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कलंकित दोस्ती

आदरणीय सम्पादक जी 

                              सादर प्रणाम।

         अपने भारत देश में दोस्ती के लिए सिर कटा देने वाले दोस्तों की मिशालें भरी पड़ी हैं।शोले फिल्म की जय-बीरू की जोड़ी ऐसी ही दोस्ती की मिशाल पेश करती है।आल्हा खण्ड में लाखन कुँवर कनौजी राय और ऊदल की दोस्ती का प्रमाण प्रमुखता से लिखा गया है।लाखन और ऊदल नें गंगा में दोस्ती निभाने की शपथ ली थी और निभाई भी।कर्ण और दुर्योधन की दोस्ती कलयुग में कृष्ण और अर्जुन की दोस्ती त्रेता युग में राम और सुग्रीव की मित्रता सतयुग में अग्नि देव और इन्द्र देव की मित्रता के प्रमाण मिलते हैं।मित्रता खून के रिश्ते से बड़ी होती है क्योंकि यह दिल के रिश्ते से जुड़ी होती है।

आजकल मित्रता के पैमाने और मापदण्ड ही बदल गए हैं।अब लोग मित्रता लालच और स्वार्थ के कारण करते हैं।अब "यार ने ही लूट लिया घर यार का।"की तर्ज पर दोस्ती करते हैं।दोस्त की पत्नी पर ही बुरी नजर रखते हैं।दोस्ती में कत्ल के समाचार कामुक दोस्ती कलंकित दोस्ती बन कर रह जाती है।ऐसी गलत दोस्ती की घटनाएं ही कत्ल अथवा जरायम की दुनिया की जन्मदात्री होती है।अब आजकल की दोस्ती की दास्तानें समाचार पत्रों में आए दिन छपते ही रहते हैं।दोस्तों को दोस्ती के पैमाने और उसूल सिद्धांत पता ही नहीं है।पता भी है तो लालच और स्वार्थ तथा बेईमानी कामुकता का पर्दा आड़े आ जाता है।जिससे वह दोस्ती कलंकित दोस्ती में बदल जाती है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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