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भूगर्भ जल दोहन

आदरणीय सम्पादक जी

                           सादर प्रणाम

         ऋतुराज बसंत आ चुका है।गर्मी ने दस्तक दे दी है।पशु-पक्षी,मानव सभी लोग परेशान होने वाले हैं।अत्यधिक भूगर्भ जल दोहन के कारण भूगर्भ जल स्तर घटता ही जा रहा है।लोगों को स्वच्छ पेयजल का संकट बढ़ने ही वाला है।
       हमारे यहाँ रिवाज है कि प्यास लगने पर ही कुआँ खोदा जाता है।गर्मी की शुरूआत में ही इण्डिया मार्का हैण्डपम्प की स्थिति का सर्वे करवाने की जरूरत है।कौन सा इण्डिया मार्का हैण्डपम्प रीबोर होने वाला है।कौन सा हैण्डपम्प मरम्मत करने वाला है।चिन्हित कर लेना चाहिए।ताकि गर्मियों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति बाधित न हो सके।
        लोगों को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।भूगर्भ जल स्तर बनाए रखने के लिए नहरों का वर्ष भर प्रवाह बनाए रखा जाना चाहिए।किसान को मेंथा की फसल में पानी की समस्या से भी दो-चार न होना पड़े।
         यदि सकारात्मक और रचनात्मक सोच हो तो संंसार के प्रत्येक प्राणी यथा मानव,पशु,पक्षियों और अन्य छोटे छोटे सजीवोंं को भी पेयजल संकट से बचाया जा सकता है।बुन्देलखण्ड की ही तरह पिछली गर्मी में मैदानी क्षेत्रों में भी शुद्ध पेयजल संकट और भूगर्भ जल स्तर की समस्या से दो-चार होना पड़ा था।

        अतः सरकार से निवेदन है कि समय पूर्व ही इस विकराल समस्या को चिन्हित कर निराकरण करने की कृपा करें।ताकि लोगों और किसानों को होने वाली परेशानियों से बचाया जा सके।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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आदरणीय सम्पादक जी
                             सादर प्रणाम


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