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कृषक और कृषि यंत्र



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
भारत में 70% लोगों का मुख्य पेशा कृषि है।70% लोग अन्नदाता और किसान भगवान हैं।सवा अरब जनसंख्या का पेट यहीं 70% अन्नदाता भरते हैं।इसके अतिरिक्त विदेशों में अन्न निर्यात के द्वारा दुनिया के अन्य लोगों का भी पेट भरने का काम यहीं 70% किसान भगवान ही करते हैं।
किसानों का परम्परागत कृषि यंत्र देशी हल ,मिट्टी पलट हल अब केवल म्यूजियम में रखने वाले ही हैं।अब किसी किसान के पास बैल ही नहीं हैं तो हल का क्या काम?अब लगभग सभी किसानों की किसानी ट्रैक्टर पर आधारित है।जुताई से लेकर कटाई, मड़ाई तक सारा कार्य ट्रैक्टर आधारित ही है।कभी बैलगाड़ियों से बारात और मेला लोग आते जाते थे।अब यह सवारी गाड़ी केवल कृषि विज्ञान की किताबों तक ही सीमित होकर रह गई है।अब कोई किसान बनना ही नहीं चाहता।कभी यह कहावत मशहूर थी---"उत्तम खेती मध्यम बान।निकृष्ट चाकरी भीख निदान।।"अब चाकरी अर्थात सरकारी नौकरी प्रथम पसंद बनी हुई है।बैलगाड़ी, देशी हल,मिट्टी पलट हल केवल कृषि विज्ञान की किताबों तक ही सीमित होकर रह गए हैं।कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र भी किसानी से मुँह मोड़ चुके हैं।कोई किसानी करना नहीं चाहता है।खाना सभी अच्छा खाना चाहते हैं।अन्न उपजाना कोई नहीं चाहता है।
अब कृषि यंत्र,बैल तथा बैलगाड़ी किताबों और म्यूजियम में रखने की वस्तु बनकर रह गए हैं।
प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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