भारत के दो दुश्मन चीन और पाकिस्तान भारत की छाती पर आखिर कब तक मूंग दलते रहेंगे।भारत नें संयुक्त राष्ट्र संघ से दो बार आतंकी मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने के लिए प्रयास किए।लेकिन चीन की अड़ंगेबाजी के कारण चीन का प्रश्रयदोनों बार मुँह की खानी पड़ी।
      किन्तु जब इस बार भारत के अविचल प्रयासों से फ्रांस, अमेरिका, इंंग्लैण्ड के संयुक्त प्रयास किया,तो उन्हें भी चीन की ही अड़ंगेबाजी के कारण मुँह की खानी पड़ी है।
       आखिर चीन क्यों बार-बार आतंकियों को बचाता है। ऐसा करके वहविश्व पटलपर क्या संदेश देना चाहता है।

विश्व बिरादरी पाकिस्तान को साथ देने के लिए चीन पर कूटनीतिक दबाव बनाने में क्यों विफल हो जाता है?इसका सीधा और सटीक जवाब यही हो सकता है कि वह ( चीन)परोक्ष रूप से आतंकवाद का पोषण कर रहा है।
      यही कारण है कि अमेरिका, इंंग्लैण्ड, फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश अपने आतंकवाद के उन्मूलन के प्रयासों मे विफल हो जाते हैं। वास्तविकता के धरातल पर यह की चीन की…

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मे चुनाव एक पर्व ;

helpsir.blogspot.com दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मेचुनाव एक पर्व  आदरणीय सम्पादक जी 
                           सादर प्रणाम         दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में चुनाव पर्व की घोषणा कल दि०10-03-2019 को चुनाव पर्व की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो चुकी है।चुनावी बिगुल बज चुका है।राजनीतिक दलएन.डी.ए.तथा यू.पी.ए. रूपी पाण्डव और कौरव सेना में शामिल होकर चुनावी महाभारत फतेह करनें के इरादे से 2019 लोकसभा रूपी कुरूक्षेत्र में कूद पड़े हैं। 29 मई को मतगणना में सभी दलों के प्रदर्शन का परिणाम घोषित हो जाएगा।         अगर वास्तविक चुनावीपरिवेशपर समीक्षात्मक नजर ड़ाली जाय,तो राजनीति मे कोई किसी का न तो स्थाई मित्र होता है न ही स्थाई दुश्मन। एक दूसरे के प्रतिद्वंदी  भी स्वार्थ के वशीभूत होकर केवल जीत के लिये किसी भी दल से टिकट पाने की कोशिश मे लग जाते हैं।

       सभी दल पूरे दम-खम के साथ खम ठोंक रहे हैं।लोकतंत्र मंदिर के पुजारी यानि मतदाता पाँच वर्ष में एक बार होनें वाली पूजा में आहुति डालनें को तैयार हैं।भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव में सारी दुनिया की निगाहें टिकी रहती हैं…