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रसायनयुक्त फल और सब्जियाँ



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

"मिलावट का जमाना है,कि जमाने में मिलावट है।जिधर देखो मिलावट में मिलावट ही मिलावट है।"

आज से दो दशक पहले केवल दूध में पानी मिलाने की बातें ही हुआ करती थी। अब पानी में दूध मिलाने की बात होती है।"पानी रे पानी तेरा रंग कैसा।जिसमें मिला दो लागे उस जैसा।"अब कालीमिर्च में पपीते के बीज,जीरा में सोया,अरहर की दाल में मटरी की दाल ,लाल मिर्च पाउडर में घुने ईंट का पाउडर,धनिया पाउडर में धनिया का डंठल और न जाने क्या-क्या?

हम अच्छे स्वास्थ्य के लिए फल और हरी सब्जियों का सेवन करते हैं।पर यह फल और सब्जियां अपने प्राकृतिक रूप में मिलें तब न।फलों को रसायनों के मेल से कच्ची ही पका कर बाजारों में उतार दी जाती हैं।इन रसायनों से लेपित फल फायदे की जगह नुकसान ज्यादा करते हैं।हाँ फायदा उपभोक्ताओं को नहीं केवल विक्रेताओं को ज्यादा होता है।सेबों की चमक बढ़ाने के लिए मोम की पालिश की जाती है।जिससे सेब चिर युवा दिखते हैं।आक्सीटोसिन के इंजेक्शन से लौकी एक ही रात में 6इंच से बढ़कर एक मीटर की हो जाती है।मिलावट खोर इसी तरह के रसायनों से अपने मुनाफे के लिए आम जनता को जहर परोसने का काम कर रहे हैं।उनको यह सोंचने की फुरसत कहाँ है कि यह अन्दाजा लगा सकें कि कितने भाई-बन्धु इस जहर से मरेंगे।मरते हैं तो ठेंगे से इनको तो अपने लाभ से मतलब है।

हरी सब्जियों में हरापन बढ़ाने के लिए रसायन और रंग लेपन किया जाता है।यह हरी दिखनेवाली सब्जी जहर भरी है।सभी उपभोक्ता इससे अन्जान होते हैं।सवाल यह उठता है कि हम क्या खाएं,क्या न खाएं?इस मिलावट के जमाने में शायद ही कोई शुद्ध चीज मिल जाए।वरना सभी चीजें मिलावट युक्त हैं।किसमें कौन सा खतरनाक रसायन मिला है।कहना मुश्किल है।

अतः सरकार से निवेदन है कि बाजारों में बिकने वाली फल,सब्जियों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है कि यह रसायन लेपित तो नहीं है।मिलावट खोरों पर नजर रखने के अलावा इन्हें दण्डित करने की भी जरूरत है ताकि यह मानव जीवन से खिलवाड़ न कर सकें।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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