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जवाहर नवोदय विद्यालय @ गिरती लोकप्रियता



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा 6 से कक्षा 12 तक मेधावी छात्रों की आवासीय विद्यालय की शिक्षा का एक सशक्त माध्यम है।इसमें प्रवेश के लिए कक्षा 5 के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के प्राइमरी स्कूलों के छात्र प्रवेश परीक्षा में प्रतिभाग करते हैं।परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को निःशुल्क आवासीय विद्यालय की सुविधा उपलब्ध होती है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।एक समय इसकी लोकप्रियता शिखर पर थी।शहरी क्षेत्रों के लोग कक्षा 5 में गांव, देहातों के प्राइमरी स्कूलों में अपने पाल्यों का एडमीशन केवल जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश हेतु करवाते थे।सी.बी.एस.सी.बोर्ड की शिक्षा इन विद्यालयों में प्राप्त होती है।अब शहरों/ग्रामीण क्षेत्रों में भी सी.बी.एस.सी.बोर्ड के अनेकों अच्छे पब्लिक स्कूल खुल गए हैं।अतः जवाहर नवोदय विद्यालय की लोकप्रियता में कमी अवश्य आई है।

अब जवाहर नवोदय विद्यालय में साफ, सफाई,गुणवत्ता पूर्ण भोजन,दवाई आदि में कुछ कमी अवश्य आई है।क्योंकि विगत कुछ वर्षों में इन आवासीय विद्यालयों में छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामलों में तेजी देखी गई है।कुछ न कुछ तो गलत हो ही रहा है।जो छात्रों को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहा है।वैसे शिक्षा के क्षेत्र में कोई कमी देखने को नहीं मिली है।आज भी उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 84%से अधिक ही है।जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र अन्य नौकरी वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता के झण्डे गाड़़ रहे हैं।

अतः सरकार से निवेदन है कि जवाहर नवोदय स्कूलों की दशा-दिशा सुधारने की कृपा करें।ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए कक्षा 6 से कक्षा 12 तक की निःशुल्क आवासीय शिक्षा का एकमात्र विकल्प है।इसको अपना खोया गौरव पुनः प्राप्त करने में मदद मिल सके।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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